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भारत में चावल का प्रबलीकरण: कार्यकर्ताओं ने उठाई स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं

राइस फोर्टिफिकेशन यूपीएससी: प्रासंगिकता

  • जीएस 2: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियां एवं अंतः क्षेप  तथा उनकी अभिकल्पना एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

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भारत में चावल का प्रबलीकरण: प्रसंग 

  • हाल ही में, झारखंड में कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि रक्ताल्पता (एनीमिया) को रोकने के लिए रामबाण” (सिल्वर बुलेट)  के रूप में सरकारी योजनाओं के माध्यम से लौह प्रबलीकृत (आयरन फोर्टिफाइड) चावल का वितरण झारखंड जैसे राज्यों में बंद होना चाहिए।

 

चावल के प्रबलीकरण के मुद्दे

  • झारखंड में एक बड़ी जनजातीय (आदिवासी) आबादी है जो दात्र कोशिका रक्ताल्पता (सिकल सेल एनीमिया), थैलेसीमिया एवं तपेदिक से पीड़ित है।
  • आबादी के इस हिस्से में, लौह की अधिकता से स्वास्थ्य संबंधी प्रतिकूल समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
  • थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया तथा मलेरिया ऐसी स्थितियां हैं जहां शरीर में पूर्व से ही अतिरिक्त लौह उपस्थित होता है, जबकि टीबी के रोगी लौह को अवशोषित करने में असमर्थ होते हैं। इन रोगों के रोगियों में आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन प्रतिरक्षा को कम कर सकता है एवं अंगों की कार्यक्षमता को कम कर सकता है
  • विशेषज्ञों ने यह भी पाया है कि न तो क्षेत्र के पदाधिकारियों और न ही लाभार्थियों को संभावित हानि के बारे में शिक्षित किया गया था
  • इसके अतिरिक्त, फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों पर खाद्य नियामक के नियमों के बावजूद किसी प्रकार का चेतावनी लेबल मौजूद नहीं था।
  • भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया/FSSAI) के खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य पदार्थों का प्रबलीकरण) विनियम 2018 के लिए आवश्यक है कि प्रबलीकृत खाद्य पैकेटों पर अनिवार्य रूप से प्रबलीकरण का लोगो (+F) प्रदर्शित किया जाना चाहिए तथा लौह से प्रबलीकृत भोजन के प्रत्येक पैकेज में एक चेतावनी कथन होना चाहिए कि थैलेसीमिया से पीड़ित  व्यक्ति चिकित्सकीय देखरेख में इसका सेवन कर सकते हैं तथा सिकल सेल एनीमिया वाले व्यक्तियों को आयरन फोर्टिफाइड खाद्य उत्पादों का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है
  • अलायंस फॉर सस्टेनेबल एंड होलिस्टिक एग्रीकल्चर (आशा-किसान स्वराज) एवं भोजन का अधिकार अभियान, झारखंड द्वारा संयुक्त रूप से तैयार एक रिपोर्ट के अनुसार, जहां फोर्टिफाइड चावल वितरित किया जा रहा है, लाभार्थियों से सहमति प्राप्त नहीं की जा रही है

 

प्रबलीकरण क्या है?

  • भारतीय खाद्य सुरक्षा तथातथा मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अनुसार, यह सुविचारित रूप से भोजन में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की सामग्री को बढ़ा रहा है ताकि भोजन की पोषण गुणवत्ता में सुधार हो  एवं इस प्रकार सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार हो
  • आहार में विटामिन एवं खनिज सामग्री को बढ़ाने के लिए चावल का फोर्टिफिकेशन एक लागत प्रभावी तथा पूरक रणनीति है

कैबिनेट ने प्रबलीकृत चावल के वितरण को स्वीकृति प्रदान की

फूड फोर्टिफिकेशन: क्यों आवश्यक है?

  • देश में महिलाओं एवं बच्चों में कुपोषण का उच्च स्तर।
  • खाद्य मंत्रालय के अनुसार देश में प्रत्येक दूसरी महिला रक्ताल्पता पीड़ित (एनीमिक) है एवं प्रत्येक तीसरा बच्चा स्तंभित (अविकसित) है।
  • भारत 107 देशों में 94वें स्थान पर है तथा वैश्विक भूख सूचकांक (ग्लोबल हंगर इंडेक्स/जीएचआई) पर गंभीर भूखश्रेणी में है।

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फूड फोर्टिफिकेशन में कौन-कौन से पोषक तत्व जोड़े जाते हैं?

  • FSSAI के मानदंडों के अनुसार, 1 किलोग्राम प्रबलीकृत चावल में निम्नलिखित सम्मिलित होते हैं-
    • लौह (28 मिलीग्राम -42.5 मिलीग्राम),
    • फोलिक एसिड (75-125 माइक्रोग्राम)
    • विटामिन बी-12 (0.75-1.25 माइक्रोग्राम)।
  • इसके अतिरिक्त, चावल को सूक्ष्म पोषक तत्वों के साथ, अकेले या संयोजन में, जस्ता एवं विटामिन बी के साथ भी प्रबलीकृत किया जा सकता है।

 

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