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डिजिटल भुगतान सूचकांक

डिजिटल भुगतान सूचकांक: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं नियोजन, संसाधन, वृद्धि, विकास एवं रोजगार से संबंधित मुद्दे।

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डिजिटल भुगतान सूचकांक: संदर्भ

  • हाल ही में, आरबीआई ने डिजिटल भुगतान सूचकांक जारी किया है जो दर्शाता है कि भारत में डिजिटल भुगतान सितंबर 2021 में बढ़कर 06 हो गया, जो एक वर्ष पूर्व इसी माह में 217.74 था।

 

डिजिटल भुगतान सूचकांक: प्रमुख बिंदु

  • डिजिटल भुगतान में लगभग 40% की वृद्धि हुई है जो हमारे देश में डिजिटल मोड के माध्यम से भुगतान की गहनता को प्रदर्शित करता है।
  • आरबीआई ने कहा कि आरबीआई-डीपीआई सूचकांक देश भर में डिजिटल भुगतान को अपनाने एवं उसे और गहन करने में उल्लेखनीय वृद्धि प्रदर्शित कर रहा है।
  • आरबीआई ने कहा कि सूचकांक चार माह के अंतराल के साथ अर्ध-वार्षिक आधार पर प्रकाशित किया जाएगा।
  • आरबीआई-डीपीआई की आधार अवधि मार्च 2018 निर्धारित की गई है, जिसका अर्थ है कि मार्च 2018 के लिए डीपीआई स्कोर 100 पर निर्धारित किया गया है।

 

डिजिटल भुगतान सूचकांक (डीपीआई) सूचकांक के बारे में

  • डीपीआई सूचकांक में पांच विस्तृत मापदंड सम्मिलित हैं जो हमें विभिन्न समय अवधि में देश में डिजिटल भुगतान के अंतर्वेशन को जानने में सक्षम बनाते हैं।
  • मापदंड: भुगतान सक्षमकर्ता (25 प्रतिशत भार के साथ), भुगतान अवसंरचना-मांग-पक्ष कारक (10 प्रतिशत), भुगतान अवसंरचना-आपूर्ति पक्ष कारक (15 प्रतिशत), भुगतान प्रदर्शन (45 प्रतिशत) एवं उपभोक्ता केन्द्रीयता (5 प्रतिश।

 

भारत में डिजिटल भुगतान

  • विशेषज्ञों ने बताया है कि कोविड -19 महामारी ने देश में 5-10 वर्षों में डिजिटल भुगतान को अग्रगत किया है।
  • जेफ्रीज ने बताया कि भारत में बैंकिंग ऐप, कार्ड, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई), मोबाइल वॉलेट तथा सरकार द्वारा संचालित प्रत्यक्ष-लाभ हस्तांतरण का संयोजन किए जाने पर वार्षिक आधार पर 2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का डिजिटल भुगतान होता है।
  • यूपीआई भुगतानों में सर्वाधिक वृद्धि देखी गई है एवं वार्षिक भुगतान (अगस्त 2021 तक) में 1 ट्रिलियन डॉलर का गठन करता है, इसके बाद तत्काल भुगतान सेवाओं (इमीडिएट पेमेंट्स सर्विसेज/आइएमपीएस का स्थान है।
  • जबकि मोबाइल वॉलेट में वृद्धि हो रही है, उनका लेनदेन बाजार हिस्सा कम है, जबकि नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) अभी भी वार्षिक भुगतान में 6 ट्रिलियन डॉलर का प्रभुत्व रखता है।

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डिजिटल भुगतान के विस्तार के कारण

  • सरकार एवं नियामक की पहल के संयोजन से डिजिटल के पक्ष में नकद लेनदेन का तेजी से प्रतिस्थापन हुआ है।
  • इनमें जैम ट्रिनिटी (जन धन बैंक खाते), आधार आधारित पहचान एवं मोबाइल अंतर्वेशन, यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग एवं पेमेंट गेटवे जैसे प्लेटफॉर्म का शुभारंभ शामिल हैं।
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