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भारत-यूएई सीईपीए- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता
- जीएस पेपर 2: अंतर्राष्ट्रीय संबंध- द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह तथा भारत से जुड़े एवं/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते।
भारत-यूएई सीईपीए चर्चा में क्यों है?
- हाल ही में, सरकार ने सूचित किया कि, भारत-संयुक्त अरब अमीरात (यूनाइटेड अरब एमिरेट्स/यूएई) व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट/सीईपीए) जो 1 मई 2022 को प्रवर्तन में आया, पूर्व से ही भारत-यूएई व्यापार पर एक महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न कर रहा है।
भारत-यूएई व्यापार पर भारत-यूएई सीईपीए का प्रभाव
- संयुक्त अरब अमीरात को भारतीय निर्यात, पेट्रोलियम उत्पादों को छोड़कर, जून-अगस्त 2021 के दौरान 5.17 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर जून-अगस्त 2022 के दौरान 5.92 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जो 14% की वृद्धि को दर्शाता है।
- यह ध्यान देने योग्य है कि इसी अवधि (जून-अगस्त 2022) के दौरान भारत के वैश्विक गैर-पेट्रोलियम निर्यात में वार्षिक आधार पर 3% की वृद्धि हुई।
- इसका तात्पर्य यह है कि संयुक्त अरब अमीरात को भारत के गैर-पेट्रोलियम निर्यात की वृद्धि दर विश्व में भारत के गैर-पेट्रोलियम निर्यात का लगभग 5 गुना है।
- पेट्रोलियम से संबंधित आयातों को छोड़कर, संयुक्त अरब अमीरात से भारतीय आयात उसी तीन माह की अवधि के दौरान 5.56 बिलियन अमेरिकी डॉलर (जून-अगस्त 2021) से बढ़कर 5.61 बिलियन अमेरिकी डॉलर (जून-अगस्त 2022) या प्रतिशत के संदर्भ में 1% की वृद्धि हुई।
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हाल के दिनों में भारत की निर्यात वृद्धि प्रक्षेपवक्र
- वर्ष-प्रति-वर्ष आधार पर भारत के गैर-तेल निर्यात में लगभग 14% की वृद्धि महत्वपूर्ण वृहत अर्थशास्त्र संबंधी प्रतिकूल दशा (मैक्रोइकॉनॉमिक हेडविंड) के संदर्भ में आती है जैसे-
- यूक्रेन में संघर्ष,
- चीन में कोविड-19 से संबंधित लॉकडाउन,
- मुद्रास्फीति के बढ़ते दबाव,
- विकसित अर्थव्यवस्थाओं में अपेक्षित नीतिगत कटौती करना,
- वैश्विक विकास में मंदी एवं परिणामस्वरूप मांग में कमी,
- वैश्विक व्यापारिक व्यापार में कमी (2022 की पहली तिमाही में वृद्धि घटकर 2% हो गई, जबकि 2021 की चौथी तिमाही में 5.7%) इत्यादि।
भारत-यूएई सीईपीए: प्रमुख विशेषताएं
- प्रशुल्कों में कमी: भारत-यूएई मुक्त व्यापार समझौता (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट/एफटीए) 80 प्रतिशत वस्तुओं के लिए प्रशुल्कों में कमी करने एवं संयुक्त अरब अमीरात को भारत के निर्यात के 90 प्रतिशत तक शून्य – चुंगी पहुंच (जीरो-ड्यूटी एक्सेस) देने के लिए तैयार है।
- भारत से लगभग 26 बिलियन डॉलर का वार्षिक निर्यात, जो वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात में 5 प्रतिशत आयात शुल्क को आकर्षित करता है, लाभान्वित होने के लिए तैयार है।
- विस्तार क्षेत्र: भारत-यूएई सीईपीए समझौता निम्नलिखित क्षेत्रों को सम्मिलित करता है-
- वस्तुएं,
- सेवाएं,
- उद्गम के नियम,
- सीमा शुल्क प्रक्रिया,
- सरकारी अधिप्राप्ति,
- बौद्धिक संपदा अधिकार, एवं
- ई-कॉमर्स।
- उद्गम के नियम (रूल्स ऑफ ओरिजिन): भारत-यूएई सीईपीए में दोनों अर्थव्यवस्थाओं को तीसरे देशों द्वारा समझौते के दुरुपयोग से सुरक्षित करने हेतु उद्गम के मजबूत नियम सम्मिलित हैं, जिसमें किसी भी देश से घरेलू रूप से उत्पादित उत्पादों के रूप में अर्ह होने के लिए इस्पात निर्यात के लिए “मेल्ट एंड पोर” की आवश्यकता शामिल है।
- सुरक्षा तंत्र: समझौता दोनों देशों में व्यवसायों की रक्षा के लिए एक स्थायी सुरक्षा तंत्र भी प्रदान करता है ताकि “किसी विशेष उत्पाद (आयात) की मात्रा में किसी भी अनावश्यक अथवा अनुचित वृद्धि को रोका जा सके।
- चिकित्सा उत्पादों हेतु शीघ्र नियामक अनुमोदन: भारत-यूएई सीईपीए के तहत, यूएई भारतीय दवा उत्पादों एवं चिकित्सा उत्पादों के लिए 90 दिनों के भीतर बाजार पहुंच तथा नियामक अनुमोदन की सुविधा के लिए सहमत हुआ।
- यह सुविधा उन उत्पादों के लिए उपलब्ध है जिन्हें अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय यूनियन, कनाडा तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित क्षेत्राधिकारों में अनुमोदित किया गया है।
- प्रौद्योगिकी एवं स्थिरता पर ध्यान केंद्रण: न्यू इंडिया-यूएई साझेदारी में प्रौद्योगिकी, डिजिटल व्यापार एवं स्थिरता पर व्यापक ध्यान है।
- “खाद्य सुरक्षा गलियारा पहल” के संबंध में संयुक्त अरब अमीरात की ओर से एपीडा, डीपी वर्ल्ड तथा अल दहरा के मध्य एक समझौता ज्ञापन तैयार किया गया है, जिसके तहत भारत संयुक्त अरब अमीरात की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।



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