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जलवायु परिवर्तन के लिए पेरिस समझौता

पेरिस समझौता: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन।

 

पेरिस समझौता क्या है?

  • पेरिस समझौता जलवायु परिवर्तन पर विधिक रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसे 2015 में पेरिस में कॉप 21 में 196 पक्षकारों द्वारा अपनाया गया एवं 2016 में प्रवर्तित हुआ
  • समझौते को प्रवर्तित करने के लिए, वैश्विक उत्सर्जन के कम से कम 55% का प्रतिनिधित्व करने वाले कम से कम 55 देशों को अनुसमर्थन के अपने प्रपत्रों को जमा करना था।
  • क्योटो प्रोटोकॉल के बाद यह दूसरा सर्वाधिक महत्वपूर्ण कॉप है।

 

पेरिस समझौता: लक्ष्य

  • इसका लक्ष्य पूर्व-औद्योगिक स्तरों की तुलना में वैश्विक तापन को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे, अधिमानतः 5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना है।

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पेरिस समझौता किस प्रकार कार्य करता है?

  • पेरिस समझौता देशों द्वारा निष्पादित की जाने वाली उत्तरोत्तर महत्वाकांक्षी जलवायु कार्रवाई के 5 वर्षीय चक्र पर कार्य करता है। 2020 तक, देश राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के रूप में ज्ञात जलवायु कार्रवाई के लिए अपनी योजनाएँ प्रस्तुत करते हैं।

 

पेरिस समझौता: एनडीसी

  • अपने एनडीसी में, देश पेरिस समझौते यूएनएफसीसीसी के लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए अपने हरितगृह गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए की जाने वाली कार्रवाइयों को संप्रेषित करते हैं
  • देश बढ़ते तापमान के प्रभावों के अनुकूल होने के लिए लोचशीलता हेतु एनडीसी की कार्रवाइयों में भी संवाद करते हैं।

 

पेरिस समझौता: दीर्घकालिक रणनीतियाँ

  • दीर्घकालिक लक्ष्य की दिशा में प्रयासों को बेहतर ढंग से तैयार करने के लिए, पेरिस समझौता देशों को 2020 तक दीर्घकालिक अल्प हरित गृह गैस उत्सर्जन विकास रणनीति (एलटी-एलईडीएस) तैयार करने एवं प्रस्तुत करने हेतु आमंत्रित करता है।
  • एलटी-एलईडीएस, एनडीसी को दीर्घकालिक सीमा प्रदान करते हैं। एनडीसी के विपरीत, वे आज्ञापक (अनिवार्य) नहीं हैं। फिर भी, वे एनडीसी को देशों की दीर्घकालिक योजना एवं विकास प्राथमिकताओं के संदर्भ में स्थापित करते हैं, भविष्य के विकास के लिए एक दृष्टि एवं दिशा प्रदान करते हैं।

 

पेरिस समझौता: 20/20/20 लक्ष्य

  • कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 20% की कमी,
  • नवीकरणीय ऊर्जा बाजार हिस्सेदारी को 20% तक बढ़ाने पर कार्य करें
  • ऊर्जा दक्षता को 20% तक बढ़ाने का लक्ष्य

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पेरिस समझौता: भारत

  • भारत ने 2005 के स्तर के 33-35% प्रति इकाई सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को कम करने का संकल्प लिया है।
  • भारत का लक्ष्य गैर-जीवाश्म ईंधन से स्थापित क्षमता के 40% तक पहुंचना है।
  • भारत ने 2022 तक 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • भारत 5 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने के लिए वन क्षेत्र को बढ़ाने की योजना बना रहा है।
  • भारत उद्ग्रहण एवं सहायिकी में कमी के जरिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करेगा
  • भारत ने साम्यता एवं विभेदित उत्तरदायित्वों के सिद्धांतों पर बल दिया।
  • भारत को अपेक्षा है कि विकसित देश 2020 तक विकासशील देशों में शमन एवं अनुकूलन के लिए प्रतिवर्ष 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाएंगे

