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भारतीय परिचर्या (नर्सिंग) परिषद – यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा हेतु प्रासंगिकता
- जीएस पेपर 2: भारतीय संविधान- वैधानिक, नियामक एवं विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय।
भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) – संदर्भ
- भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) की हालिया अधिसूचना ने बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम में विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) हेतु 5% आरक्षण को मात्र निचले अंगों की विकलांगता वाले व्यक्तियों हेतु, एवं वह भी 40-50% विकलांगों हेतु सीमित कर दिया है।
- भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) की अधिसूचना की अखिल-भारतीय विकलांग स्वास्थ्य पेशेवरों के समूह ने आलोचना की है।
- समूह ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एवं विकलांग व्यक्तियों के अधिकारिता विभाग से निम्नलिखित की मांग की –
- कथित रूप से भेदभावपूर्ण खंड का निरसन।
- विकलांग परिचारिकाओं (नर्सों) एवं विकलांगता अधिकार कार्यकर्ताओं को नए दिशानिर्देश तैयार करने में सम्मिलित किया जाना चाहिए।

भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी)- प्रमुख बिंदु
- भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) के बारे में: यह भारत सरकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय है।
- भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) का गठन केंद्र सरकार द्वारा संसद के भारतीय नर्सिंग परिषद अधिनियम, 1947 के प्रावधानों के अंतर्गत किया गया था।
- भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) का अधिदेश: नर्सों, दाइयों तथा स्वास्थ्य आगंतुकों हेतु प्रशिक्षण का एक समान मानक स्थापित करना।
- विनियमन: भारतीय नर्सिंग परिषद नर्सिंग शिक्षा को औषध पत्र, निरीक्षण, परीक्षा एवं प्रमाणन के माध्यम से नियंत्रित करती है।
- 91% नर्सिंग शिक्षा संस्थान निजी हैं एवंअपर्याप्त रूप से विनियमित हैं। असमान एवं अपर्याप्त विनियमन से नर्सों के प्रशिक्षण की गुणवत्ता कम हो जाती है।
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भारत में नर्सिंग क्षेत्र
- अपर्याप्त क्षमता: भारत का नर्सिंग कार्यबल उसके स्वास्थ्य कार्यबल का लगभग दो-तिहाई है।
- प्रति 1,000 जनसंख्या पर 7 परिचारिकाएं हैं जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानदंड से 43% कम है (भारत को मानदंड को पूरा करने के लिए 4 मिलियन नर्सों की आवश्यकता है)।
- भारत में नर्सिंग क्षेत्र की संरचनात्मक चुनौतियां प्रशिक्षण की अपर्याप्त गुणवत्ता, असमान वितरण एवं गैर-मानकीकृत अभ्यासों की ओर अग्रसर करती है।
- नर्सिंग शिक्षा में अंतराल:
- संकाय पदों में रिक्ति: नर्सिंग महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में क्रमशः लगभग 86% एवं 80% रिक्तियां हैं।
- नर्सिंग संस्थानों का असमान वितरण: लगभग 62% नर्सिंग संस्थान दक्षिण भारत में स्थित हैं।
हाल के घटनाक्रम
- भारतीय नर्सिंग परिषद को राष्ट्रीय नर्सिंग एवं प्रसूति विद्या (मिडवाइफरी) आयोग नामक एक नए निकाय के साथ प्रतिस्थापित करने हेतु सरकार द्वारा राष्ट्रीय नर्सिंग और प्रसूति विद्या आयोग विधेयक तैयार किया गया है।
- राष्ट्रीय नर्सिंग एवं प्रसूति विद्या आयोग: इस निकाय में केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधि होंगे। इसके प्रमुख कार्य होंगे-
- नर्सिंग एवं प्रसूति विद्या शिक्षा तथा संस्थानों के शासन हेतु नीतियां निर्मित करना एवं मानकों को विनियमित करना।
- शिक्षण संस्थानों में नर्सिंग एवं प्रसूति विद्या संकाय तथा नैदानिक सुविधाओं के लिए मानक प्रदान करना।
- नर्सिंग एवं प्रसूति विद्या पेशे में पेशेवर नैतिकता का पालन सुनिश्चित करने हेतु नीतियां एवं संहिता निर्मित करना।
- यह पाठ्यक्रमों की पेशकश करने वाले विभिन्न संस्थानों का मूल्यांकन एवं श्रेणीकरण भी करेगा।
विश्व सामाजिक सुरक्षा रिपोर्ट 2020-22




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