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संयुक्त राष्ट्र आरईडीडी एवं संयुक्त राष्ट्र आरईडीडी+

संयुक्त राष्ट्र आरईडीडी एवं संयुक्त राष्ट्र आरईडीडी+: प्रासंगिकता

  • जीएस 2: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह तथा भारत से जुड़े एवं / या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते।
  • जीएस 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन।

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संयुक्त राष्ट्र आरईडीडी

  • विकासशील देशों में वनोन्मूलन एवं वन क्षरण से उत्सर्जन को कम करने पर संयुक्त राष्ट्र सहयोगात्मक कार्यक्रम (यूएन-आरईडीडी) जलवायु संकट के वन समाधान पर संयुक्त राष्ट्र का ज्ञान एवं सलाहकारी मंच है।
  • यूएन-आरईडीडी को 2008 में आरंभ किया गया था एवं यह संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) तथा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की तकनीकी विशेषज्ञता पर आधारित है।
  • बाली कार्य योजना के तहत सीओपी 13 में, यह निर्णय लिया गया कि आरईडीडी को 2012 पश्च की संरचना में सम्मिलित किया जाना है एवं इसके विवरण कोपेनहेगन में सीओपी 15 के दौरान निर्धारित किए जाने थे।

 

संयुक्त राष्ट्र आरईडीडी लक्ष्य

  • नीचे बताए गए लक्ष्यों को 2025 तक प्राप्त किया जाना है
    • वन उत्सर्जन में प्रति वर्ष 1 गीगाटन की कमी लाना।
    • 2025 तक 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाना।
    • 15 से अधिक देशों ने एनडीसी में वर्धित वन महत्वाकांक्षाएं।

 

संयुक्त राष्ट्र आरईडीडी+

  • वनोन्मूलन एवं वन क्षरण (आरईडीडी+) से उत्सर्जन को कम करना जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संरचना अभिसमय (यूएनएफसीसीसी) के पक्षकारों द्वारा विकसित एक तंत्र है।
  • यह विकासशील देशों को वन भूमि से उत्सर्जन को कम करने एवं सतत विकास के लिए अल्प कार्बन मार्ग में निवेश करने हेतु प्रोत्साहन की पेशकश करके वनों में संग्रहीत कार्बन के लिए एक वित्तीय मूल्य का निर्माण करता है।
  • संयुक्त राष्ट्र आरईडीडी+ मात्र वनोन्मूलन एवं वन क्षरण से परे है तथा इसमें संरक्षण की भूमिका, वनों का सतत प्रबंधन एवं वन कार्बन स्टॉक में वृद्धि सम्मिलित है।
  • आरईडीडी+ को निम्न कार्बन विकास एवं निर्धनता में कमी के विस्तार में सहायता करने हेतु उत्तर से दक्षिण की ओर धन को निर्देशित करने के लिए एक तंत्र के रूप में देखा जाता है।

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आरईडीडी एवं आरईडीडी+ के मध्य अंतर

  • आरईडीडी “वनोन्मूलन एवं वन क्षरण से उत्सर्जन को कम करने” (रिड्यूजिंग ईमिसंस फ्रॉम डिफॉरेस्टेशन एंड फॉरेस्ट डिग्रेडेशन) का संक्षिप्त नाम है, इसके बाद आरईडीडी +, “प्लस” के साथ “विकासशील देशों में वनों के संरक्षण, सतत प्रबंधन एवं वन कार्बन स्टॉक की वृद्धि” (द रोल ऑफ कंजर्वेशन, सस्टेनेबल मैनेजमेंट ऑफ फॉरेस्ट्स एंड एनहांसमेंट ऑफ द फॉरेस्ट कार्बन स्टॉक्स इन डेवलपिंग कंट्रीज) से संदर्भित है।
  • संयुक्त राष्ट्र-आरईडीडी कार्यक्रम एवं वन कार्बन भागीदारी सुविधा (एफसीपीएफ) एवं वन निवेश कार्यक्रम (एफआईपी) सहित अन्य बहुपक्षीय, आरईडीडी+ रणनीतियों को अभिकल्पित एवं कार्यान्वित करने के लिए क्षमता निर्माण हेतु वित्तीय एवं तकनीकी सहायता के साथ विकासशील देशों को सहयोग प्रदान करते हैं। जबकि आरईडीडी+ एक जलवायु परिवर्तन शमन समाधान है जिसे पक्षकारों द्वारा जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संरचना अभिसमय (यूएनएफसीसीसी) के लिए विकसित किया जा रहा है, जो विकासशील देशों को अपने वनों को सुरक्षित रखने हेतु प्रोत्साहन प्रदान करता है।

 

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