 

पेरिस समझौता: महत्वपूर्ण निष्कर्ष

  • वैश्विक चरमोत्कर्ष एवं जलवायु तटस्थता‘: इस तापमान लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, पक्षकारों का लक्ष्य हरितगृह गैस उत्सर्जन (जीएचजी) के वैश्विक शिखर पर शीघ्र अति शीघ्र पहुंचना है, शिखर को अभिनिर्धारित करने में विकासशील देश पक्षकारों को अधिक समय लगेगा, ताकि सदी के उत्तरार्ध में मानव जनित स्रोतों द्वारा उत्सर्जन एवं जीएचजी के सिंक द्वारा निष्कासन के मध्य संतुलन प्राप्त किया जा सके।
  • शमन: पेरिस समझौता राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) को तैयार करने, संप्रेषित करने एवं बनाए रखने तथा उन्हें प्राप्त करने के लिए घरेलू उपायों को आगे बढ़ाने हेतु सभी पक्षों द्वारा बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं को स्थापित करता है। ये, यह भी निर्धारित करता है कि सभी पक्षकार प्रत्येक 5 वर्ष में अपने एनडीसी को संप्रेषित करेंगे एवं स्पष्टता तथा पारदर्शिता के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करेंगे।
    • विकसित देशों को पूर्ण अर्थव्यवस्था-व्यापी कमी लक्ष्यों को लेकर नेतृत्व करना जारी रखना चाहिए, जबकि विकासशील देशों को अपने शमन प्रयासों को बढ़ाना जारी रखना चाहिए।
  • निमज्जन एवं आगार: पेरिस समझौता भी पक्षकारों को वनों सहित जीएचजी के निमज्जन (सिंक) एवं आगारों के संरक्षण तथा संवर्धन हेतु प्रोत्साहित करता है।
  • अनुकूलन: पेरिस समझौता अनुकूलन पर – समझौते के तापमान लक्ष्य के संदर्भ में अनुकूलन क्षमता को बढ़ाने, लोचशीलता को सुदृढ़ करने एवं जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता को कम करने हेतु एक वैश्विक लक्ष्य स्थापित करता है।
  • हानि एवं क्षति: पेरिस समझौता जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से जुड़े हानि तथा क्षति को टालने, कम करने एवं हल करने के महत्व को मान्यता प्रदान करता है, जिसमें चरम मौसम की घटनाएं एवं मंद आरंभिक घटनाएं शामिल हैं तथा हानि एवं क्षति के जोखिम को कम करने में सतत विकास की भूमिका को मान्यता देता है।
  • वित्त: विकसित देशों का अभिप्राय 2020 तक प्रति वर्ष 100 बिलियन अमरीकी डालर अभिनियोजित करने के अपने मौजूदा सामूहिक लक्ष्य को जारी रखने एवं इसे 2025 तक विस्तारित करने का है। इस अवधि के बाद एक नया और उच्च लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा।
  • प्रौद्योगिकी: पेरिस समझौता सुचारु रुप से कार्य कर रहे प्रौद्योगिकी तंत्र को व्यापक मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए एक प्रौद्योगिकी ढांचा स्थापित करता है। तंत्र अपनी नीति एवं कार्यान्वयन शाखाओं के माध्यम से प्रौद्योगिकी विकास एवं हस्तांतरण को गति प्रदान कर रहा है।
  • वैश्विक स्टॉकटेक: एक “वैश्विक स्टॉकटेक”, जो 2023 में आयोजित होगा और उसके बाद प्रत्येक 5 वर्ष में, व्यापक एवं सुविधाजनक रीति से समझौते के उद्देश्य को प्राप्त करने की दिशा में सामूहिक प्रगति का आकलन करेगा। इसका परिणाम पक्षकारों को अपने कार्यों को अद्यतन करने एवं संवर्धन करने तथा जलवायु कार्रवाई पर समर्थन एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए सूचित करेगा।

 

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