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संपादकीय विश्लेषण- वैश्विक संपर्क का एक मार्ग 

वैश्विक कनेक्टिविटी का एक मार्ग- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी– विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण तथा नवीन तकनीक विकसित करना।

संपादकीय विश्लेषण- वैश्विक संपर्क का एक मार्ग _30.1

वैश्विक कनेक्टिविटी का मार्ग चर्चा में क्यों है

  • चूंकि स्थलीय 5जी मोबाइल नेटवर्क संपूर्ण देश में प्रारंभ किए जा रहे हैं, गैर-स्थलीय नेटवर्क को एकीकृत करने में एक नवीकृत रुचि है, प्रथम एक निम्न विलंबता निम्न पृथ्वी कक्षा (लोअर अर्थ ऑर्बिट/LEO) उपग्रह नेटवर्क (SatNets) है, जो स्थलीय नेटवर्क के पूरक के रूप में है।

 

लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क (SatNets)- प्रमुख परियोजनाएं

  • वैश्विक ब्रॉडबैंड संपर्क को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्टारलिंक ने लगभग 1,200 किमी की ऊंचाई पर क्रमशः लगभग 2,500  एवं 648 LEO उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं।
    • स्टारलिंक एलोन मस्क के स्वामित्व वाले स्पेसएक्स द्वारा संचालित है एवं वनवेब, भारती ग्लोबल द्वारा प्रवर्तित है।
  • लक्ज़मबर्ग स्थित एसईएस  एवं अमेज़ॅन के प्रोजेक्ट कुइपर के साथ संयुक्त उद्यम में रिलायंस जियो जैसे अन्य प्रतिभागी भी हैं।

 

लियो सैटनेट्स- प्रमुख उपयोग के मामले

स्थलीय 5G नेटवर्क के साथ लियो सैटनेट्स को एकीकृत करने हेतु मुख्य रूप से मुख्य उपयोग की  तीन वस्तुस्थितियां हैं:

  • सार्वजनिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन एवं आपातकालीन स्थितियों के मामले में स्थलीय नेटवर्क  तथा सैटनेट के  मध्य निर्बाध संक्रमण प्रदान करने हेतु सेवा निरंतरता;
  • विश्व के असेवित  एवं अल्प सेवित क्षेत्रों में 5G सेवाएं प्रदान करने हेतु सेवा सर्वव्यापकता, जिससे डिजिटल  अंतराल को समाप्त करना;
  • सेवा अनुमापनीयता (स्केलेबिलिटी) जो एक वृहद भौगोलिक क्षेत्र में समान सामग्री को बहु प्रसारित (मल्टीकास्ट) करने एवं प्रसारित करने में सैटनेट्स की विशिष्ट क्षमताओं का उपयोग करती है।
  • LEO SatNets न केवल स्थिर बल्कि गतिशील (इन-मोशन) उपयोगकर्ताओं को भी सेवा प्रदान कर सकता है।

 

लियो सैटनेट्स- एकीकरण प्रक्रिया

  • उपग्रहों एवं स्थलीय नेटवर्क को सदैव दो स्वतंत्र पारिस्थितिकी तंत्र माना गया है तथा उनके मानकीकरण के प्रयास एक दूसरे से स्वतंत्र रूप से आगे बढ़े हैं।
  • उपरोक्त लाभों को ध्यान में रखते हुए, मानक-सेटिंग संगठनों जैसे कि तृतीय पीढ़ी साझेदारी परियोजना (थर्ड जनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट/3GPP), जिसमें संपूर्ण विश्व के दूरसंचार एवं उपकरण निर्माता सम्मिलित हैं, ने मानकीकरण प्रक्रिया में सैटनेट्स को एकीकृत करना प्रारंभ कर दिया।
  • स्थलीय नेटवर्क के विस्तार के रूप में, उपग्रहों का प्रथम बार 3GPP विमोचन 14 में 5G के परिनियोजन परिदृश्य में उल्लेख किया गया था।
  • यह उन क्षेत्रों के लिए 5G संचार सेवाएं प्रदान करना था जहां स्थलीय कवरेज उपलब्ध नहीं था और उन सेवाओं का समर्थन करने के लिए भी था जिन्हें उपग्रह प्रणालियों , जैसे कि प्रसारण सेवाएँ और विलंब-सहिष्णु सेवाओं के माध्यम से अधिक कुशलता से पहुँचा जा सकता था।

 

लियो सैटनेट्स- प्रमुख लाभ

  • लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट नेटवर्क (SatNets) न केवल स्थिर बल्कि गतिशील (इन-मोशन) उपयोगकर्ताओं को भी सेवा प्रदान कर सकता है।
  • लंबी दूरी पर LEO उपग्रहों के माध्यम से वायरलेस संचार स्थलीय प्रकाशीय तंतु (ऑप्टिक फाइबर) के माध्यम से समान दूरी पर संचार की तुलना में 1.47 गुना तीव्र सिद्ध होता है।
    • वैश्विक कवरेज के साथ यह यह लाभ है जो स्थलीय ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क के पूरक के लिए लियो सैटनेट्स हेतु एक सुदृढ़ उपयोग की वस्तुस्थिति प्रदान करता है।

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लियो सैटनेट्स- सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  • सरकार ने अपनी राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति 2018 में अनेक क्षेत्रों का संकेत दिया है जिनमें सम्मिलित हैं-
    • उपग्रह संचार प्रणालियों के स्थानीय निर्माण के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र का विकास एवं
    • देश में उपग्रह संचार अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण हेतु निजी कंपनियों की भागीदारी प्रोत्साहित करना।
  • एनएसआईएल की स्थापना: न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL), सार्वजनिक क्षेत्र का एक उद्यम, 2019 में अंतरिक्ष विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में स्थापित किया गया था।
    • यह ‘आपूर्ति संचालित’ प्रतिमान से ‘मांग संचालित’ प्रतिमान हेतु अंतरिक्ष  संबंधित क्रियाकलापों को पुनः उन्मुख करने हेतु स्थापित किया गया था, जिससे अंतरिक्ष परिसंपत्तियों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित हो सके।
  •  इन-स्पेस की स्थापना: अंतरिक्ष विभाग ने 2020 में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र ( इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर/IN-SPACe) नामक एक नए नियामक निकाय की भी स्थापना की। IN-SPACE के निम्नलिखित उद्देश्य हैं-
    • निजी कंपनियों को भारतीय अंतरिक्ष अवसंरचना का उपयोग करने एवं बढ़ावा देने हेतु एक समान अवसर प्रदान करना
    • नीतियों एवं एक अनुकूल नियामक वातावरण को प्रोत्साहित करके अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी उद्योगों का मार्गदर्शन  करना।
  • उपग्रह संचार नीति का प्रस्तावित संशोधन: सरकार ने उपग्रह संचार नीति को संशोधित करने का भी प्रस्ताव रखा।
    • यह LEO SatNets को देश के संचार संबंधी आधारिक संरचना का एक अभिन्न अंग बनने हेतु आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान करेगा।

 

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