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बिम्सटेक कैसे एक नई दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय व्यवस्था का निर्माण कर सकता है?: हिंदू संपादकीय विश्लेषण

इस लेख में ”बिम्सटेक एक नई दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय व्यवस्था का निर्माण किस प्रकार कर सकता है?” हम  यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा एवं मुख्य परीक्षा दोनों के लिए आज के हिंदू संपादकीय का विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं ।

बिम्सटेक चर्चा में क्यों है?

8 दिसंबर को सार्क चार्टर दिवस के रूप में मनाया जाता है। किंतु, सार्क अपने अधिकांश उद्देश्यों को प्राप्त करने में बुरी तरह विफल रहा है। अतः, बिम्सटेक एक नई दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय व्यवस्था के निर्माण में अधिक से अधिक महत्व प्राप्त कर रहा है।

 

किस आधार पर हम कह सकते हैं कि सार्क विफल हो गया है?

  • दक्षिण एशिया विश्व में एक अत्यंत निर्धन तथा न्यूनतम एकीकृत क्षेत्र बना हुआ है।
  • दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन ( द एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस/आसियान) एवं उप-सहारा अफ्रीका जैसे अन्य क्षेत्रों की तुलना में दक्षिण एशिया में अंतर्क्षेत्रीय व्यापार एवं निवेश बहुत कम है।
  • पाकिस्तान ने क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से मोटर वाहन समझौते जैसी कई महत्वपूर्ण पहलों को बार-बार अवरुद्ध करके सार्क के भीतर एक अवरोधकारी रवैया अपनाया है।
  • भारत एवं पाकिस्तान के मध्य गहन होते शत्रुता ने मामले को और भी बदतर बना दिया है।
  • 2014 के पश्चात से, किसी सार्क शिखर सम्मेलन का आयोजन नहीं हुआ है, जिससे संगठन दिशाहीन एवं व्यावहारिक रूप से मृत हो गया है।

 

क्षेत्रवाद क्यों महत्वपूर्ण है?

  • जबकि द्विपक्षीयता निस्संदेह महत्वपूर्ण है, यह क्षेत्रीय या बहुपक्षीय प्रयासों को स्थानापन्न नहीं बल्कि पूरक कर सकती है।
  • क्षेत्रवाद ने पूर्वी एशिया एवं अफ्रीका जैसे अन्य भागों में अत्यधिक सफलता लाई है। अतः, क्षेत्रवाद दक्षिण एशियाई क्षेत्र में भी समृद्धि ला सकता है, विशेष रूप से क्योंकि बहुपक्षवाद कमजोर हो रहा है।

 

एक नई क्षेत्रीय आर्थिक व्यवस्था की अवधारणा क्या है?

क्षेत्रीय एकीकरण में आसियान की असाधारण सफलता को देखते हुए, अंतरराष्ट्रीय अधिवक्ताओं ने जूलियन चैस एवं पाशा एल. सिह ने एक नवीन क्षेत्रीय आर्थिक व्यवस्था की अवधारणा विकसित की है – एक प्रक्रिया जिसके माध्यम से विकासशील देश वृद्धिवाद एवं लोचशीलता के आधार पर व्यापार-विकास प्रतिमान की खोज करते हैं; यह वाशिंगटन सर्वसम्मति द्वारा निर्धारित नवउदारवादी प्रतिमान से अलग है।

 

बिम्सटेक किस प्रकार एक नवीन दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय व्यवस्था का निर्माण कर सकता है?

वर्तमान परिदृश्य में, सार्क को पुनर्जीवित करने हेतु यह अत्यधिक आदर्शवादी है। अतः, आगामी सर्वोत्तम परिदृश्य बहु-क्षेत्रीय, तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल ( बे ऑफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्टी  सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनामिक कोऑपरेशन/बिम्सटेक) जैसे अन्य क्षेत्रीय उपकरणों पर विचार करना है।

 

बिम्सटेक के बारे में जानिए

  • बिम्सटेक का पूर्ण रूप: बहु-क्षेत्रीय, तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल (बे ऑफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनामिक कोऑपरेशन) है।
  • बिम्सटेक 1997 में स्थापित एक अंतर सरकारी संगठन है।
  • बिम्सटेक में पांच दक्षिण एशियाई देश (बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, भारत एवं श्रीलंका) तथा दो आसियान देश (म्यांमार एवं थाईलैंड) सम्मिलित हैं।
  • महत्वपूर्ण बात यह है कि पाकिस्तान बिम्सटेक का सदस्य नहीं है।

 

क्या भारत सार्क से अलग होकर बिम्सटेक में जाने के लिए तैयार है?

