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मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन।

 

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल क्या है?

  • ओजोन परत का क्षय करने वाले पदार्थों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पृथ्वी की ओजोन परत का क्षय करने वाले रसायनों को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने हेतु एक वैश्विक समझौता है।
  • इस चरणबद्ध योजना में ओजोन-क्षयकारी पदार्थों का उत्पादन एवं उपभोग दोनों सम्मिलित हैं।
  • इस ऐतिहासिक समझौते पर 1987 में हस्ताक्षर किए गए एवं यह 1989 में प्रवर्तन में आया।

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मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: इतिहास

  • 1985 तक, वैज्ञानिक प्रगति के कारण, ओजोन अपक्षय एवं मानव स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर इसके प्रभाव स्पष्ट हो गए।
  • इसके प्रत्युत्तर में ओजोन परत के संरक्षण हेतु वियना अभिसमय (कन्वेंशन) निर्मित किया गया था।
  • वियना कन्वेंशन किसी भी तरह का ऐसा प्रथम सम्मेलन था, जिसमें प्रत्येक सम्मिलित देश द्वारा हस्ताक्षर किया गया था, जो 1988 में प्रभावी हुआ एवं 2009 में सार्वभौमिक अनुसमर्थन तक पहुंच गया।
  • कन्वेंशन का उद्देश्य ओजोन परत पर मानवीय गतिविधियों के प्रभावों पर सूचनाओं का आदान-प्रदान करके राष्ट्रों के मध्य सहयोग को बढ़ावा देना है।
  • यद्यपि, वियना अभिसमय के लिए देशों को ओजोन परत की रक्षा हेतु नियंत्रणात्मक कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह अभिसमय विधिक रूप से बाध्यकारी नहीं है।
  • इस मुद्दे को हल करने के लिए, बाद में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल अस्तित्व में आया।

 

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल

  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को 197 देशों द्वारा हस्ताक्षरित किया गया है।
  • संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सार्वभौमिक अनुसमर्थन प्राप्त करने वाली यह पहली संधि है।
  • अनेक विशेषज्ञों द्वारा इसे सर्वाधिक सफल पर्यावरणीय वैश्विक कार्रवाई भी माना जाता है।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन क्षयकारी पदार्थों (ओडीएस) के रूप में संदर्भित लगभग 100 मानव निर्मित रसायनों के उत्पादन एवं उपयोग को नियंत्रित करता है।
  • इन्हें जब वातावरण में मुक्त किया जाता है, तो वे रसायन समताप मंडल की ओजोन परत को क्षति पहुंचाते हैं।
  • सामान्य किंतु विभेदित उत्तरदायित्व (सीबीडीआर): मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल विकसित एवं विकासशील देशों हेतु पृथक पृथक समय सारिणी के साथ चरणबद्ध रूप से विभिन्न ओडीएस के उपयोग एवं उत्पादन को कम करता है।
  • यद्यपि विकासशील एवं विकसित दोनों देशों के समान किंतु पृथक पृथक उत्तरदायित्व हैं, लेकिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि देशों के दोनों समूहों की बाध्यकारी, समय-लक्षित एवं मापन योग्य प्रतिबद्धताएं हैं।
  • प्रोटोकॉल को ओजोन सचिवालय द्वारा सहायता प्रदान की जाती है, जो केन्या के नैरोबी में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम मुख्यालय में अवस्थित है।

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मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल  के प्रावधान

नीचे मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान उल्लिखित हैं।

  • नियंत्रण हेतु आवश्यक कदम (अनुच्छेद 2),
  • नियंत्रण स्तरों की गणना (अनुच्छेद 3),
  • गैर-पक्षों के साथ व्यापार पर नियंत्रण (अनुच्छेद 4),
  • विकासशील देशों की विशेष स्थिति (अनुच्छेद 5)।

 

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के अंतर्गत नियंत्रित पदार्थ

  • परिशिष्ट ए (सीएफसी, हैलॉन्स),
  • परिशिष्ट बी (पूर्ण रूप से हैलोजन युक्त अन्य सीएफ़सी, कार्बन टेट्राक्लोराइड, मिथाइल क्लोरोफॉर्म),
  • परिशिष्ट सी (एचसीएफसी),
  • परिशिष्ट ई (मिथाइल ब्रोमाइड) एवं
  • परिशिष्ट एफ (एचएफसी)।

