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आईपीसीसी के प्रतिवेदन की छठी आकलन रिपोर्ट

प्रसंग

  • हाल ही में आईपीसीसी की छठी आकलन रिपोर्ट, जिसका शीर्षक “क्लाइमेट चेंज 2021: द फिजिकल साइंस बेसिस” है, को इसके लेखकों द्वारा जारी किया गया था।

आईपीसीसी के प्रतिवेदन की छठी आकलन रिपोर्ट_30.1

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रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  • हिंद महासागर: अन्य महासागरों की तुलना में उष्णता  की उच्च दर।
  • भारत पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव: ऊष्म तरंगों एवं बाढ़ की आवृत्ति में वृद्धि होगी।
    • भारत में वार्षिक औसत वर्षा में वृद्धि, आने वाले दशकों में दक्षिणी भारत में और उच्च गहन वर्षा की संभावना है।
    • प्रचंड मानसून: भारत एवं दक्षिण एशिया में  इसमें वृद्धि की संभावना है, जबकि निम्न गहन वर्षा वाले दिनों की आवृत्ति में वृद्धि की संभावना है।
    • 21वीं सदी के अंत तक भारत में मानसून का दीर्घीकरण, दक्षिण एशियाई मानसूनी वर्षा में वृद्धि का अनुमान है।
  • महासागरीय ऊष्मन: समुद्र के स्तर में वृद्धि को अग्रसर करेगा, जिससे निचले स्तर के क्षेत्रों में  नियमित एवं गंभीर तटीय बाढ़ आएगी।
    • भारत को उद्गामी समुद्रों से महत्वपूर्ण संकटों का सामना करना पड़ेगा क्योंकि इसकी 7,517 किलोमीटर लंबी तटरेखा है।
    • छह भारतीय बंदरगाह शहरों – चेन्नई, कोच्चि, कोलकाता, मुंबई, सूरत एवं विशाखापत्तनम में – 28.6 मिलियन लोग समुद्र के स्तर में 50 सेमी की वृद्धि होने पर तटीय बाढ़ से प्रभावित होंगे।
  • वैश्विक तापन: मुख्य रूप से मानवीय गतिविधियों के कारण, अगले दो दशकों में पूर्व-औद्योगिक समय में हमारा ग्रह अप्रतिसंहरणीय रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो रहा है।
    • पेरिस समझौते के लक्ष्यों के प्राप्त होने की संभावना नहीं है, जब तक कि सभी देशों द्वारा तत्काल अत्यधिक उत्सर्जन में कटौती नहीं की जाती है।
    • रिपोर्ट द्वारा प्रक्षेपण: सर्वाधिक महत्वाकांक्षी उत्सर्जन मार्ग में, विश्व 2030 के दशक में 1.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा, जो कि लक्ष्य के परे 1.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा, साथ ही सदी के अंत में तापमान 1.4 डिग्री सेल्सियस तक वापस गिर जाएगा।
    • अनुशंसा: देश 2050 तक निवल शून्य उत्सर्जन (कोई अतिरिक्त हरितगृह / ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं) प्राप्त  करने हेतु प्रयासरत हों।
    • भारत अभी तक निवल शून्य घटनाक्रम हेतु प्रतिबद्ध नहीं है
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात मजबूत एवं आर्द्र होते जा रहे हैं, जबकि आर्कटिक समुद्री बर्फ ग्रीष्म ऋतु में क्षीण हो रही है और स्थायी तुषार भूमि (पर्माफ्रॉस्ट) हिमद्रवित हो  रही है। ये सभी प्रवृत्ति और बदतर होंगे।

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FAQs

जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) क्या है?

आईपीसीसी को 1988 में विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) एवं संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) द्वारा निर्मित किया गया था, जिसका उद्देश्य सभी स्तरों पर सरकारों को वैज्ञानिक सूचनाएं उपलब्ध कराना था जिसका उपयोग वे जलवायु नीतियों को विकसित करने के लिए कर सकते हैं।

आईपीसीसी की छठी मूल्यांकन रिपोर्ट क्या है?

आईपीसीसी वर्तमान में अपनी छठी आकलन रिपोर्ट (एआर 6) तैयार कर रहा है। इस चक्र के दौरान, पैनल ने तीन विशेष रिपोर्ट, राष्ट्रीय ग्रीनहाउस गैस सूची पर एक कार्यप्रणाली रिपोर्ट तैयार की है, और अब छठी आकलन रिपोर्ट पर कार्यरत है। रिपोर्ट जलवायु प्रणाली तथा जलवायु परिवर्तन की सर्वाधिक अद्यतित भौतिक समझ को संबोधित करती है, जलवायु विज्ञान में नवीनतम प्रगति को एक साथ लाती है, एवं पुरापाषाण, अवलोकन, प्रक्रिया समझ और वैश्विक तथा क्षेत्रीय जलवायु अनुरूपण से साक्ष्य की कई पंक्तियों को जोड़ती है।

पेरिस समझौता किससे संबंधित है?

पेरिस समझौता ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती से संबंधित है।

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