माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण: समस्या की गंभीरता, उसके प्रभाव और सुझावात्मक उपाय_00.1
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माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण: समस्या की गंभीरता, उसके प्रभाव और सुझावात्मक उपाय

माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण: समस्या की गंभीरता, उसके प्रभाव और सुझावात्मक उपाय

माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण: समस्या की गंभीरता, उसके प्रभाव और सुझावात्मक उपाय_50.1

 

 http://bit.ly/2MNvT1m

प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 3: पर्यावरण: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और अवक्रमण।

 

प्रसंग

  • एक एनजीओ द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में गंगा नदी में आधुनिक समय के संकट, माइक्रोप्लास्टिक्स का प्रमाण मिला है, जिसमें वाराणसी और कानपुर तत्पश्चात हरिद्वार में सर्वाधिक सांद्रता है।
    • गंगा नदी के किनारे माइक्रोप्लास्टिक्स का मात्रात्मक विश्लेषण अध्ययन दिल्ली स्थित पर्यावरण एनजीओ टॉक्सिक्स लिंक द्वारा आयोजित एवं प्रकाशित किया गया था।

 

https://www.adda247.com/upsc-exam/competition-commission-of-india-indias-anti-trust-regulator-hindi/

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • वाराणसी और कानपुर में सूक्ष्म मणिकाएं (माइक्रोबीड्स) देखी गई, जबकि हरिद्वार में कोई मणिका  प्राप्त नहीं हुई।
  • देखे गए रेजिनों का आकार और प्रकृति फाइबर से लेकर टुकड़े, झिल्ली और मोतियों तक थी।
  • सभी स्थानों में पाए गए प्रमुख आकार टुकड़े तत्पश्चात झिल्ली एवं रेशों का स्थान था।
  • उनके स्रोत टायर, वस्त्र, खाद्य पैकेजिंग, बैग, सूक्ष्म मनकों वाले सौंदर्य प्रसाधन, माला का आवरण एवं अन्य नगरपालिका अपशिष्ट हो सकते हैं।

 

माइक्रोप्लास्टिक्स के बारे में:

  • माइक्रोप्लास्टिक प्लास्टिक के छोटे टुकड़े होते हैं, जिनकी लंबाई 5 मिमी (2 इंच) से कम होती है, जो प्लास्टिक प्रदूषण के परिणामस्वरूप पर्यावरण में अस्तित्व में आते हैं।
  • माइक्रोप्लास्टिक अनेक तरह के उत्पादों में उपस्थित होता है, जिसमें सौंदर्य प्रसाधन से लेकर कृत्रिम वस्त्रों से लेकर प्लास्टिक बैग और बोतलों तक सम्मिलित हैं। इनमें से कई उत्पाद, अपशिष्ट में सुगमता से पर्यावरण में प्रवेश कर जाते हैं।
  • उन्हें उनकी उत्पत्ति के आधार पर दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है-
  1. प्राथमिक माइक्रोप्लास्टिक्स: व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों में पाई जाने वाली सूक्ष्म मणिकाएं, औद्योगिक निर्माण में उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक गुटिकाएं (या नर्डल्स) और कृत्रिम वस्त्रों (जैसे, नायलॉन) में उपयोग किए जाने वाले प्लास्टिक रेशे सम्मिलित हैं
  2. द्वितीयक माइक्रोप्लास्टिक्स: वृहत आकार के प्लास्टिक के  विखंडन से उत्पन्न होते हैं। प्लास्टिक की बोतलें, बैग, मछली पकड़ने के जाल और खाद्य पैकेजिंग वृहत आकार के टुकड़ों के कुछ उदाहरण हैं जो माइक्रोप्लास्टिक में विखंडित हो जाते हैं, अंततः मृदा, जल एवं हमारी श्वास वायु में अपना मार्ग खोज लेते हैं।

https://www.adda247.com/upsc-exam/important-prelims-articles-24rth-july-2021-hindi/

