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आरबीआई ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए मुद्रा एवं वित्त पर रिपोर्ट जारी की

वित्त वर्ष 2021-22 के लिए मुद्रा एवं वित्त पर रिपोर्ट: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं आयोजना, संसाधनों का अभिनियोजन, वृद्धि, विकास एवं रोजगार से संबंधित मुद्दे।

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मुद्रा एवं वित्त पर आरबीआई की रिपोर्ट: संदर्भ

  • ‘मुद्रा एवं वित्त वर्ष 2021-22’ पर हाल ही में जारी रिपोर्ट में, आरबीआई ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को कोविड-19 के नुकसान से उबरने में 12 वर्ष से अधिक समय लगने की संभावना है।

 

वित्त वर्ष 2021-22 के लिए मुद्रा एवं वित्त पर रिपोर्ट: प्रमुख बिंदु

  • रिपोर्ट की विषय वस्तु “पुनर्जीवित और पुनर्निर्माण” (रिवाइव एंड रिकंस्ट्रक्ट) है, जो एक कोविड-19 पश्च टिकाऊ पुनर्प्राप्ति को पोषित करने एवं मध्यम अवधि में प्रवृत्ति वृद्धि को बढ़ाने के संदर्भ में है।
  • रिपोर्ट ने स्वीकार किया है कि महामारी एक ऐतिहासिक (वाटरशेड) क्षण है एवं महामारी द्वारा उत्प्रेरित जारी संरचनात्मक परिवर्तन संभावित रूप से मध्यम अवधि में विकास प्रक्षेपवक्र को परिवर्तित कर सकते हैं।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है। कोविड-19 की एक ताजा लहर ने चीन, दक्षिण कोरिया एवं यूरोप के अनेक हिस्सों को प्रभावित किया है। यद्यपि, विभिन्न अर्थव्यवस्थाएँ, कुछ क्षेत्राधिकारों (जैसे, चीन, हांगकांग एवं भूटान) में नो-कोविड ​​​​नीति से लेकर अपेक्षाकृत खुली सीमाओं वाले एवं आंतरिक प्रतिबंधों को हटाने (जैसे, डेनमार्क और यूके) तक भिन्न-भिन्न प्रतिक्रिया दे रही हैं।

 

वित्त वर्ष 2021-22 के लिए मुद्रा एवं वित्त पर रिपोर्ट: प्रमुख निष्कर्ष

  • मूल्य स्थिरता: रिपोर्ट के अनुसार, सुधारों के लिए सात सूत्री रूपरेखा प्रस्तावित करने के अतिरिक्त,  सुदृढ़ एवं सतत विकास के लिए मूल्य स्थिरता एक आवश्यक पूर्व शर्त है।
  • जीडीपी: रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में मध्यम अवधि के स्थिर-राज्य जीडीपी विकास के लिए एक व्यवहार्य सीमा 6.5 – 8.5 प्रतिशत है, जो सुधारों के ब्लूप्रिंट के अनुरूप है।
  • मौद्रिक नीति: रिपोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि सतत विकास प्राप्त करने हेतु मौद्रिक एवं राजकोषीय नीतियों का समय पर पुनर्संतुलन इस यात्रा का प्रथम कदम होगा।
  • सरकारी कर्ज: इसके अतिरिक्त, भारत के मध्यम अवधि के विकास की संभावनाओं को सुरक्षित करने हेतु आगामी पांच वर्षों में सामान्य सरकारी ऋण को जीडीपी के 66 प्रतिशत से कम करना महत्वपूर्ण है।
  • बैंक: रिपोर्ट में सरकारी बैंकों को पुनर्पूंजीकरण के लिए सरकार पर अपनी निर्भरता कम करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
  • उद्यमिता: अर्थव्यवस्था को उद्यमियों के लिए नवप्रवर्तन एवं निवेश करने हेतु एक वातावरण सृजित करना चाहिए एवं व्यवसायों को जोड़ने से अधिक पूंजी तथा प्रौद्योगिकी को आकर्षित करने में सक्षम होना चाहिए।

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वित्त वर्ष 2021-22 के लिए मुद्रा एवं वित्त पर रिपोर्ट: संस्तुतियां

  • रिपोर्ट में प्रस्तावित सुधारों की रूपरेखा आर्थिक प्रगति के सात पहियों अर्थात समग्र मांग; कुल आपूर्ति; संस्थानों, बिचौलियों एवं बाजारों; व्यापक आर्थिक स्थिरता तथा नीति समन्वय; उत्पादकता  एवं तकनीकी प्रगति; संरचनात्मक परिवर्तन तथा धारणीयता के इर्द-गिर्द घूमता है।
  • रिपोर्ट ने मुकदमेबाजी मुक्त अल्प लागत वाली भूमि तक पहुंच में वृद्धि सहित; शिक्षा एवं स्वास्थ्य तथा कौशल भारत मिशन पर सार्वजनिक व्यय के माध्यम से श्रम की गुणवत्ता में वृद्धि करने सहित संरचनात्मक सुधारों का सुझाव दिया है।
  • नवाचार एवं प्रौद्योगिकी पर बल देते हुए अनुसंधान तथा विकास गतिविधियों में वृद्धि करना, स्टार्ट-अप एवं यूनिकॉर्न के लिए एक सक्षम वातावरण निर्मित करना, सहायिकी को युक्तिसंगत बनाना जो अक्षमताओं को प्रोत्साहन देते हैं तथा आवास एवं भौतिक आधारिक अवसंरचना में सुधार करके शहरी समूहों को प्रोत्साहित करते हैं।
  • सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय पर निरंतर जोर, डिजिटलीकरण को प्रोत्साहन देना तथा ई-कॉमर्स, स्टार्ट-अप, नवीकरणीय एवं आपूर्ति श्रृंखला रसद जैसे क्षेत्रों में नए निवेश के लिए बढ़ते अवसर,बदले में अर्थव्यवस्था में औपचारिक- अनौपचारिक अंतर को समाप्त करते हुए प्रवृत्ति वृद्धि को बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं ।

 

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