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पूर्वोत्तर क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन परियोजना (एनईआरसीओआरएमपी)

पूर्वोत्तर क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन परियोजना (एनईआरसीओआरएमपी) – यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: शासन, प्रशासन एवं चुनौतियां- इन कमजोर वर्गों की सुरक्षा और बेहतरी के लिए गठित तंत्र, कानून, संस्थान एवं निकाय।

पूर्वोत्तर क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन परियोजना (एनईआरसीओआरएमपी)_40.1

पूर्वोत्तर क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन परियोजना (एनईआरसीओआरएमपी) – संदर्भ

  • पूर्वोत्तर/उत्तर पूर्वी क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन परियोजना (एनईआरसीओआरएमपी) के अंतःक्षेप ने महिलाओं को स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करके उनके सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया।

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पूर्वोत्तर क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन परियोजना (एनईआरसीओआरएमपी)- प्रमुख बिंदु

  • पूर्वोत्तर क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन परियोजना (एनईआरसीओआरएमपी) के बारे में: पूर्वोत्तर/उत्तर पूर्वी क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन परियोजना (एनईआरसीओआरएमपी) पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी),  डीओएनईआर मंत्रालय, सरकार एवं भारत एवं कृषि विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोष/ इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट (आईएफएडी) की एक संयुक्त विकास पहल है।
  • अधिदेश: एनईआरसीओएमपी एक आजीविका एवं ग्रामीण विकास परियोजना है, जिसका उद्देश्य उत्तर पूर्व (एनई) भारत में निर्धनता ता उपेक्षित जनजातीय (आदिवासी) परिवारों के जीवन को रूपांतरित करना है।
  • मूल मंत्रालय: पूर्वोत्तर क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन परियोजना (एनईआरसीओआरएमपी) पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी), डीओएनईआर मंत्रालय के तहत कार्य करती है।
  • फोकस क्षेत्र: एनईआरसीओएमपी निम्नलिखित दो व्यापक फोकस क्षेत्रों के साथ विकास के समग्र दृष्टिकोण को अपनाता है-
  1. सामाजिक अभिनियोजन (लामबंदी), उनकी समय परीक्षित पारंपरिक मूल्य प्रणालियों और संस्कृति को परिनियोजित कर समुदायों की विशाल अव्यक्त क्षमता को बाहर निकालने एवं वास्तविकता में परिवर्तित करने हेतु संगठन एवं क्षमता निर्माण
  2. आर्थिक रूपांतरण प्राप्त करने के लिए आय सृजन गतिविधियों पर प्रमुख जोर देने के साथ आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों तथा आधारिक संरचना में हस्तक्षेप करना
  • संक्रियागत क्षेत्र: एनईआरसीओएमपी तीन राज्यों एवं छह जिलों में संचालित है यथा-
  1. असम (कार्बी आंगलोंग एवं उत्तरी कछार पहाड़ियाँ),
  2. मणिपुर (उखरुल एवं सेनापति) एवं
  3. मेघालय (पश्चिमी गारो पहाड़ियाँ एवं पश्चिमी खासी पहाड़ियाँ)।

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पूर्वोत्तर क्षेत्र सामुदायिक संसाधन प्रबंधन परियोजना (एनईआरसीओआरएमपी) – प्रमुख गतिविधियां

