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भारतीय फुटवियर एवं चमड़ा विकास कार्यक्रम

भारतीय फुटवियर  एवं चमड़ा विकास कार्यक्रम: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियां एवं अंतःक्षेप तथा उनकी अभिकल्पना एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।

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भारतीय फुटवियर एवं चमड़ा विकास कार्यक्रम: संदर्भ

  • हाल ही में, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने भारतीय फुटवियर तथा चमड़ा विकास कार्यक्रम (इंडियन फुटवियर एंड लेदर डेवलपमेंट प्रोग्राम/आईएफएलडीपी) को 2026 तक अथवा आगामी समीक्षा तक जारी रखने को स्वीकृति प्रदान की है।

 

भारतीय फुटवियर एवं चमड़ा विकास कार्यक्रम: प्रमुख बिंदु

  • भारतीय फुटवियर एवं चमड़ा विकास कार्यक्रम (आईएफएलडीपी), पूर्व में आईएफएलएडीपी (इंडियन फुटवियर लेदर एंड एसेसरीज डेवलपमेंट प्रोग्राम/भारतीय फुटवियर चमड़ा एवं सहायक उपकरण विकास कार्यक्रम) को 2021-22 से जारी रखने हेतु अनुमोदित किया गया है, जिसमें 1700 करोड़ रुपये के स्वीकृत वित्तीय परिव्यय हैं।
  • भारतीय फुटवियर एवं चमड़ा विकास कार्यक्रम (आईएफएलडीपी) का उद्देश्य चर्म/चमड़ा क्षेत्र के लिए बुनियादी ढांचे का विकास करना, चमड़ा क्षेत्र से संबंधित विशिष्ट पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करना, अतिरिक्त निवेश की सुविधा, रोजगार सृजन तथा उत्पादन में वृद्धि करना है।

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आईएफएलडीपी उप योजनाएं

2021-26 के दौरान आईएफएलडीपी के अंतर्गत निम्नलिखित उप-योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है:

  • सतत प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण संवर्धन (प्रस्तावित परिव्यय 500 करोड़ रुपये): – विशेष प्रयोजन वाहन सीईटीपी को पूर्वोत्तर क्षेत्रों के लिए कुल परियोजना लागत का 80% एवं अन्य के लिए कुल परियोजना लागत का 70% की सीमा के साथ 200 करोड़ रु. की सीमा के साथ सहायता प्रदान की जाएगी।
  • चमड़ा क्षेत्र का एकीकृत विकास (इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ लेदर सेक्टर/आईडीएलएस) (प्रस्तावित परिव्यय 500 करोड़ रुपये):- क्षेत्रीय इकाइयों को उनके आधुनिकीकरण/क्षमता विस्तार/प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए 01.2020 को या उसके बाद एमएसएमई इकाइयों को 30% की दर से एवं अन्य इकाइयों को 20% दर से सहायता प्रदान की जाएगी। ।
  • संस्थागत सुविधाओं की स्थापना (प्रस्तावित परिव्यय 200 करोड़ रुपये):- अंतर्राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र, खेल परिसर की स्थापना, एलईडी रोशनी के साथ पारंपरिक रोशनी के उपकरणों के स्थान पर एवं एफडीडीआई परिसरों में बालिकाओं के छात्रावास के निर्माण की योजना है।
  • मेगा लेदर फुटवियर एंड एक्सेसरीज क्लस्टर डेवलपमेंट (एमएलएफएसीडी) (प्रस्तावित परिव्यय 300 करोड़ रुपए):- उप-योजना का उद्देश्य विश्व स्तरीय आधारिक संरचना एवं उत्पादन श्रृंखला को इस प्रकार से एकीकृत करना है जो चमड़े तथा फुटवियर उद्योग की व्यावसायिक आवश्यकताओं को पूर्ण करता हो ताकि घरेलू बाजार एवं निर्यात को पूरा किया जा सके।
  • चमड़ा एवं फुटवियर क्षेत्र में भारतीय ब्रांडों का ब्रांड प्रचार (100 करोड़ रुपये प्रस्तावित परिव्यय):- भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सहायता कुल परियोजना लागत का 50% प्रस्तावित है, जो 3 वर्ष में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 10 भारतीय ब्रांड को प्रोत्साहित करने हेतु आगामी तीन वर्षों में प्रत्येक ब्रांड के लिए 10 करोड़ रुपये की अधिकतम सीमा के अधीन है।
  • डिजाइन स्टूडियो का विकास (प्रस्तावित परिव्यय रु.100 करोड़):
    • यह एक नवीन उप-योजना है। यह सहायता 10 भारतीय डिजाइन स्टूडियो विकसित करने हेतु प्रदान की जाएगी।
    • स्टूडियो विपणन/निर्यात संबंधों को बढ़ावा देंगे, क्रेता-विक्रेता बैठक की सुविधा प्रदान करेंगे, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को डिजाइन प्रदर्शित करेंगे एवं व्यापार मेलों के लिए अंतरापृष्ठ (इंटरफेस) के रूप में कार्य करेंगे।
    • डिजाइन स्टूडियो एक प्रकाश का ‘एकल बिंदु केंद्र’ (वन-स्टॉप-शॉप) होगा जो सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला: डिज़ाइन, तकनीकी सहायता, गुणवत्ता नियंत्रण इत्यादि प्रदान करेगा।

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पूर्ववर्ती आईएफएलएडीपी का प्रभाव

  • कार्यक्रम का विशेष रूप से महिलाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन, कौशल विकास, सभ्य कार्य, उद्योग को अधिक पर्यावरण हितैषी बनाने एवं एक स्थायी उत्पादन प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में प्रत्यक्ष लाभ है।
  • देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित चर्म संकुलों (लेदर क्लस्टर्स) ने निर्धनता में कमी, लैंगिक समानता, क्षेत्र विशिष्ट कौशल/शिक्षा इत्यादि के संदर्भ में लाभ अर्जित किया है, इस प्रकार कई सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को छू लिया है।
  • एनडीपी (नेशनल डेवलपमेंट प्रोग्राम/राष्ट्रीय विकास कार्यक्रम) जैसे आर्थिक विकास, निर्धनता में कमी, रोजगार सृजन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा/कौशल, लैंगिक समानता, अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण, आधारिक संरचना विकास, सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा तथा अन्य पर्यावरणीय लाभ आईएफएलएडी कार्यक्रम द्वारा अच्छी तरह से उपलब्ध हैं।

 

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