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ग्राम न्यायालय | ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008

ग्राम न्यायालय- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: भारतीय संविधान- सरकार के कार्यपालिका एवं न्यायपालिका, मंत्रालयों एवं विभागों की संरचना, संगठन तथा कार्यकरण।

ग्राम न्यायालय | ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008_40.1

 समाचारों में ग्राम न्यायालय?

  • राज्य सरकारों/उच्च न्यायालयों द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार, अब तक 15 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा 476 ग्राम न्यायालयों को अधिसूचित किया जा चुका है।
    • इनमें से 257 वर्तमान में 10 राज्यों में क्रियाशील हैं।

 

ग्राम न्यायालय के बारे में प्रमुख तथ्य

  • पृष्ठभूमि: भारत के विधि आयोग ने नागरिकों को उनके द्वार पर न्याय के लिए किफायती एवं त्वरित पहुंच प्रदान करने के लिए ग्राम न्यायालयों की स्थापना का सुझाव दिया था।
  • संबद्ध विधान: ग्राम न्यायालयों की स्थापना ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008 के तहत की गई है जो 02 अक्टूबर, 2009 से प्रवर्तन में आया है।
  • ग्राम न्यायालय: ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008 मध्यवर्ती पंचायत स्तर पर ग्राम न्यायालयों की स्थापना का प्रावधान करता है।
  • ग्राम न्यायालयों की स्थापना: राज्य सरकारें संबंधित उच्च न्यायालयों के परामर्श से ग्राम न्यायालयों की स्थापना हेतु उत्तरदायी हैं।
    • यद्यपि, अधिनियम ग्राम न्यायालयों की स्थापना को अनिवार्य नहीं बनाता है।
  • न्यायिक स्थिति: ग्राम न्यायालयों को ग्राम स्तर पर छोटे-मोटे विवादों को निपटाने के लिए सिविल एवं आपराधिक दोनों अधिकार क्षेत्र के साथ प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय माना जाता है।
  • केंद्र द्वारा वित्तीय सहायता: ग्राम न्यायालय खोलने के लिए, केंद्र सरकार वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों को प्रोत्साहित कर रही है।
    • तब से सरकार ने ग्राम न्यायालय योजना के लिए आवंटित 50 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय पर 2026 तक इस योजना को पांच वर्ष की अवधि के लिए विस्तारित कर दिया गया है।
    • ग्राम न्यायालयों के लिए धन तभी जारी किया जाएगा जब उन्हें अधिसूचित किया जाता है एवं न्यायाधिकारियों की नियुक्ति के साथ-साथ क्रियाशील किया गया है एवं न्याय विभाग के ग्राम न्यायालय पोर्टल पर रिपोर्ट किया गया है।

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ग्राम न्यायालय अधिनियम की मुख्य विशेषताएं

  • ग्राम न्यायालयों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को उनके द्वार पर किफायती  न्याय उपलब्ध कराना है;
  • मध्यवर्ती स्तर पर प्रत्येक पंचायत के लिए या मध्यवर्ती स्तर पर सन्निहित पंचायतों के समूह के लिए  अथवा सन्निहित ग्राम पंचायतों के समूह के लिए ग्राम न्यायालय स्थापित किए जाने हैं;
  • ग्राम न्यायालयों की पीठ मध्यवर्ती पंचायत के मुख्यालय में अवस्थित होगी।
    • न्यायाधिकारी समय-समय पर गांवों का दौरा करेंगे एवं पक्षों को सुन सकते हैं तथा अपने मुख्यालय के  अतिरिक्त अन्य स्थानों पर पर मामलों का निपटारा कर सकते हैं;
  • ग्राम न्यायालय आपराधिक मामलों, दीवानी वादों, दावों या विवादों की सुनवाई करेंगे जो अधिनियम की पहली अनुसूची तथा दूसरी अनुसूची में निर्दिष्ट हैं।
    • उन्हें आपराधिक मुकदमे में संक्षिप्त प्रक्रिया का पालन करना होता है।
  • पक्षों के मध्य सुलह कराकर जहाँ तक संभव हो विवादों को सुलझाया जाना है  एवं इस उद्देश्य के लिए ग्राम न्यायालय इस उद्देश्य के लिए नियुक्त किए जाने वाले सुलहकर्ताओं का उपयोग करेंगे;
  • ग्राम न्यायालय भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 में प्रावधानित साक्ष्य के नियमों से बाध्य नहीं होगा,  किंतु उच्च न्यायालय द्वारा निर्मित किए गए किसी भी नियम के अधीन प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होगा।

 

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