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संपादकीय विश्लेषण- 1971 की आत्मा

भारत-बांग्लादेश संबंध: यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: अंतर्राष्ट्रीय संबंध- भारत एवं उसके पड़ोस- संबंध।

संपादकीय विश्लेषण- 1971 की आत्मा -_3.1

भारत-बांग्लादेश संबंध चर्चा में क्यों है

  • बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत की जारी राजकीय यात्रा एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक के परिणामस्वरूप अनेक सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।

 

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत की राजकीय यात्रा – प्रमुख परिणाम

  • बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत की जारी राजकीय यात्रा के सकारात्मक परिणाम एवं सात समझौते हुए हैं।
  • इन सात समझौतों में शामिल हैं-
    • 26 वर्ष उपरांत प्रथम जल बंटवारे समझौते का निष्कर्ष,
    • विशेष रूप से रेलवे क्षेत्र में मुक्त व्यापार समझौता वार्ता एवं आधारिक अवसंरचना परियोजनाओं का शुभारंभ।
    • अंतरिम अवधि में फेनी से 1.82 क्यूसेक पानी की निकासी पर समझौता।

 

जल बंटवारे पर कुशियारा समझौते का महत्व

  • कुशियारा पर जल बंटवारा समझौता जल प्रबंधन को हल करने पर एक विशेष रूप से आशान्वित संकेत है तथा 54 सीमा पार नदियों का एक अत्यंत ही विवादास्पद मुद्दा है।
  • कुशियारा समझौता पहली बार है जब केंद्र 1996 की गंगा जल संधि के पश्चात से समझौते के लिए असम  एवं अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों को बोर्ड में लाने में सक्षम हुआ है।

 

भारत – बांग्लादेश संबंध की पृष्ठभूमि

  • शेख हसीना की यात्रा, जो 2017 में उनकी विगत राजकीय यात्रा एवं 2021 में श्री मोदी की बांग्लादेश यात्रा के पश्चात हुई, ने भारत-बांग्लादेश संबंधों को एक मजबूत आधार पर एवं निश्चित रूप से व्यापार, संपर्क  तथा व्यक्तियों से व्यक्तियों के मध्य घनिष्ठ जुड़ाव के लिए स्थापित किया है।
  • यद्यपि, संबंधों में सकारात्मक प्रवृत्ति 2009 में सुश्री हसीना के सत्ता में आने, आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को बंद करने एवं 20 से अधिक वांछित अपराधियों तथा आतंकी संदिग्धों को भारत को सौंपने के लिए उनके एकपक्षीय प्रयासों तक जाती है।

 

भारत – बांग्लादेश संबंध में संबद्ध चिंताएं

  • तीस्ता समझौते का मुद्दा: 2011 का तीस्ता समझौता, जिसे पश्चिम बंगाल ने रोक दिया था, अब भी दुर्ग्राह्य बना हुआ है, यह बात सुश्री हसीना ने कई बार कही।
    • तीस्ता नदी समझौते के लिए मोदी सरकार द्वारा और अधिक प्रयासों की आवश्यकता होगी एवं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से लोच शीलता की आवश्यकता होगी यदि समझौते को शीघ्र परिणति देनी है।
    • यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री  के पद पर तीन कार्यकाल के पश्चात आगामी वर्ष के अंत में चुनाव आयोजित होने वाले हैं।
  • अल्प भारतीय निवेश: भारतीय उद्योग द्वारा निवेश बांग्लादेश के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट/एफडीआई) प्रवाह का एक छोटा सा अंश है।
  • रोहिंग्या मुद्दा: सत्ताधारी दल के नेताओं ने इस पर अनेक निष्ठाहीन टिप्पणी की-
    • रोहिंग्या शरणार्थियों को निर्वासित करना,
    • अनिर्दिष्ट प्रवासियों की तुलना “दीमक” से करना एवं नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, तथा
    • “अखंड भारत” के लिए बांग्लादेश को जोड़ने के लिए हालिया संदर्भ।

 

निष्कर्ष

  • जबकि दक्षिण एशिया में सीमा पार की संवेदनशीलता प्रायः इस तरह की राजनीतिक बयानबाजी से अधिक तीव्र होती है, यह आवश्यक है कि नई दिल्ली एवं ढाका अपने भविष्य के लिए आपसी सहयोग पर केंद्रित रहें, जो उनकी पिछली साझेदारी पर स्थापित हो एवं जिसे “1971 की आत्मा” कहा जाता है।

 

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