Home   »   Gopal Ganesh Agarkar   »   Gopal Ganesh Agarkar

गोपाल गणेश आगरकर- भारतीय समाज सुधारक, शिक्षाविद एवं विचारक

गोपाल गणेश आगरकर- यूपीएससी परीक्षा  के लिए प्राथमिकता

  • जीएस पेपर 1: भारतीय इतिहास- अठारहवीं शताब्दी के मध्य से लेकर वर्तमान तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्वपूर्ण घटनाएं, व्यक्तित्व, मुद्दे।

हिंदी

समाचारों में गोपाल गणेश आगरकर 

  • हाल ही में, भारत ने आधुनिक भारतीय समाज सुधारक, शिक्षाविद तथा विचारक गोपाल गणेश आगरकर की जयंती मनाई।

 

गोपाल गणेश अगरकर

  • गोपाल गणेश आगरकर के बारे में: गोपाल गणेश आगरकर का जन्म 14 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के तेंभु ​​में हुआ था।
  • मान्यता: गोपाल गणेश आगरकर तर्कवाद, व्यक्तिवाद, समानता एवं मानवतावाद के प्रस्तावक थे।
    • गोपाल गणेश आगरकर का मानना ​​था कि शिक्षा एवं प्रेस इन विचारों को प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
  • समाज सुधारक: आगरकर के समाज सुधार के एजेंडे में सम्मिलित हैं-
    • नारी मुक्ति,
    • अंधविश्वासी कर्मकांडों का विरोध,
    • जातिगत भेदभाव को दूर करना,
    • वैज्ञानिक स्वभाव का प्रसार एवं
    • पुरुषों तथा महिलाओं दोनों के लिए शिक्षा को प्रोत्साहित करना
  • गोपाल गणेश आगरकर यूरोप में ज्ञान के युग एवं मिल, स्पेंसर, वोल्टेयर तथा रूसो के लेखन से प्रेरित थे, जिसने उन्हें वैज्ञानिक तर्कवाद का प्रस्तावक बना दिया।

 

गोपाल गणेश आगरकर

  • जाति व्यवस्था के विरुद्ध: गोपाल गणेश आगरकर समकालीन समाज में प्रचलित विभिन्न कुरीतियों के खिलाफ थे।
    • उन्होंने 1887 में अपनी पत्रिका सुधारक प्रारंभ की जिसमें उन्होंने छुआछूत एवं जाति व्यवस्था के अन्याय के  विरुद्ध अभियान चलाया।
  • महिला सशक्तिकरण को प्रोत्साहन: महिलाओं के अधिकारों के बारे में आगरकर की चिंता बचपन से ही उत्पन्न हुई थी – उन्होंने अपनी दो विधवा मौसी/चाची की पीड़ा को देखा।
    • मिल का महिलाओं की अधीनता, जिसमें कहा गया है कि किसी दिए गए समाज के मानक को महिलाओं की स्थिति से संकेत प्राप्त होता है, सामाजिक सुधार हेतु उनके पक्ष पोषण का केंद्र था।
    • उन्होंने विधवा पुनर्विवाह का भी समर्थन किया तथा इसके लिए संघर्ष किया।
    • उन्होंने विवाह आयु सम्मति विधेयक (एज ऑफ कंसेंट बिल) तथा पुना में पंडिता रमाबाई के विधवा गृह को समर्थन प्रदान किया।
  • शिक्षा को प्रोत्साहन: गोपाल गणेश आगरकर महिलाओं एवं पुरुषों दोनों के सशक्तिकरण में शिक्षा की भूमिका में विश्वास करते थे।
    • इस उद्देश्य के निमित्त, उन्होंने बाल गंगाधर तिलक के साथ न्यू इंग्लिश स्कूल, डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी  एवं फर्ग्युसन कॉलेज जैसे अनेक शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की।
  • एक तर्कवादी: गोपाल गणेश आगरकर लोगों को अंध अंधविश्वासों को दूर करने हेतु प्रेरित करने में तर्क की शक्ति में विश्वास करते थे।
    • वह तर्कसंगतता एवं समानता के आधार पर जीवन जीने में विश्वास करते थे।
    • गोपाल गणेश आगरकर ने नैतिकता को धर्म से पृथक करके देखा।

हिंदी

बाल गंगाधर तिलक के साथ वैचारिक मतभेद                                           

  • जबकि तिलक ने “किसी भी ब्रिटिश हस्तक्षेप का विरोध किया”, जो कि “हिंदू ब्राह्मणवादी परंपरा में उनके गौरव” पर आधारित था, आगरकर “पश्चिमी बौद्धिक परंपरा से प्रभावित” थे तथा उन्हें भारतीय समाज में ब्रिटिश सुधारों से कोई समस्या नहीं थी।
  • आगरकर हिंदू धर्म में रूढ़िवादी प्रथाओं के भी आलोचक थे। दूसरी ओर, तिलक को केसरी में हिंदू धर्म के बारे में आगरकर का कटाक्ष पसंद नहीं आया।
  • ब्रिटिश शासन के तत्वावधान में भारत में महिलाओं की दुर्दशा एवं जाति पदानुक्रम के खतरों को दूर करने  हेतु सामाजिक सुधार लाने की तत्काल आवश्यकता के लिए आगरकर के तर्क के साथ यह वैचारिक अंतर  और गहन होता गया।

 

बिल्ट ऑपरेट ट्रांसफर मॉडल संपादकीय विश्लेषण: सतर्कता का समय जागृति शुभंकर विमोचित एनआईआरएफ रैंकिंग 2022
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समूह: ईरान, बेलारूस नवीनतम एससीओ सदस्य होंगे मरम्मत के अधिकार पर समिति गठित संपादकीय विश्लेषण- प्रारूप विकलांगता नीति में गंभीर चूक मिशन शक्ति: एमडब्ल्यूसीडी ने दिशानिर्देश जारी किए
भारत में रोगाणुरोधी प्रतिरोध: एएमआर टीकों पर डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट भारत में मंकीपॉक्स ई-नाम के तहत प्लेटफॉर्म का प्लेटफॉर्म (पीओपी) साइबर सुरक्षा सहयोग पर बिम्सटेक विशेषज्ञ समूह 

Sharing is caring!