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भारतीय पैंगोलिन

भारतीय पैंगोलिन- यूपीएससी परीक्षा हेतु प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 3: पर्यावरण संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण

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भारतीय पैंगोलिन- संदर्भ

  • हाल ही में, ओडिशा वन एवं पर्यावरण विभाग ने भारतीय पैंगोलिन की अपनी पहली रेडियो-टैगिंग पूरी की है।
  • राज्य में भारतीय पैंगोलिन के पुनर्वास प्रोटोकॉल को मानकीकृत करने के प्रयास में भारतीय पैंगोलिन की रेडियो-टैगिंग की गई थी।

 

भारतीय पैंगोलिन- रेडियो-टैगिंग

  • रेडियो-टैगिंग: एक नर पैंगोलिन, जिसे पिछले महीने परलाखेमुंडी वन प्रभाग द्वारा बचाया गया था, को रेडियो-टैग किया गया एवं उसके उपचार के पश्चात नंदनकानन वन्यजीव अभ्यारण्य में छोड़ दिया गया।
  • ट्रैकिंग: ओडिशा वन विभाग ने कहा कि यागी एंटीना एवं रिसीवर का उपयोग करके पशुओं को ट्रैक किया जाएगा।

 

भारत में पैंगोलिन: प्रमुख बिंदु

  • पैंगोलिन के बारे में: पैंगोलिन (जिसे स्केली एंटइटर्स भी कहा जाता है) दुनिया भर में पाए जाने वाले एक लम्बी, कवच-आवरित कीटभक्षी स्तनपायी हैं।
  • प्रजातियाँ: दुनिया भर में पैंगोलिन की आठ प्रजातियाँ विस्तृत हैं। इन आठ प्रजातियों में से भारतीय पैंगोलिन एवं चीनी पैंगोलिन भारत में पाए जाते हैं।
    • चीनी पैंगोलिन: आईयूसीएन रेड लिस्ट एवं सीआईटीईएस (संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय) के परिशिष्ट 1 के तहत के तहत गंभीर रूप से लुप्तप्राय (क्रिटिकली एंडेंजर्ड) के रूप में सूचीबद्ध।
    • भारतीय पैंगोलिन:आईयूसीएन रेड लिस्ट एवं सीआईटीईएस के परिशिष्ट 1 के तहत लुप्तप्राय (एंडेंजर्ड) के रूप में सूचीबद्ध।
  • भोज्य व्यवहार: पैंगोलिन मुख्य रूप से चींटियों एवं दीमकों को खाने वाले कीड़ों (कीटभक्षी) का भोजन करता है, उन्हें टीले एवं वृक्ष के तने खोदकर निकालता है।
    • पैंगोलिन स्वयं को पोषित करने हेतु अपनी जीभ पर निर्भर करता है क्योंकि उसके पास किन्हीं प्रकार के दांतों  का अभाव होता है। पैंगोलिन में पाचन क्रिया में इसका मजबूत पेट सहायता करता है।
    • पैंगोलिन रात के समय सक्रिय होता है एवं दिन के समय यह गहरी गड्ढों में आराम करता है
  • उत्तरजीविता का संकट: पैंगोलिन को पर्यावास की हानि एवं उसकी त्वचा, शल्कों एवं मांस के लिए व्यापक पैमाने पर अवैध शिकार के कारण अस्तित्व के संकट का सामना करना पड़ता है।
    • पैंगोलिन अत्यधिक अवैध व्यापार किए जाने वाले स्तनधारी हैं, क्योंकि उनकी औषधीय प्रयोजनों के लिए भारी मांग है, पैंगोलिन को सड़कों एवं रेल के माध्यम से तस्करी कर चीन भेजा जाता है।

 

भारतीय पैंगोलिन: प्रमुख बिंदु

  • भारतीय पैंगोलिन के बारे में: भारतीय पैंगोलिन, जिसे मोटी पूंछ वाला पैंगोलिन भी कहा जाता है, विश्व भर में पाई जाने वाली आठ पैंगोलिन प्रजातियों में से एक है।
    • भारतीय पैंगोलिन वैज्ञानिक नाम: मानिस क्रैसिकौडाटा
    • विशेषताएं: भारतीय पैंगोलिन में अतिव्यापी शल्क होते हैं जो उसके शरीर के लिए एक कवच के रूप में कार्य करते हैं।
  • पर्यावास: भारतीय पैंगोलिन भारतीय उपमहाद्वीप का स्थानिक (मूल निवासी) पैंगोलिन है। भारतीय पैंगोलिन मुख्य रूप से वर्षावनों एवं भारत की पहाड़ियों एवं श्रीलंका के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं।
    • भारतीय पैंगोलिन बांग्लादेश, पाकिस्तान एवं नेपाल में भी पाया जाता है।
    • भारतीय पैंगोलिन घास के मैदानों एवं गौण (द्वितीयक) वनों में निवास करता है।
    • भारतीय पैंगोलिन शुष्क एवं रेगिस्तानी क्षेत्रों में भी जीवित रह सकता है।

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भारतीय पैंगोलिन- संरक्षण के प्रयास

  • जनवरी 2017 से भारतीय पैंगोलिन को सीआईटीईएस के परिशिष्ट I के तहत सूचीबद्ध किया गया है।
  • आईयूसीएन रेड लिस्ट: भारतीय पैंगोलिन को आईयूसीएन रेड लिस्ट में ‘लुप्तप्राय’ (एंडेंजर्ड) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: भारतीय पैंगोलिन चीनी पैंगोलिन के साथ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I, भाग I के तहत संरक्षित हैं।

 

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