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जलीय कृषि में एएमआर वृद्धि 

जलीय कृषि में एएमआर वृद्धि: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन।

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जलीय कृषि में रोगाणुरोधी प्रतिरोध: प्रसंग

  • हाल ही में, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को इसके विरुद्ध परामर्शिका जारी करने के बावजूद जलीय कृषि क्षेत्र में एंटीबायोटिक दवाओं के निरंतर उपयोग के खतरे के बारे में सतर्क किया है।

 

जलीय कृषि में रोगाणुरोधी प्रतिरोध: मुख्य बिंदु

  • मंत्रालय ने कहा कि जलीय कृषि किसानों, विशेष रूप से झींगा जलीय कृषि को बड़ी मात्रा में एंटीबायोटिक दवाओं का विक्रय किया जाना गंभीर चिंता का विषय है।
  • एंटीबायोटिक दवाओं का अंधाधुंध उपयोग रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबॉयल रेजिस्टेंस/एएमआर) के विकास सहित गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकता है।
  • मंत्रालय ने यह भी सूचित किया है कि भारत से कुछ झींगा प्रेषण (खेपों) को एंटीबायोटिक दवाओं का पता लगाने के कारण अस्वीकृत कर दिया गया है।
  • इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने राज्यों को झींगे के निर्यात में संभावित हानि की चेतावनी दी है, जिससे यदि प्रवृत्ति जारी रहती है, तो जलीय कृषि उद्योग को गंभीर आघात पहुंच सकता है।

 

जलीय कृषि में एंटीबायोटिक्स: सुझाए गए चरण

  • तटीय जलीय कृषि प्राधिकार (कोस्टल एक्वाकल्चर अथॉरिटी) ने पूर्व में ही झींगा जलीय कृषि (श्रिम्प एक्वाकल्चर) में उपयोग के लिए प्रतिबंधित एंटीबायोटिक/औषधशास्त्रीय (फार्माकोलॉजिकली) सक्रिय पदार्थों की सूची जारी कर दी है।
  • पत्र में मुख्य सचिवों से राज्य औषधि नियंत्रकों को पशु चिकित्सा उपयोग के लिए एंटीबायोटिक दवाओं के विक्रय एवं वितरण के अनुश्रवण एवं विनियमन के लिए कार्रवाई करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि एंटीबायोटिक्स केवल पंजीकृत पशु चिकित्सकों द्वारा लिखे गए पर्चे पर विक्रय किए जाएं।
  • झींगा मत्स्य पालन में 20 द्रव्यों/पदार्थों के विक्रय पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा देना चाहिए। उत्पादकों एवं जलीय कृषि किसानों को, खिलाने के लिए थोक में एंटीबायोटिक दवाओं के विक्रय को भी कठोरता से नियंत्रित एवं मॉनिटर किया जाना चाहिए।

 

रोगाणुरोधी प्रतिरोध क्या है?

  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एंटीमाइक्रोबॉयल रेजिस्टेंस/एएमआर) सूक्ष्मजीवों की वह क्षमता है जो उनका संदमन करने या मारने के लिए डिज़ाइन की गई दवाओं की उपस्थिति में बने रहने या वृद्धि करने की क्षमता है।
  • रोगाणुरोधी नामक इन दवाओं का उपयोग जीवाणु (बैक्टीरिया), कवक,  विषाणु (वायरस) एवं प्रोटोजोआ परजीवी जैसे सूक्ष्मजीवों के कारण होने वाले संक्रामक रोगों के उपचार हेतु किया जाता है।
  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) मानव एवं पशु स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती चिंता का एक प्रमुख वैश्विक खतरा है। इसका खाद्य निरापदता, खाद्य सुरक्षा एवं लाखों कृषक परिवारों के आर्थिक कल्याण पर भी प्रभाव पड़ता है।

 

एएमआर का निहितार्थ

  • जब सूक्ष्मजीव रोगाणुरोधी के प्रति प्रतिरोधी बन जाते हैं, तो मानक उपचार प्रायः अप्रभावी हो जाते हैं एवं कुछ मामलों में, कोई भी औषधि/दवा प्रभावी चिकित्सा प्रदान नहीं करती है। परिणामस्वरुप, उपचार विफल हो जाते हैं।
  • इससे मनुष्यों, पशुओं एवं पौधों में रोग तथा मृत्यु दर बढ़ जाती है।
  • कृषि के लिए, इससे उत्पादन हानि होती है, आजीविका को नुकसान पहुंचता है एवं खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
  • इसके अतिरिक्त, एएमआर विभिन्न पोषियों एवं पर्यावरण में फैल सकता है तथा रोगाणुरोधी प्रतिरोधी सूक्ष्मजीव खाद्य श्रृंखला को दूषित कर सकते हैं।

 

पशु और पौधों के उत्पादन में रोगाणुरोधी के उपयोग में वृद्धि करने वाले कारक:

  • पर्यावरणीय स्वच्छता, पोषण, कृषिकर्म एवं अन्य प्रबंधन अभ्यासों के संशोधन के माध्यम से अन्यथा रोके जा सकने वाले रोगों का बोझ;
  • पशु एवं पौधों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों तक सीमित पहुंच, साथ ही इन विशेषज्ञों के लिए प्रशिक्षण एवं सहयोग में सीमाएं;
  • पशुओं में वृद्धि एवं उत्पादन संवर्धकों (प्रमोटरों) के रूप में रोगाणुरोधी का उपयोग;
  • रोगाणुरोधी दवाओं के उपयोग के विनियमन एवं अनुश्रवण का अभाव;
  • काउंटर या इंटरनेट पर बिक्री जो रोगाणुरोधी दवाओं को सुगमता से उपलब्ध कराती है;
  • अवमानक (घटिया) एवं नकली एंटीमाइक्रोबायल्स की उपलब्धता एवं उपयोग;
  • उचित कार्य पद्धति के बारे में जागरूकता का अभाव, जिसके कारण अत्यधिक या अनुचित उपयोग होता है;
  • मानवशास्त्रीय, सामाजिक-सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं आर्थिक कारक जो  उचित कार्य पद्धतियों में बाधा उत्पन्न करते हैं।

 

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जलीय कृषि में एंटीबायोटिक्स

  • संवर्धित मछलियों में रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) का उभरना जलीय कृषि के समक्ष उत्पन्न होने वाली प्रमुख चुनौतियों में से एक है।
  • मछलियों में जीवाणु संक्रमण के उच्च प्रसार से मत्स्य पालक-किसानों द्वारा एंटीबायोटिक दवाओं का बार-बार उपयोग किया जाता है एवं इससे जलीय वातावरण में उनका दीर्घ स्थायित्व बना रहता है। बदले में किसका परिणाम एंटीबायोटिक प्रतिरोधी बैक्टीरिया में वृद्धि है।
  • सजावटी मछलियों सहित अधिकांश संवर्धित मछलियों में विविध रोगाणु होते हैं जो अनेक एंटीबायोटिक प्रतिरोध प्रदर्शित करते हैं।
  • सुझाए गए उपाय: जलीय कृषि में रोगाणुरोधी प्रतिरोध के प्रसार को रोकने के लिए निरंतर अनुश्रवण कार्यक्रम, प्रतिरोधी बैक्टीरिया का समय पर पता लगाना तथा उचित विनियमों को लागू किया जाना आवश्यक है।

 

 

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