 

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: बहुपक्षीय कोष

  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन हेतु 1991 में बहुपक्षीय कोष की स्थापना की गई थी।
  • इस कोष का उद्देश्य विकासशील देशों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्रदान करना है,जिनका वार्षिक प्रति व्यक्ति उपभोग एवं ओडीएस का उत्पादन 3 किलोग्राम से कम है।
  • बहुपक्षीय कोष की गतिविधियां चार अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों – संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी), संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी), संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूएनआईडीओ) एवं विश्व बैंक के साथ-साथ गैर-अनुच्छेद 5 देशों की द्विपक्षीय एजेंसियों द्वारा कार्यान्वित की जाती हैं।

 

एचसीएफसी को चरणबद्ध रूप से बाहर करना – मॉन्ट्रियल संशोधन

  • हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन (एचसीएफसी) संपूर्ण विश्व में प्रशीतन, एयर कंडीशनिंग एवं फोम अनुप्रयोगों में उपयोग की जाने वाली गैसें हैं, किंतु उन्हें मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत चरणबद्ध रूप से बाहर किया जा रहा है क्योंकि वे ओजोन परत का क्षय कर देते हैं।
  • एचसीएफसी, ओडीएस एवं शक्तिशाली हरितगृह गैसें दोनों हैं: वैश्विक तापन क्षमता (जीडब्ल्यूपी) के मामले में सर्वाधिक उपयोग किया जाने वाला एचसीएफसी, कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में लगभग 2,000 गुना अधिक शक्तिशाली है।
  • सितंबर 2007 में, पक्षकारों ने एचसीएफसी को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने हेतु अपने कार्यक्रम में तेजी लाने का निर्णय लिया।
  • विकसित देशों द्वारा 2020 तक इन्हें पूरी तरह से चरणबद्ध रूप से समाप्त करने की योजना थी।
  • विकासशील देश 2013 में अपनी चरणबद्ध प्रक्रिया प्रारंभ करने हेतु सहमत हुए एवं अब 2030 तक एचसीएफसी के पूर्ण रूप से समाप्ति तक, चरणबद्ध रूप से बाहर करने की प्रक्रिया का अनुसरण कर रहे हैं।

 

एचएफसी को चरणबद्ध रूप से कम करना – किगाली संशोधन

  • इस बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

 

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की सफलता

  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के पूर्ण एवं सतत क्रियान्वयन के साथ, इस सदी के मध्य तक ओजोन परत के पुनर्स्थापित होने का अनुमान है।
  • इस संधि के बिना, ओजोन क्षय वर्तमान स्तरों की तुलना में 2050 तक दस गुना बढ़ गया होता एवं इसके परिणामस्वरूप मेलेनोमा, अन्य कैंसर तथा आंखों के मोतियाबिंद के लाखों अतिरिक्त मामले सामने आते।
  • उदाहरण के लिए, यह अनुमान लगाया गया है कि मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 2030 तक प्रत्येक वर्ष अनुमानित दो मिलियन लोगों को त्वचा कैंसर से बचा रहा है।
  • आज तक, प्रोटोकॉल के पक्षकारों ने 1990 के स्तर की तुलना में वैश्विक स्तर पर 98% ओडीएस को चरणबद्ध रूप से समाप्त कर दिया है।
  • चूंकि इनमें से अधिकांश पदार्थ शक्तिशाली हरित गृह गैसें हैं, अतः मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल भी वैश्विक जलवायु प्रणाली के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
  • किगाली संशोधन के अंतर्गत, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत एचएफसी के उपयोग को सीमित करने की कार्रवाई से हरितगृह गैसों के समतुल्य 105 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को रोकने की संभावना है।
  • इससे 2100 तक वैश्विक तापमान वृद्धि के 5 डिग्री सेल्सियस तक से बचने में सहायता करने की संभावना है।
  • इसने पेरिस समझौते के तहत प्रतिबद्धताओं को प्राप्त करने में भी सहायता की है।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।
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