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राज्य वित्त बजट का एक अध्ययन: प्रासंगिकता
- जीएस 3: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं आयोजना, संसाधनों का अभिनियोजन, वृद्धि, विकास एवं रोजगार से संबंधित मुद्दे।
राज्य वित्त बजट का एक अध्ययन: प्रसंग
- हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक ने ‘स्टेट फाइनेंस: ए स्टडी ऑफ बजट्स ऑफ 2021-22’ शीर्षक से अपना वार्षिक प्रकाशन जारी किया है एवं कहा है कि राज्यों का ऋण-से-जीडीपी अनुपात चिंताजनक रूप से वित्त वर्ष के 23 लक्ष्य से अधिक है।
राज्य वित्त बजट का एक अध्ययन: प्रमुख निष्कर्ष
- राज्यों का संयुक्त ऋण-से-जीडीपी अनुपात मार्च 2022 के अंत तक 31% पर रहने की संभावना है जो कि 20% के लक्ष्य से चिंताजनक रूप से अधिक है, जिसे 2022-23 तक हासिल किया जाना है।
- रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जैसे-जैसे कोविड-19 की दूसरी लहर का प्रभाव कम होता जा रहा है, राज्य सरकारों को ऋण संपोषणीयता संबंधी चिंताओं को दूर करने हेतु विश्वसनीय कदम उठाने की आवश्यकता है।
- रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वर्ष 2021-22 के लिए राज्यों के सकल घरेलू उत्पाद के 7 प्रतिशत का बजट समेकित सकल राजकोषीय घाटा (जीएफडी) वित्त वर्ष-XV (15वें वित्त आयोग) द्वारा अनुशंसित 4 प्रतिशत के स्तर से कम है, जो राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की दिशा में राज्य सरकारों की मंशा को दर्शाता है।
- 15वें वित्त आयोग ने महामारी से प्रेरित मंदी को देखते हुए, 2022-23 में ऋण-जीडीपी अनुपात 3 प्रतिशत (2020-21, 2021-22 एवं 2022-23 में उच्च घाटे को देखते हुए) एवं धीरे-धीरे चरम पर पहुंचने का अनुमान लगाया। इसके बाद यह गिरावट 2025-26 तक 32.5 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।
- राजस्व की कमी को आंशिक रूप से दूर करने के लिए, राज्यों ने पेट्रोल, डीजल पर अपने प्रशुल्कों में वृद्धि की एवं स्वास्थ्य तथा सामाजिक सेवाओं पर अधिक व्यय हेतु स्थान बनाया।
राज्य वित्त बजट का एक अध्ययन: ऊर्जा क्षेत्र में सुधार
- मध्यावधि में, राज्य सरकारों की वित्तीय स्थिति में सुधार 15वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित एवं केंद्र द्वारा निर्दिष्ट ऊर्जा/विद्युत क्षेत्र में निम्नलिखित सुधारों पर निर्भर करेगा।
- किसानों के लिए विद्युत सहायिकी का पारदर्शी एवं परेशानी मुक्त प्रावधान निर्मित करना;
- क्षरण को रोकना; तथा
- विद्युत ऊर्जा वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) की तरलता के तनाव को धारणीय रूप से कम करके उनके स्वास्थ्य में सुधार करना।
- डिस्कॉम्स को राज्य के बकाया का समय पर भुगतान एवं बदले में, डिस्कॉम्स द्वारा उत्पादक कंपनियों (जेनकॉस) को भुगतान इस क्षेत्र के वित्तीय स्वास्थ्य की कुंजी है।
- रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि ऊर्जा क्षेत्र में सुधार करने से न केवल राज्यों द्वारा जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) के 25 प्रतिशत की अतिरिक्त ऋण की सुविधा प्राप्त होगी, बल्कि डिस्कॉम्स के वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार के कारण उनकी आकस्मिक देनदारियों में भी कमी आएगी।
- रिपोर्ट में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है कि कोविड-19 की पहली लहर के दौरान राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के विपरीत इस बार लगाए गए कम कड़े एवं स्थानीय प्रतिबंधों के कारण राज्य के वित्त पर दूसरी लहर का प्रभाव पहली लहर की तुलना में कम गंभीर होने की संभावना है।


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