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जल्लीकट्टू- तमिलनाडु सरकार ने जल्लीकट्टू की अनुमति दी

जल्लीकट्टू- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 1: भारतीय इतिहास- भारतीय संस्कृति प्राचीन से आधुनिक काल तक कला रूपों, साहित्य एवं वास्तुकला के मुख्य पहलुओं को सम्मिलित करेगी।

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जल्लीकट्टू- प्रसंग

  • कोविड मामलों में वृद्धि के बावजूद, तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में जल्लीकट्टू, मंजू विरट्टू एवं वडामाडू के आयोजन की अनुमति प्रदान की है।
  • बैठने की क्षमता के मात्र 50%  स्थान ही भरे जा सकते हैं एवं शारीरिक दूरी के मानदंडों का पालन सुनिश्चित करने  हेतु जल्लीकट्टू कार्यक्रमों में दर्शकों की संख्या 150 तक सीमित होगी।

 

जल्लीकट्टू- प्रमुख बिंदु

  • जल्लीकट्टू के बारे में: जल्लीकट्टू तमिलनाडु में एक प्रतिस्पर्धी खेल है, जो सांड मालिकों को सम्मानित करता है जो उन्हें प्रजनन (मेटिंग) हेतु पालते हैं।
    • जल्लीकट्टू एक हिंसक खेल है जिसमें प्रतिभागी पुरस्कार के लिए एक सांड को वश में करने का प्रयास करते हैं; यदि वे विफल हो जाते हैं, तो सांड का मालिक पुरस्कार जीत जाता है।
    • जल्लीकट्टू को अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे येरुथाज़ुवुथल, मदु पिडीथल एवं पोलेरुधु पिडीथल।
  • जल्लीकट्टू क्षेत्र: जल्लीकट्टू तमिलनाडु के मदुरै, तिरुचिरापल्ली, थेनी, पुदुक्कोट्टई एवं डिंडीगुल जिलों में अधिकांश लोकप्रिय है। इस क्षेत्र को जल्लीकट्टू पट्टी (बेल्ट) के नाम से भी जाना जाता है।
  • समय: जल्लीकट्टू तमिल फसल उत्सव, पोंगल (आदर्श रूप से जनवरी के दूसरे सप्ताह में) के दौरान मनाया जाता है।

 

जल्लीकट्टू- तमिल संस्कृति में महत्व

  • देशी सांडों का संरक्षण: जल्लीकट्टू को किसान समुदाय के लिए अपनी शुद्ध नस्ल के देशी सांडों/बैलों को संरक्षित करने का एक पारंपरिक तरीका माना जाता है।
    • ऐसे समय में जब पशु प्रजनन प्रायः एक कृत्रिम प्रक्रिया होती है, संरक्षणवादियों और किसानों का तर्क है कि जल्लीकट्टू इन नर जानवरों की रक्षा करने का एक तरीका है जो अन्यथा जुताई के लिए नहीं तो मात्र मांस के लिए उपयोग किए जाते हैं
  • मूल निवासियों के मध्य सम्मान: अधिमूल्य (प्रीमियम) जल्लीकट्टू नस्ल के सांड के मालिकों को स्थानीय स्तर पर सम्मान प्राप्त है।
    • जल्लीकट्टू के लिए उपयोग की जाने वाली लोकप्रिय देशी नस्लों में कंगायम, पुलीकुलम, उम्बालाचेरी, बरगुर एवं मलाई मांडू शामिल हैं।

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जल्लीकट्टू- कानूनी लड़ाई का विकास क्रम

  • 2007: भारतीय पशु कल्याण बोर्ड एवं पशु अधिकार समूह पेटा ने जल्लीकट्टू के साथ-साथ बैलगाड़ी दौड़ के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
  • 2009: यद्यपि, तमिलनाडु सरकार ने 2009 में एक कानून पारित करके इसे प्रतिबंध से बाहर निकलने का कार्य किया, जिस पर राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षर किए गए थे।
  • 2011: केंद्र ने सांडों को उन जानवरों की सूची में शामिल किया जिनका प्रशिक्षण एवं प्रदर्शनी प्रतिबंधित है।
  • 2014: सर्वोच्च न्यायालय ने 2011 की अधिसूचना का हवाला देते हुए एक याचिका पर निर्णय देते हुए सांडों को वश में करने (बुल- टेमिंग) खेल पर प्रतिबंध लगा दिया।
  • 2017: सर्वोच्च न्यायालय के 2014 के आदेश को निरस्त करने हेतु, तमिलनाडु सरकार ने केंद्रीय अधिनियम में संशोधन एवं राज्य में जल्लीकट्टू की अनुमति देने वाला एक अध्यादेश जारी किया।
    • बाद में राष्ट्रपति द्वारा इसकी अभिपुष्टि की गई।
  • 2018 (वर्तमान स्थिति): सर्वोच्च न्यायालय ने जल्लीकट्टू मामले को एक संविधान पीठ के समक्ष भेज दिया, जहां यह अभी लंबित है।
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