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फ्लाई ऐश

फ्लाई ऐश: यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • सामान्य अध्ययन III- पर्यावरण।

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फ्लाई ऐश: चर्चा में क्यों है?

  • राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल/एनजीटी) ने कहा कि छत्तीसगढ़ में फ्लाई ऐश के उपयोग एवं निस्तारण में वृद्धि करने की तत्काल आवश्यकता है।

 

फ्लाई ऐश क्या है?

  • फ्लाई ऐश कोयले के दहन का एक उप-उत्पाद है एवं इसमें एल्युमिनियम सिलिकेट,  सिलिकॉन डाई ऑक्साइड (SiO2), कैल्शियम ऑक्साइड (CaO), आयरन के ऑक्साइड, मैग्नीशियम तथा सीसा, आर्सेनिक, कोबाल्ट एवं तांबा सदृश विषाक्त धातुएँ होती हैं।
  • भारत अगले  दशक में अपने उर्जा उत्पादन को दोगुना करने के लिए तैयार है एवं कोयले के ऊर्जा उत्पादन के लिए ईंधन का सर्वाधिक वृहद स्रोत होने के कारण फ्लाई ऐश की समस्या में भी वृद्धि होने वाली है।

 

फ्लाई ऐश: पर्यावरणीय समस्याएं 

  • फ्लाई ऐश में पाई जाने वाली सभी भारी धातुएं – निकल, कैडमियम, आर्सेनिक, क्रोमियम, सीसा इत्यादि – प्रकृति में विषाक्त होती हैं एवं संभावित रूप से आसपास की मृदा में निक्षालित हो सकती हैं तथा खाद्य-श्रृंखला में भी प्रवेश कर सकती हैं।
  • फ्लाई ऐश श्वास के माध्यम से सरलता से अंतर्ग्रहित हो जाती है, जिससे दमा (अस्थमा), स्नायविक विकार जैसे अनेक रोग हो जाते हैं।
  • हवा में निलंबित फ्लाई ऐश वैश्विक तापन  के कारक के रूप में कार्य करता है एवं पृथ्वी की सतह को गर्म करता है।
  • फ्लाई ऐश पत्तियों एवं फसलों पर स्थिर हो जाती है एवं फसल की उत्पादकता को कम कर देता है।
  • यह भूजल को प्रदूषित करता है।
  • शीत ऋतु में में घना कोहरा निर्मित कर दृश्यता कम कर देता है।

 

फ्लाई ऐश: प्रबंधन

  • सरकार का आदेश है कि सभी कोयला ऊर्जा संयंत्र (कोल पावर प्लांट/सीपीपी) फ्लाई ऐश के 100% उपयोग तक पहुंचें एवं कोयला ऊर्जा संयंत्र (सीपीपी) को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों (माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज/एमएसएमई) को ईंटों, टाइलों के निर्माण के लिए एक निश्चित मात्रा में फ्लाई ऐश  निशुल्क देनी चाहिए तथा शेष फ्लाई ऐश को अन्य उद्योगों को विक्रय किया जाना चाहिए।
  • कोयला विद्युत संयंत्र (सीपीपी) को हवा में इसके निलंबन को कम करने के लिए फ्लाई ऐश तालाबों को अनुरक्षित रखना होगा किंतु ये सभी कदम जोखिमों का शमन करने हेतु अत्यंत कम हैं।
  • फ्लाई ऐश का मूल्य निर्धारण एक विवादास्पद मुद्दा बनता जा रहा है जो इसके लाभकारी उपयोग में बाधा बन रहा है।
  • फ्लाई ऐश निस्तारण के साथ जोखिमों का मूल्यांकन करने का वर्तमान दृष्टिकोण अत्यधिक सीमित है एवं वे वास्तविक जोखिमों को कम करके आंक सकते हैं।
  • फ्लाई ऐश के उपयोग के लिए सरकार, अनेक गैर-सरकारी एवं अनुसंधान तथा विकास संगठनों द्वारा की गई पहल के बावजूद, देश में फ्लाई ऐश के उपयोग का स्तर मात्र 38% है जो वैश्विक मानकों से कम है।
  • अतः, नियामकों की चेतावनियों के बावजूद, फ्लाई ऐश का उपयोग करने के स्थान पर भंडारित किया जा रहा है।
  • भंडारण स्थानों में जमा होने से जल एवं मृदा पर उनकी खनिज संरचना के साथ-साथ आकारिकी तथा निस्यंदन गुणों के कारण नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • कोल विद्युत  संयंत्रों (सीपीपी) में ऐश-प्रबंधन इकाइयां जल की सर्वाधिक वृहद उपभोक्ता हैं। सरकार फ्लाई ऐश के लिए लगभग 1:5 के रूप में डिजाइन किए गए राख (ऐश)- जल के अनुपात की वकालत करती है, किंतु अवलोकित किया गया अनुपात लगभग 1:20 रहा है।
  • कुछ राज्यों ने सार्वजनिक कार्यों में मिश्रित सीमेंट एवं फ्लाई ऐश ईंटों के उपयोग को हतोत्साहित किया है।

 

फ्लाई ऐश: आगे की राह

मुद्दों को निम्नलिखित द्वारा हल किया जा सकता है-

  • अधिक नियामक निरीक्षण एवं मूल्य नियंत्रण।
  • सीमेंट सम्मिश्रण मानकों में संशोधन।
  • फ्लाई ऐश की गुणवत्ता में सुधार हेतु शोध कार्य।
  • परिवहन की लागत को कम करना।
  • सूचना विषमताओं पर नियंत्रण पाने के लिए प्रावधान।
  • फ्लाई ऐश के ईंटों के उत्पादन के लिए ईंट भट्टों में उपयोग को प्रोत्साहित करना।
  • इस मामले में प्रमुख निर्णयकर्ताओं को समग्र रूप से संवेदनशील बनाना।
  • इसे राख (फ्लाई ऐश) के तालाबों पर डंप करने के स्थान पर, पॉज़ोलन के रूप में इसके पुन: उपयोग एवं हाइड्रोलिक सीमेंट द्वारा पोर्टलैंड सीमेंट के प्रतिस्थापन के कारण निर्माण हेतु उपयोग किया जा सकता है।
  • इसके दानों के आकार के वितरण, वर्धित क्षमता पारगम्यता के कारण, इसका उपयोग सड़क निर्माण, घाटघर बांध जैसे कंक्रीट बांधों पर तटबंधों के निर्माण के लिए किया जा सकता है।
  • उन उत्पादन इकाइयों के लिए कठोर दंड का प्रावधान जो उचित निस्यंदन उपकरणों का उपयोग नहीं करते हैं।
  • कोयला आधारित तापीय उत्पादन से नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की ओर अग्रसर होना।

 

निष्कर्ष

  • फ्लाई ऐश का उपयोग न केवल संभव है बल्कि आवश्यक भी है।
  • “भारत सरकार का फ्लाई ऐश मिशन” एक मंद किंतु स्थिर शुरुआत है, जिसकी गति को तेज करने की आवश्यकता है।
  • फ्लाई ऐश आधारित सीमेंट या कंक्रीट की धारणा में सुधार के लिए संबंधित हितधारकों द्वारा एक ईमानदार प्रयास की आवश्यकता है; विशेष रूप से सरकारी कार्यों के लिए इसके उपयोग में वृद्धि एवं फ्लाई ऐश, इसके उपयोग तथा संभावित प्रभावों के बारे में वैज्ञानिक ज्ञान प्रदान करना।

 

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