  • समुदायों एवं सहभागी एजेंसियों का क्षमता निर्माण: एनईआरसीओएमपी सामुदायिक संस्थानों (सीबीओ) के संस्थागत सुदृढ़ीकरण एवं भाग लेने वाली एजेंसियों, एनजीओ, लाइन विभाग इत्यादि की क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य करता है।
  • आर्थिक एवं आजीविका गतिविधियां: एनईआरसीओएमपी धारणीय एवं पर्यावरण के अनुकूल प्रथाओं का उपयोग करते हुए कृषि फसलों, बागवानी, वानिकी, पशुधन, मत्स्य पालन एवं गैर-कृषि गतिविधियों के उत्पादन के माध्यम से निर्धन परिवारों के लिए व्यवहार्य आय सृजन गतिविधियों (आईजीए) को प्रोत्साहन प्रदान करता है।
  • विस्तार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: एक ग्राहक उन्मुख एवं मांग संचालित विस्तार प्रणाली की ओर विस्तार सेवाओं को पुन: उन्मुख करना, जो सहभागी विस्तार विधियों पर आधारित है।
    • प्रशिक्षण के माध्यम से गाँव या संकुल (क्लस्टर) स्तर पर ग्राम स्वयंसेवकों के एक नेटवर्क की स्थापना को प्रोत्साहन देना, जो बदले में सामुदायिक स्तर पर सेवाओं का विस्तार करेगा।
  • साख/क्रेडिट: परियोजना एसएचजी, एनएआरएम-जी अथवा जिला स्तर के सूक्ष्म साख (माइक्रो क्रेडिट) संस्थानों के माध्यम से समुदायों को ऋण सहायता के लिए परिक्रामी निधि प्रदान करती है जो परियोजना क्षेत्रों में विकसित होते हैं।
  • सामाजिक क्षेत्र की गतिविधियां: सुरक्षित पेयजल एवं बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं तथा स्वच्छता हेतु समुदायों की पहुंच में सुधार करना।
    • सरकार की विभिन्न सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं एवं इसके महत्व के बारे में समुदायों को जागरूकता प्रदान करना।
  • ग्रामीण सड़कें तथा ग्रामीण विद्युतीकरण: समुदायों को उनके गांवों तक बेहतर पहुंच के लिए गांव की सड़कों के उन्नयन एवं निर्माण में सहायता करना तथा बाजारों में उत्पादों के आवागमन की सुविधा प्रदान करना।
    • वर्तमान ग्रिड से कनेक्शन के लिए परियोजना सहायता के माध्यम से या जहां भी संभव हो, नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों का संचालन करके विशाल संख्या में घरों को विद्युत ऊर्जा प्रदान करना।
  • समुदाय आधारित जैव विविधता संरक्षण / प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं संचार: समुदायों की निम्नलिखित हेतु सहायता करना-
    • उनकी विशिष्ट एवं प्राकृतिक संसाधनों तथा जैविक विविधता का संरक्षण करना,
    • स्वदेशी संस्थानों को सुदृढ़ करना एवं
    • नवीन संरक्षण प्रथाओं को संस्थागत बनाना;
    • सूचना साझा करने की प्रणाली को सुदृढ़ बनाना एवं
    • परियोजना की उत्तम प्रथाओं का दस्तावेजीकरण।
  • जारी सरकारी योजनाओं/कार्यक्रमों के साथ अभिसरण: यह परियोजना सरकारी एवं गैर-सरकारी एजेंसियों के साथ अभिसरण पर बल प्रदान करती है।
    • परियोजना में उपलब्ध वित्तीय एवं तकनीकी सहायता की कमी को पूरा करने के साथ-साथ समुदाय की मांगों को भी पूरा करने की सुविधा प्रदान करता है।
  • विपणन सहायता: परियोजना गतिविधियों के चयन में सुविधा प्रदान करती है एवं एनएआरएम समूहों के भीतर विपणन समितियों का गठन करती है।
    • इस परियोजना ने कृषि एवं गैर-कृषि उत्पादों दोनों के विक्रय की सुविधा के लिए विपणन एवं संग्रह शेड, आईवीआर इत्यादि जैसे विपणन आधारिक संरचना का निर्माण भी किया।
    • यह परियोजना मांग एवं आपूर्ति के अनुरूप होने हेतु विपणन योग्य अधिशेष के मूल्यवर्धन एवं मूल्य श्रृंखला की स्थापना की सुविधा भी प्रदान करती है।

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