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मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में गिरावट | भारत के रजिस्ट्रार जनरल

मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) – यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: शासन, प्रशासन एवं चुनौतियां- स्वास्थ्य से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास  तथा प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।

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मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) समाचारों में 

  • भारत के महापंजीयक (रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया) द्वारा जारी एक विशेष बुलेटिन के अनुसार भारत के मातृ मृत्यु दर (मैटरनल मोर्टालिटी रेशियो/MMR) में 10 अंकों की गिरावट आई है।

 

मातृ मृत्यु दर की परिभाषा

  • मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को एक निश्चित समय अवधि के दौरान समान समय अवधि के दौरान प्रति 100,000 जीवित जन्मों के सापेक्ष मातृ मृत्यु की संख्या के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • एमएमआर जीवित जन्मों की संख्या के सापेक्ष मातृ मृत्यु के जोखिम को  प्रदर्शित करता है एवं अनिवार्य रूप से एकल गर्भावस्था अथवा एकल जीवित जन्म में मृत्यु के जोखिम को प्रग्रहित करता है।

 

भारत का मातृ मृत्यु दर (MMR)

  • भारत का मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) 2016-18 में 113 से गिरकर 2017-18 में 103 (8.8% गिरावट) हो गया है।
  • भारत में एमएमआर में 2014-2016 में 130, 2015-17 में 122, 2016-18 में 113 तथा 2017-19 में 103 में प्रगामी कमी देखी गई थी।
  • महत्व: इस निरंतर गिरावट के साथ, भारत 2020 तक राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (नेशनल हेल्थ पॉलिसी/एनएचपी) के 100/लाख जीवित जन्म के लक्ष्य को प्राप्त करने के करीब था।
    • भारत 2030 तक 70/लाख जीवित जन्मों के सतत विकास लक्ष्य ( सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स/एसडीजी) के लक्ष्य को प्राप्त करने की राह पर है।

 

एमएमआर पर राज्यवार प्रदर्शन

  • एसडीजी लक्ष्यों को प्राप्त करने वाले राज्यों की संख्या में वृद्धि: एसडीजी लक्ष्य प्राप्त करने वाले राज्यों की संख्या अब पांच से बढ़कर सात हो गई है। ये राज्य हैं-
    • केरल (30),
    • महाराष्ट्र (38),
    • तेलंगाना (56),
    • तमिलनाडु (58),
    • आंध्र प्रदेश (58),
    • झारखंड (61),  एवं
    • गुजरात (70)
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति ( नेशनल हेल्थ पॉलिसी/एनएचपी) लक्ष्यों को प्राप्त करने वाले राज्यों की संख्या में वृद्धि: अब नौ राज्य हैं जिन्होंने एनएचपी द्वारा निर्धारित एमएमआर लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है, जिसमें उपरोक्त सात एवं कर्नाटक (83) तथा हरियाणा (96) सम्मिलित हैं।
  • एमएमआर में अधिकतम गिरावट: उत्तर प्रदेश द्वारा उत्साहजनक उपलब्धि दर्ज की गई है, जिसमें अधिकतम 30 अंक की गिरावट दर्ज की गई है, इसके बाद राजस्थान (23 अंक), बिहार (19 अंक), पंजाब (15 अंक) तथा ओडिशा (14 अंक) का स्थान है।
  • एमएमआर में वृद्धि प्रदर्शित करने वाले राज्य: पश्चिम बंगाल, हरियाणा, उत्तराखंड तथा छत्तीसगढ़ ने एमएमआर में वृद्धि प्रदर्शित की है।
    • इन राज्यों को एसडीजी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपनी रणनीति का पुनर्मूल्यांकन करने  एवं एमएमआर में गिरावट को त्वरित करने के प्रयासों को और गहन करने की आवश्यकता होगी।
  • राज्यों में प्रतिशत-वार एमएमआर गिरावट:
    • MMR में 15% से अधिक की गिरावट: केरल, महाराष्ट्र एवं उत्तर प्रदेश में MMR में 15% से अधिक की गिरावट देखी गई है।
    • MMR में 10-15% के मध्य की गिरावट: झारखंड, राजस्थान, बिहार, पंजाब, तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश में 10-15% के मध्य की गिरावट देखी गई है।
    • MMR में 5-10% के मध्य की गिरावट: मध्य प्रदेश, गुजरात, ओडिशा एवं कर्नाटक में 5-10% के मध्य की गिरावट देखी गई।

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भारत के महापंजीयक के बारे में मुख्य बिंदु

  • भारत के महापंजीयक के बारे में: 1949 में, सरकार ने भारत के महापंजीयक तथा पदेन जनगणना आयुक्त के अधीन गृह मंत्रालय में एक संगठन की स्थापना की।
    • रजिस्ट्रार का पद आमतौर पर एक सिविल सेवक के पास होता है जो संयुक्त सचिव के स्तर का पद धारण करता है।
  • अधिदेश: भारत के महापंजीयक को जनसंख्या के आकार, उसकी वृद्धि इत्यादि पर आंकड़ों का एक व्यवस्थित संग्रह विकसित करने हेतु अधिदेशित है।
  • प्रमुख उत्तरदायित्व: भारत के महापंजीयक भारत की जनगणना एवं भारतीय भाषा सर्वेक्षण सहित भारत के जनसांख्यिकीय सर्वेक्षणों के परिणामों की व्यवस्था, संचालन एवं विश्लेषण करते हैं।

 

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