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विश्व मौसम विज्ञान संगठन: ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन

ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण।

 

ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन: प्रसंग

  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) द्वारा हाल ही में जारी ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन के अनुसार, वातावरण में ऊष्मा को अवशोषित करने वाली ग्रीन हाउस गैसों की प्रचुरता विगत वर्ष एक बार पुनः एक नए रिकॉर्ड पर पहुंच गई है।

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ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन: प्रमुख निष्कर्ष

  • ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि की वार्षिक दर 2011-2020 के औसत से ऊपर थी
  • सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रीनहाउस गैस कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की सांद्रता पूर्व-औद्योगिक स्तर के 149% तक पहुंच गई।
  • 1750 में मीथेन (CH4) 262% एवं नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) 123% स्तर है जब मानव गतिविधियों ने पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन को बाधित करना प्रारंभ कर दिया था।
  • कोविड-19 से आर्थिक मंदी का ग्रीन हाउस गैसों के वायुमंडलीय स्तर एवं उनकी वृद्धि दर पर कोई स्पष्ट प्रभाव नहीं पड़ा, हालांकि नए उत्सर्जन में अस्थायी गिरावट आई थी।

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कार्बन डाइऑक्साइड

  • मानव गतिविधियों द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का लगभग आधा हिस्सा आज वायुमंडल में अभी शेष है।
  • शेष आधा भाग महासागरों और भूमि पारिस्थितिकी प्रणालियों द्वारा ग्रहण कर लिया गया है।
  • बुलेटिन ने चिंता व्यक्त की कि भविष्य में “सिंक” के रूप में कार्य करने के लिए भू पारिस्थितिकी तंत्र एवं महासागरों की क्षमता कम प्रभावी हो सकती है, इस प्रकार कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने एवं वृहद तापमान वृद्धि के विरुद्ध बफर के रूप में कार्य करने की उनकी क्षमता कम हो सकती है।
  • वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा 2015 में 400 पार्ट्स प्रति मिलियन की सीमा को पार कर गई एवं मात्र पांच वर्ष पश्चात, यह 413 पीपीएम से अधिक हो गई
  • कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में सर्वाधिक महत्वपूर्ण एकल हरित गृह गैस है, जो, मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन के दहन एवं सीमेंट उत्पादन के कारण, जलवायु पर लगभग 66% तापन प्रभाव के लिए उत्तरदायी है

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कार्बन सिंक

  • कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में सदियों तक एवं महासागरों में और भी अधिक समय तक बनी रहती है। पिछली बार पृथ्वी ने 3-5 मिलियन वर्ष पूर्व कार्बन डाइऑक्साइड की एक तुलनीय सांद्रता का अनुभव किया था, जब तापमान 2-3 ° C गर्म था एवं समुद्र का स्तर अब की तुलना में 10-20 मीटर अधिक था।
  • जारी जलवायु परिवर्तन एवं संबंधित प्रतिपुष्टियों (फीडबैक), जैसे लगातार अधिक सूखा एवं इससे संबंधित बढ़ती घटनाएं एवं वनों की आग की तीव्रता, भूमि पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड के अंतर्ग्रहण को कम कर सकती है
  • इस तरह के परिवर्तन पूर्व से ही होते रहे हैं। उदाहरण: अमेज़ोनिया के हिस्से का कार्बन सिंक से कार्बन स्रोत में संक्रमण
  • समुद्र की सतह के उच्च तापमान, कार्बन डाइऑक्साइड के अंतर्ग्रहण के कारण पीएच में कमी एवं समुद्री बर्फ के पिघलने के कारण याम्योत्तरीय (मेरिडियनल) महासागरीय परिसंचरण के मंद होने के कारण भी महासागरों द्वारा अंतर्ग्रहण कम हो सकता है

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मीथेन

  • मीथेन एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है जो लगभग एक दशक तक वातावरण में बनी रहती है।
  • लंबे समय तक प्रकृति में रहने वाली ग्रीन हाउस गैसों के तापन प्रभाव में मीथेन का योगदान लगभग 16% है।
  • लगभग 40% मीथेन प्राकृतिक स्रोतों (उदाहरण के लिए, आर्द्रभूमियों एवं दीमकों) द्वारा वातावरण में उत्सर्जित होता है एवं लगभग 60% मानव जनित स्रोतों से आता है (उदाहरण के लिए, जुगाली करने वाले, चावल की खेती, जीवाश्म ईंधन का दोहन,भराव क्षेत्र या लैंडफिल एवं बायोमास जलाना)।

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नाइट्रस ऑक्साइड

  • नाइट्रस ऑक्साइड एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस एवं ओजोन क्षयकारी रसायन दोनों है। यह लंबे समय तक बने रहने वाली ग्रीन हाउस गैसों द्वारा विकिरण प्रणोदन का लगभग 7% भाग हेतु उत्तरदायी है।
  • नाइट्रस ऑक्साइड प्राकृतिक स्रोतों (लगभग 60%) एवं मानव जनित स्रोतों (लगभग 40%) दोनों से वातावरण में उत्सर्जित होता है, जिसमें महासागरों, मृदा, बायोमास को जलाने, उर्वरकों के उपयोग एवं विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं को शामिल किया जाता है।
  • वैश्विक मानव-प्रेरित नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जन, जो कि शस्य भूमियों में नाइट्रोजन के योग का प्रभुत्व है, विगत चार दशकों में 30% की वृद्धि हुई है
  • कृषि, नाइट्रोजन उर्वरकों एवं खाद के उपयोग के कारण, सभी मानव जनित नाइट्रस ऑक्साइड के उत्सर्जन में 70% का योगदान करती है
    • यह वृद्धि मुख्य रूप से नाइट्रस ऑक्साइड के वायुमंडलीय भार में वृद्धि हेतु उत्तरदायी थी।

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