Home   »   रेड सैंडलवुड ‘ संकटग्रस्त’ श्रेणी में...   »   रेड सैंडलवुड ‘ संकटग्रस्त’ श्रेणी में...

रेड सैंडलवुड ‘ संकटग्रस्त’ श्रेणी में पुनः वापस

रेड सैंडलवुड ‘ संकटग्रस्त’: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण, पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन।

UPSC Current Affairs

रेड सैंडलवुड ‘ संकटग्रस्त’: प्रसंग

  • हाल ही में, आईयूसीएन (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर्स) ने रेड सैंडर्स (रेड सैंडलवुड/लाल चंदन) को अपनी आईयूसीएन रेड लिस्ट में वापस संकटग्रस्तश्रेणी में डाल दिया है

 

लाल चंदन/रेड सैंडलवुड के बारे में

  • रेड सैंडलवुड या टेरोकार्पस सेन्टेलिनस एक भारतीय स्थानिक वृक्ष प्रजाति है, जिसकी पूर्वी घाट में एक सीमित भौगोलिक सीमा है।
    • यह प्रजाति आंध्र प्रदेश में वनों के एक अलग क्षेत्र के लिए स्थानिक है।
  • रेड सैंडलवुड को 2018 में लुप्तप्राय‘ (नियर थ्रीटेंडेड) के रूप में वर्गीकृत किया गया था एवं अब इसे आईयूसीएन की लाल सूची में 2021 में एक बार पुनः ‘संकटग्रस्त’ (एंडेंजर्ड) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
  • 1997 के बाद पहली बार इस प्रजाति को एंडेंजर्ड श्रेणी से हटाया गया। यह सभी लोगों के लिए खुशी एवं उत्सव का क्षण था।

 

‘संकटग्रस्त’ दर्जा प्राप्त होने का कारण

  • अति-दोहन के कारण प्रजाति अपने प्राकृतिक पर्यावास में ह्रासोन्मुख है। इसे आईयूसीएन मानदंड के अनुसार एंडेंजर्ड के रूप में मूल्यांकन किया गया है एवं सीआईटीईएस एवं वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के परिशिष्ट II में भी निर्धारित किया गया है।
  • प्रजातियों की अत्यधिक कटाई ने जनसंख्या संरचना को विषम कर दिया है, कटाई योग्य आकार एवं परिपक्वता के वृक्ष दुर्लभ हैं एवं वनों में 5 प्रतिशत से भी कम वृक्ष शेष हैं।
  • प्रजातियों को सीआईटीईएस के परिशिष्ट II के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है एवं इनका अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिबंधित है। राज्य स्तर पर वृक्षों की कटाई भी प्रतिबंधित है, किंतु इसके बावजूद अवैध व्यापार जारी है
  • प्रजातियों की धीमी वृद्धि एवं निरंतर कटाई के कारण प्रजातियों को स्वाभाविक रूप से पुनर्स्थापित होने का समय नहीं मिलता है। मवेशियों द्वारा चराई एवं आक्रामक प्रजातियों से भी इन प्रजातियों को खतरा है।

 

लाल चंदन/ रेड सैंडलवुड के लाभ

  • लाल चंदन अपने चटक रंग एवं चिकित्सीय गुणों के लिए जाना जाता है।
  • संपूर्ण एशिया में, विशेष रूप से चीन एवं जापान में, सौंदर्य प्रसाधन एवं औषधीय उत्पादों के साथ-साथ फर्नीचरकाष्ठ शिल्प एवं संगीत वाद्ययंत्र बनाने के लिए उनकी मांग बहुत अधिक है।
    • इसकी लोकप्रियता का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक टन लाल चंदन की कीमत 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच है।

UPSC Current Affairs

आईयूसीएन लाल सूची: संकटग्रस्त दर्जा प्रदान करने हेतु मानदंड

  • जिन प्रजातियों में निम्नलिखित कारकों के परिणामस्वरूप विलुप्त होने का बहुत अधिक जोखिम होता है, उन्हें आईयूसीएन रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (एंडेंजर्ड) प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
    • विगत 10 वर्षों (या तीन पीढ़ियों) की तुलना में तेजी से इनकी संख्या 50 से 70 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई हो,
    • 250 से कम व्यष्टियों का वर्तमान जनसंख्या आकार,
    • वनों में विलुप्त होने की संभावना 20 वर्षों या पाँच पीढ़ियों के भीतर न्यूनतम 20% हो,
    • एवं अन्य कारक।

 

 

संपादकीय विश्लेषण- सुधार उत्प्रेरक के रूप में जीएसटी क्षतिपूर्ति का विस्तार विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, चीन एक विकासशील देश है स्वामी विवेकानंद मकर संक्रांति, लोहड़ी एवं पोंगल 2022: तिथि, इतिहास एवं महत्व
संरक्षित क्षेत्र: राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य,  जैव मंडल आरक्षित केंद्र संपादकीय विश्लेषण: वह पाल जिसकी भारतीय कूटनीति, शासन कला को आवश्यकता है ई-गवर्नेंस 2021 पर 24वां राष्ट्रीय सम्मेलन: हैदराबाद घोषणा को अपनाया गया आरबीआई ने फिनटेक विभाग की स्थापना की
जल्लीकट्टू- तमिलनाडु सरकार ने जल्लीकट्टू की अनुमति दी राष्ट्रीय युवा महोत्सव 2022- प्रधानमंत्री 25वें राष्ट्रीय युवा महोत्सव का उद्घाटन करेंगे भारत में जैव मंडल आरक्षित केंद्रों/बायोस्फीयर रिजर्व की सूची संपादकीय विश्लेषण- निजता के बजाय नियंत्रण

 

prime_image
About the Author

I am an SEO Executive with over 4 years of experience in Marketing and now Edtech Agency. I am specializes in optimizing websites to improve search engine rankings and increase organic traffic. I am up to date with the latest SEO trends to deliver results-driven strategies. In my free time, I enjoys exploring new technologies and reading about the latest digital marketing techniques.

QR Code
Scan Me