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जम्मू-कश्मीर का किश्तवाड़ क्षेत्र, उत्तर भारत का प्रमुख ‘पावर हब’

जम्मू-कश्मीर का किश्तवाड़ क्षेत्र: जम्मू एवं कश्मीर (J & K) केंद्र शासित प्रदेश में स्थित किश्तवाड़ क्षेत्र अपने अद्वितीय भूगोल, सांस्कृतिक विरासत तथा प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। भव्य हिमालय पर्वतमाला के  मध्य अवस्थित, किश्तवाड़ बर्फ से ढके पर्वतों, हरी-भरी घाटियों तथा सुरम्य परिदृश्य के लुभावने दृश्य प्रस्तुत करता है। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ क्षेत्र में जलविद्युत परियोजनाएं यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा एवं यूपीएससी मुख्य परीक्षा (जीएस पेपर 3- जल विद्युत ऊर्जा अवसंरचना निर्मित करना तथा विकसित करना) के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

जम्मू-कश्मीर का किश्तवाड़ क्षेत्र चर्चा में क्यों है?

हाल ही में, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने घोषणा की कि जम्मू एवं कश्मीर में किश्तवाड़, जारी ऊर्जा परियोजनाओं के पूरा होने के बाद लगभग 6,000 मेगावाट बिजली उत्पन्न करने की क्षमता के साथ उत्तर भारत में एक प्रमुख “पावर हब” (ऊर्जा केंद्र) के रूप में उभरने हेतु तैयार है।

  • इसके अतिरिक्त, मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किश्तवाड़ में उत्पादित अतिरिक्त बिजली न केवल केंद्र शासित प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की बिजली की आवश्यकताओं को पूरा करेगी बल्कि पड़ोसी राज्यों को भी उपलब्ध कराई जा सकती है।

किश्तवाड़ क्षेत्र में जलविद्युत परियोजनाएं

किश्तवाड़ क्षेत्र उत्तर भारत में एक महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र के रूप में स्थित है। किश्तवाड़ से अतिरिक्त बिजली का उपयोग न केवल इस केंद्र शासित प्रदेश के अन्य भागों के लिए किया जाएगा, बल्कि अन्य राज्यों द्वारा भी इसका लाभ उठाया जा सकता है।

  • यह ध्यान देने योग्य है कि किश्तवाड़ क्षेत्र में सर्वाधिक वृहद ऊर्जा परियोजना पाकल दुल परियोजना है, जिसकी क्षमता 1000 मेगावाट है।
  • परियोजना की वर्तमान अनुमानित लागत 2025 की अनुमानित पूर्णता समयरेखा के साथ 8,112.12 करोड़ रुपये है।
  • एक अन्य महत्वपूर्ण उपक्रम किरू जलविद्युत परियोजना है, जिससे 624 मेगावाट ऊर्जा उत्पन्न होने की  संभावना है।
  • इस परियोजना की अनुमानित लागत 4,28559 करोड़ रुपये है, जिसकी पूर्णता समय-सीमा 2025 है।

क्वार तथा रातले जलविद्युत परियोजना विवरण

किश्तवाड़ से लगभग 43 किमी दूर अवस्थित एक अन्य परियोजना 624 मेगावाट की क्षमता वाली क्वार जलविद्युत परियोजना है।

  • इस परियोजना की अनुमानित लागत 4526.12 करोड़ रुपये है एवं इस परियोजना के पूर्ण होने की समय सीमा 54 माह है।
  • किरू जलविद्युत परियोजना के लगभग 25 किलोमीटर नदी के प्रवाह की दिशा (अपस्ट्रीम) में 930 मेगावाट की क्षमता वाली एक अन्य जलविद्युत परियोजना कीर्थाई II जलविद्युत परियोजना है।
  • वहीं, 850 मेगावाट की रातले परियोजना को केंद्र तथा केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के मध्य एक संयुक्त उद्यम के रूप में पुनर्जीवित किया गया है।
  • इसके अतिरिक्त, मौजूदा दुलहस्ती पावर स्टेशन की स्थापित क्षमता 390 मेगावाट है, जबकि दुलहस्ती II जलविद्युत परियोजना की क्षमता 260 मेगावाट होगी।

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ क्षेत्र में अन्य विकासात्मक पहलें

सड़क मार्ग से किश्तवाड़ की यात्रा करना दुष्कर कार्य था, भूस्खलन के कारण डोडा-किश्तवाड़ सड़क मार्ग पर बार-बार अवरोध उत्पन्न हो रहे थे। हालांकि, जम्मू से किश्तवाड़ की यात्रा का समय अब ​​2014 में 7 घंटे से कम होकर 5 घंटे से भी कम हो गया है।

  • इसके अतिरिक्त, 9 वर्षों की अवधि में, किश्तवाड़ ने उल्लेखनीय प्रगति देखी है एवं केंद्र की उड़ान (UDAN) योजना के तहत एक हवाई अड्डे के लिए अनुमोदन प्राप्त करते हुए भारत के विमानन मानचित्र पर शामिल किया गया है, जो किसी की अपेक्षाओं से परे था।
  • मोदी सरकार के नेतृत्व में, अनेक उल्लेखनीय विकास हुए हैं, जैसे कि खिलानी-सुध महादेव राजमार्ग सहित तीन नए राष्ट्रीय राजमार्गों की स्थापना।
  • इसके अतिरिक्त, मचैल यात्रा के मार्ग एवं अन्य दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल टावरों की स्थापना के साथ-साथ डिग्री कॉलेजों की एक श्रृंखला स्थापित की गई है।
  • गरीब कल्याण अन्न योजना, जन धन, उज्जवला, शौचालय, पीएम आवास, हर घर जल, हर घर बिजली, एवं आयुष्मान जैसी समावेशी योजनाएं किश्तवाड़ सहित देश के सर्वाधिक दूरस्थ एवं चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों तक सफलतापूर्वक पहुंच गई हैं।

किश्तवाड़ क्षेत्र का महत्व

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने भी इन परियोजनाओं के लिए अकुशल नौकरियों में स्थानीय लोगों के लिए 100 प्रतिशत आरक्षण का आश्वासन दिया तथा कुशल जनशक्ति आवश्यकताओं में स्थानीय प्रतिभाओं को वरीयता देने का वादा किया।

  • ये परियोजनाएं न केवल केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में ऊर्जा आपूर्ति की कमी को दूर करती हैं, बल्कि वे एक महत्वपूर्ण निवेश के रूप में भी कार्य करती हैं जो स्थानीय आबादी के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष अवसर प्रदान करती हैं, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
  • अप्रयुक्त क्षमता वाले क्षेत्र, जैसे कि किश्तवाड़, उत्तर-पूर्व एवं अन्य पहाड़ी क्षेत्र, आगामी 25 वर्षों में भारत की भविष्य की यात्रा में उल्लेखनीय महत्व रखेंगे।
  • संतृप्त राज्यों के स्थान पर ये क्षेत्र भारत को वैश्विक मंच पर एक प्रमुख राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाएंगे, विशेष रूप से जब यह 2047 में अपनी स्वतंत्रता के 100वें वर्ष का उत्सव मनाएगा।

 

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