हाल के वर्षों में, ऐसा प्रतीत होता है कि भारत ने अपनी कूटनीतिक ऊर्जा को सार्क से दूर बिम्सटेक में स्थानांतरित कर दिया है। इसका परिणाम यह हुआ कि बिम्सटेक 25 वर्षों के बाद अंततः इस वर्ष  के प्रारंभ में अपना चार्टर अंगीकृत कर रही है।

 

बिम्सटेक चार्टर सार्क चार्टर से किस प्रकार बेहतर है?

  • बिम्सटेक चार्टर सार्क चार्टर से अत्यधिक बेहतर है।
  • उदाहरण के लिए, सार्क चार्टर के विपरीत, बिम्सटेक चार्टर का अनुच्छेद 6 समूह में ‘नए सदस्यों के प्रवेश’ के बारे में बात करता है। यह मालदीव जैसे देशों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करता है।
  • सुधारों के बावजूद, आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए बिम्सटेक चार्टर में आसियान चार्टर में मौजूद प्रकार की लचीली भागीदारी योजना शामिल नहीं है।
  • यह लोचशील योजना, जिसे ‘आसियान माइनस एक्स’ सूत्र के रूप में भी जाना जाता है, दो या दो से अधिक आसियान सदस्यों को आर्थिक प्रतिबद्धताओं के लिए वार्ता प्रारंभ करने की अनुमति प्रदान करते है।
  • इस प्रकार, किसी भी देश को इच्छुक देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को विफल करने के लिए वीटो शक्ति प्राप्त नहीं है।
  • सार्क के अनुभव को देखते हुए, जहां पाकिस्तान नियमित रूप से अनेक क्षेत्रीय एकीकरण पहलों को वीटो करता है, यह आश्चर्यजनक है कि बिम्सटेक में ऐसी लोचशील भागीदारी योजना सम्मिलित नहीं है।
  • एक लोचशील ‘बिम्सटेक माइनस एक्स’ सूत्र ने भारत एवं बांग्लादेश अथवा भारत एवं थाईलैंड को व्यापक बिम्सटेक छत्र के तहत जारी अपने द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट/एफटीए) वार्ताओं का संचालन करने की अनुमति दी होगी।
  • अंततः यह  अन्य सदस्यों के लिए इन बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं के क्रमिक एवं वृद्धिशील विस्तार को सक्षम करके बिम्सटेक को मजबूत करेगा।

 

आगे की राह क्या होनी चाहिए?

  • बिम्सटेक को एक अन्य सार्क के रूप में समाप्त नहीं होना चाहिए। इसके लिए इसके सदस्य देशों को अपने महत्व में वृद्धि करनी चाहिए।
  • गहन आर्थिक एकीकरण की पेशकश करने वाला एक उच्च गुणवत्ता युक्त मुक्त व्यापार समझौता एक आदर्श कदम होगा- जिसकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछली बिम्सटेक मंत्रिस्तरीय बैठक में भी वकालत की थी।
  • इसी तरह, भारत को एसएयू जैसे सफल सार्क संस्थानों को बिम्सटेक में स्थानांतरित करने के कानूनी तरीकों का पता लगाना चाहिए।
  • ये कदम बिम्सटेक को मजबूत जड़ें  प्रदान करेंगे तथा क्षेत्र में समृद्धि एवं शांति का प्रारंभ करते हुए अभिवृद्धिवाद एवं लोचशीलता के आधार पर एक नवीन दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय व्यवस्था स्थापित करने में सक्षम होंगे।

 

निष्कर्ष

बिम्सटेक भारत की ‘पड़ोसी पहले’ (नेवरहुड फर्स्ट) नीति को बढ़ावा देने के लिए दक्षिण एशिया में एक नया आख्यान प्रदान कर सकता है तथा इसके साथ ही भारत अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्रवाद पर द्विपक्षीयता के साधन का सफलतापूर्वक उपयोग कर सकता है।

 

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र. सार्क चार्टर दिवस किस तारीख को पड़ता है?

उत्तर. 8 दिसंबर को सार्क चार्टर दिवस के रूप में मनाया जाता है।

प्र. बिम्सटेक का पूर्ण रूप क्या है?

उत्तर. बिम्सटेक का पूर्ण रूप है: बहु-क्षेत्रीय, तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल (बे ऑफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्टी  सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनामिक कोऑपरेशन)।

प्र. नई क्षेत्रीय आर्थिक व्यवस्था की अवधारणा क्या है?

उत्तर. अंतरराष्ट्रीय अधिवक्ताओं ने जूलियन चैस एवं पाशा एल. सिह ने एक नवीन क्षेत्रीय आर्थिक व्यवस्था की अवधारणा विकसित की है – एक प्रक्रिया जिसके माध्यम से विकासशील देश वृद्धिवाद एवं लोचशीलता के आधार पर व्यापार-विकास प्रतिमान की खोज करते हैं।

 

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