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सहकारिता नीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन

सहकारिता नीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन

  • जीएस पेपर 2: शासन, प्रशासन एवं चुनौतियां- विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियां एवं अंतः क्षेप तथा उनकी अभिकल्पना एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

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सहकारिता नीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन

  • हाल ही में नई दिल्ली में सहकारिता नीति पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।

 

सहकारिता नीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में मुख्य बिंदु:

  • सहकारिता नीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में: सहकारिता नीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन अन्य केंद्रीय मंत्रालयों के सहयोग से सहकारिता मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
  • भागीदारी: लगभग 40 सहकारिता समितियों एवं अन्य प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों तथा संगठनों के प्रमुखों के साथ विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों ने सहयोग नीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया।
  • महत्व: सहकार से समृद्धि के मंत्र को साकार करने के लिए देश में सहकारिता आधारित आर्थिक प्रतिमान को सुदृढ़ करने के लिए प्रोत्साहन देने वाली एक नवीन सुदृढ़ राष्ट्रीय सहयोग नीति के निर्माण में सहयोग नीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन होने की संभावना है।

 

सहकारिता नीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन

सहकारिता नीति पर राष्ट्रीय सम्मेलन को छह महत्वपूर्ण विषय वस्तुओं में संरचित किया गया था जिसमें न केवल सहकारिता समितियों के संपूर्ण जीवन चक्र को सम्मिलित किया गया था बल्कि उनके व्यवसाय  तथा शासन के सभी पहलुओं को भी सम्मिलित किया गया था।

  • वर्तमान विधिक ढांचा, नियामक नीति का अभिनिर्धारण, संचालन संबंधी बाधाएं तथा उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक उपाय, जिससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एवं सहकारिता समितियों तथा अन्य आर्थिक निकायों को एक समान अवसर प्रदान किया जा सके।
  • सहकारिता सिद्धांतों, लोकतांत्रिक सदस्य नियंत्रण, सदस्यों की सहभागिता में वृद्धि करने, पारदर्शिता, नियमित चुनाव, मानव संसाधन नीति, अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय सर्वोत्तम पद्धतियों का लाभ उठाने, लेखा पालन एवं लेखा परीक्षा सहित शासन को सुदृढ़ करने हेतु सुधार
  • निम्नलिखित के माध्यम से बहु सहकारिता जीवंत आर्थिक निकाय-
    • आधारिक अवसंरचना को सुदृढ़ करना,
    • इक्विटी आधार को सुदृढ़ बनाना,
    • पूंजी तक पहुंच,
    • गतिविधियों का विविधीकरण,
    • उद्यमिता को बढ़ावा देना,
    • ब्रांडिंग को प्रोत्साहन देना,
    • विपणन,
    • व्यवसाय योजना विकास,
    • नवाचार,
    • प्रौद्योगिकी का अंगीकरण एवं
  • प्रशिक्षण, शिक्षा, ज्ञान साझाकरण तथा जागरूकता निर्माण जिसमें सहकारी समितियों को मुख्यधारा में सम्मिलित करना, प्रशिक्षण को उद्यमिता से जोड़ना, महिलाओं, युवा तथा कमजोर वर्गों को सम्मिलित करना शामिल है।
  • नवीन सहकारी समितियों को प्रोत्साहित करना, निष्क्रिय सहकारी समितियों को पुनर्जीवित करना, सहकारी समितियों के मध्य सहयोग को बढ़ावा देना, सदस्यता बढ़ाना, सामूहिकता को औपचारिक रूप प्रदान करना, सतत विकास के लिए सहकारिता समितियों को विकसित करना, क्षेत्रीय असंतुलन को कम करना और नए क्षेत्रों की खोज करना।
  • सामाजिक सहकारिता एवं सामाजिक सुरक्षा में सहकारिता समितियों की भूमिका को प्रोत्साहित करना।

 

सहकारिता मंत्रालय

  • गठन: भारत सरकार ने 06 जुलाई 2021 को एक नवीन सहकारिता मंत्रालय का सृजन किया था।
  • उद्देश्य: सहकारिता मंत्रालय का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के विकास तथा सहयोग से समृद्धि की दृष्टि को साकार करने हेतु नए सिरे से प्रोत्साहन प्रदान करना है।
  • प्रमुख भूमिका: सहकारिता मंत्रालय  नवीन योजनाओं तथा नई सहकारिता नीति के निर्माण के लिए सहकारिता क्षेत्र के विकास हेतु अनवरत कार्य कर रहा है। इसका उद्देश्य यह भी है-
    • देश में सहकारी आंदोलन को सुदृढ़ करने हेतु एक पृथक प्रशासनिक, विधिक एवं नीतिगत ढांचा प्रदान करना।
    • सहकारिता आंदोलन को जमीनी स्तर तक पहुँचाने में सहायता प्रदान करके एक वास्तविक जन-आंदोलन बनाना।
    • सहकारिता समितियों की व्यापारिक सुगमता हेतु प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना  एवं बहु-राज्य सहकारिता समितियों ( मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव/एमएससीएस) के विकास को सक्षम बनाना।

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सहकारिता समितियों के संदर्भ में संविधान प्रावधान

  • संविधान (97वां संशोधन) अधिनियम, 2011 ने भारत में कार्यरत सहकारिता समितियों के संबंध में भाग IXए (नगरपालिका) के शीघ्र पश्चात एक नया “भाग IX बी” जोड़ा।
  • अनुच्छेद 19(1)(सी) संविधान के भाग III के अंतर्गत: ” सहकारिता समितियों” का प्रावधान करता है, जिससे  समस्त नागरिकों को सहकारिता समितियों के निर्माण को मौलिक अधिकार का दर्जा  प्रदान कर सहकारिता समितियों का निर्माण करने की अनुमति प्राप्त होती है।
  • “सहकारिता समितियों के प्रोत्साहन” के संबंध में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों (भाग IV) में अनुच्छेद 43 बी जोड़ा गया था।

 

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