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11वीं कृषि जनगणना प्रारंभ

11वीं कृषि जनगणना- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: शासन, प्रशासन एवं चुनौतियां- विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियां एवं अंतः क्षेप तथा उनकी अभिकल्पना एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न मुद्दे।

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11वीं कृषि जनगणना चर्चा में क्यों है?       

  • हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने देश में 11वीं कृषि जनगणना (2021-22) का शुभारंभ किया।
  • कृषि जनगणना भारत जैसे विशाल  एवं कृषि प्रधान देश में विशेष रूप से किसानों की आय में वृद्धि करके व्यापक लाभ प्रदान करेगी

 

11वीं कृषि जनगणना

  • पृष्ठभूमि: कृषि की वैश्विक जनगणना के एक कार्यक्रम के हिस्से के रूप में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से 1970-71 से कृषि जनगणना का आयोजन प्रत्येक वर्ष किया जाता रहा है।
  • कृषि जनगणना के बारे में: कृषि जनगणना देश में कृषि की संरचनात्मक विशेषताओं के बारे में अपेक्षित आंकड़े (डेटा) एकत्र करने तथा मात्रात्मक जानकारी प्राप्त करने हेतु वृहद स्तर पर एक सांख्यिकीय संचालन है।
  • कृषि जनगणना प्रत्येक 5 वर्ष में की जाती है एवं 11वीं कृषि जनगणना अब कोरोना महामारी के कारण  विलंब के पश्चात की जा रही है।
    • कृषि जनगणना का क्षेत्रीय अध्ययन अगस्त 2022 में प्रारंभ होगा।
  • संचालन प्राधिकरण: कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि मंत्रालय द्वारा कृषि जनगणना का आयोजन किया जाता है।

 

11वीं कृषि जनगणना- प्रमुख विशेषताएं

  • यह प्रथम अवसर है कि कृषि जनगणना के लिए डेटा संग्रह स्मार्टफोन एवं टेबलेट पर किया जाएगा, ताकि डेटा समय पर उपलब्ध हो सके।
  • अधिकांश राज्यों ने अपने भूमि अभिलेखों एवं सर्वेक्षणों को डिजिटल कर दिया है, जिससे कृषि जनगणना के आंकड़ों के संग्रह में और तेजी आएगी।
  • डिजिटल भूमि अभिलेखों के उपयोग तथा डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप के उपयोग से देश में क्रियाशील जोतों का एक डेटाबेस तैयार किया जा सकेगा।

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11वीं कृषि जनगणना- महत्व

  • कृषि जनगणना अपेक्षाकृत सूक्ष्म स्तर पर विभिन्न कृषि मापदंडों से संबंधित सूचना का मुख्य स्रोत है, जैसे-
    • क्रियाशील जोतों की संख्या एवं क्षेत्रफल, उनका आकार,
    • श्रेणीवार वितरण,
    • भूमि उपयोग,
    • काश्तकारी एवं फसल प्रतिरूप, इत्यादि।
  • कृषि जनगणना के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं को निम्नानुसार सारणीबद्ध किया जाता है-
    • विभिन्न आकार वर्ग (सीमांत, लघु, अर्ध-मध्यम, मध्यम एवं वृहद) एवं
    • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति सहित सामाजिक समूह
    • ये विकास योजना, सामाजिक-आर्थिक नीति निर्माण तथा राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की स्थापना के लिए आवश्यक हैं।
  • जनगणना कृषि सांख्यिकी की एक व्यापक एकीकृत राष्ट्रीय प्रणाली के विकास का आधार भी प्रदान करती है एवं राष्ट्रीय सांख्यिकीय प्रणाली के विभिन्न घटकों के साथ संपर्क रखती है।

 

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