विश्व में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण

  • आर्कटिक में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण: एक अध्ययन द्वारा खोजा गया था। पवन ने इसके लिए एक परिवहन कारक के रूप में कार्य किया था।
    • यह प्रथम अध्ययन होने का दावा करता है जिसमें माइक्रोप्लास्टिक्स द्वारा बर्फ के संदूषण पर डेटा शामिल है।
  • एक अनुमान के अनुसार, एक औसत मानव प्रत्येक वर्ष भोजन में माइक्रोप्लास्टिक के कम से कम 50,000 कणों का उपभोग करता है।
  • समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण: इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) के अनुसार, प्रत्येक वर्ष न्यूनतम 8 मिलियन टन प्लास्टिक महासागरों में पहुंच जाता है
  • अटलांटिक के शीर्ष 200 मीटर की माप में 6 – 21.1 मिलियन टन सूक्ष्म कण पाए गए।
  • भारत में: औसत भारतीय प्रत्येक वर्ष विभिन्न रूपों में लगभग 11 किलो प्लास्टिक उत्पादों की खपत करता है।  यद्यपि यह एक अमेरिकी या चीनी की तुलना में अत्यंत कम है, फिर भी यह एक समस्या है।

माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण के प्रभाव

  • मानव स्वास्थ्य पर:
    • वायुजनित धूल, पीने के पानी (उपचारित नल के जल और बोतलबंद जल सहित) से माइक्रोप्लास्टिक के मानव संपर्क में आने की संभावना है।
    • माइक्रोप्लास्टिक्स हमारे पेट तक पहुंच सकते हैं जहां वे या तो उत्सर्जित हो सकते हैं, पेट और आंतों के अस्तर में संपाशित हो सकते हैं या रक्त जैसे शरीर के तरल पदार्थों में स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ सकते हैं, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों और ऊतकों तक पहुंच सकते हैं।
    • तंत्रिका तंत्र, हार्मोन, प्रतिरक्षा प्रणाली को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है और इसमें कैंसर उत्पन्न करने वाले गुण होते हैं।
  • समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर:
    • समुद्री जीवों पर: सेवन किए जाने पर, माइक्रोप्लास्टिक उनके पाचन तंत्र में संपाशित हो जाता है और उनके आहार व्यवहार को भी परिवर्तित कर देता है।
    • पेट में विषाक्त प्लास्टिक के संचित होने से भुखमरी तथा मृत्यु हो जाती है, विषाक्त प्लास्टिक के संचित होने से वृद्धि और प्रजनन निर्गम कम हो जाता है।
    • समुद्री प्रदूषण का आवर्धन: भारी धातुओं और कार्बनिक प्रदूषकों के लिए जल-विकर्षक गुणों के कारण एक बाध्यकारी और परिवहन कारक के रूप में कार्य करके।

 

https://www.adda247.com/upsc-exam/the-editorial-analysis-india-is-welcome-to-join-the-china-south-asia-grouping-hindi/

आगे की राह

  • कमी करना, पुन: उपयोग करना और पुनर्चक्रण करना: विश्व में माइक्रोप्लास्टिक के संकट को समाप्त करने का यही मंत्र होना चाहिए।
    • घरेलू अपशिष्टों के निष्पादन हेतु प्रायः खुले में भराव और खुली हवा में जलाने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और इसे उपयोग किए गए प्लास्टिक के 100% संग्रहण और पुनर्चक्रण के साथ प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।
  • माइक्रोप्लास्टिक के विकल्प के रूप में जैव प्लास्टिक को प्रोत्साहन प्रदान करना: यह उद्योग में निवेश और सरकारी सहायता से किया जा सकता है जिससे उत्पादन की लागत कम होगी और विभिन्न उद्योगों के लिए इसके आकर्षण में वृद्धि होगी।
  • जागरूकता सृजित करना: स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) की तर्ज पर जनता के मध्य माइक्रोप्लास्टिक व्युत्पन्न उत्पादों, हानिकारक प्रभावों और इसके उपयोग को कम करने के तरीकों के बारे में प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
  • सभी हितधारकों (समुदाय, उद्योग, सरकार एवं नागरिक समाज संगठनों) के मध्य सहकारी और सहयोगात्मक साझेदारी का उद्देश्य प्रभावी प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और पश्चातवर्ती माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण में कमी सुनिश्चित करना है।

माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण जैसे पार्थिव संकट से निपटने के लिए पेरिस समझौते की तर्ज पर वैश्विक सहयोग समय की मांग है। प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने और हमारे पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करने के उद्देश्य से सामूहिक सार्वजनिक प्रयास एक सुरक्षित एवं सतत पृथ्वी ग्रह सुनिश्चित करने हेतु आगे का मार्ग है।

 

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