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संपादकीय विश्लेषण: एमएसएमई को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में लाना

भारत में एमएसएमई: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं आयोजना, संसाधनों  का अभिनियोजन,  वृद्धि, विकास एवं रोजगार से संबंधित मुद्दे।

संपादकीय विश्लेषण: एमएसएमई को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में लाना_40.1

भारत में एमएसएमई

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज/MSME) भारत में 99% से अधिक व्यवसायों का गठन करते हैं।
  • MSMEs भारत में कृषि के अतिरिक्त सर्वाधिक वृहद नियोक्ता हैं, जो 11.1 करोड़ से अधिक व्यक्तियों, या सभी कर्मकारों के 45% को रोजगार प्रदान करते हैं।
  • महामारी के व्यवधान ने MSMEs को बुरी तरह प्रभावित किया, विशेष रूप से  उन्हें जो सेवा क्षेत्र  के अंतर्गत आते हैं।
  • नए सिरे से युद्ध, आपूर्ति के झटके एवं ईंधन के बढ़ते मूल्य, खाद्य  तथा उर्वरकों की कीमतों ने इन निजी स्वामित्व वाले उद्यमों के लिए कई नए खतरे प्रस्तुत किए।
  • जलवायु संकट एमएसएमई पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है, जिससे यह सर्वाधिक वृहद व्यवधान गुणक बन गया है।

 

एमएसएमई क्षेत्र के साथ मुद्दे

  • अधिकांश एमएसएमई उत्पादकता, पर्यावरणीय धारणीयता  तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य  एवं सुरक्षा पर आज के मानकों को पूरा नहीं करते हैं
  • इस क्षेत्र में उच्च स्तर की अनौपचारिकता, अनेक उद्यमों के अपंजीकृत होने के साथ एवं नियोक्ताओं तथा कर्मकारों दोनों में श्रम एवं पर्यावरण कानूनों का पालन करने हेतु जागरूकता तथा प्रतिबद्धता की कमी है।
  • अनौपचारिक उद्यम औपचारिक एमएसएमई समर्थन तथा वित्तपोषण तक नहीं पहुंच सकते हैं एवं न ही वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भाग ले सकते हैं जिन्हें सभी लागू नियमों के पूर्ण अनुपालन की आवश्यकता होती है।
  • डिजिटलीकरण डिजिटल तकनीकों के एकीकरण से संबंधित है, जैसे कि व्यापक डेटा, कृत्रिम प्रज्ञान एवं आभासी वास्तविकता, व्यावसायिक प्रक्रियाओं में, जिसे उद्योग 4.0 के रूप में भी जाना जाता है।

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एमएसएमई क्षेत्र के लिए उठाए गए कदम

  • भारत के मेक इन इंडियाअभियान का उद्देश्य देश को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने हेतु विनिर्माण मूल्य श्रृंखला तक पहुंचाना है।
  • उत्पादन सहलग्न प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं तथा हाल ही में आरंभ की गई शून्य प्रभाव शून्य दोष (जीरो इफेक्ट जीरो डिफेक्ट/जेडईडी) प्रमाणन जैसी पहल इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करने एवं वर्धन करने में  सहायता कर रही हैं।
  • डिजिटल सक्षम तथा उद्यम, ई-श्रम, राष्ट्रीय कैरियर सेवा (नेशनल करियर सर्विस/एनसीएस) एवं आत्मनिर्भर कर्मचारी-नियोक्ता मानचित्रण (आत्मनिर्भर स्किल्ड एंप्लॉय/एंप्लॉयर मैपिंग/एएसईईएम) पोर्टलों के अंतःसंबंधन जैसे सरकारी पहल लक्षित डिजिटलीकरण योजनाओं का वादा  प्रदर्शित करते हैं।
  • UNIDO (यूनाइटेड नेशंस इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन/संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन) ने पीतल, सिरेमिक, डेयरी, फाउंड्री तथा हस्त उपकरण क्षेत्रों को सम्मिलित करते हुए 23 समूहों में 695 MSMEs को ऊर्जा दक्षता सलाहकार सेवाएं प्रदान कीं।
  • हाल के आघातों के प्रत्युत्तर में आपूर्ति की लोचशीलता में वृद्धि करने हेतु, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के लिए उत्पादन स्थल तेजी से परिवर्तित हो रहे हैं एवं देशों तथा क्षेत्रों में विविधता ला रहे हैं। इस अवसर का लाभ उठाने के लिए, UNIDO विनिर्माण उत्कृष्टता की धारणा का नेतृत्व कर रहा है
  • प्रधान मंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (प्राइम मिनिस्टर एंप्लॉयमेंट जेनरेशन प्रोग्राम/पीएमईजीपी) स्वरोजगार तथा सूक्ष्म उद्यमों के लिए भी अवसर सृजित कर रहा है, जिसमें 7 लाख से अधिक सूक्ष्म उद्यम आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनने में सहायता कर रहे हैं।

 

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