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संपादकीय विश्लेषण- विदेश में छात्रों के लिए सुरक्षा व्यवस्था 

विदेश में छात्रों के लिए सुरक्षा व्यवस्था- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: अंतर्राष्ट्रीय भारत एवं भारतीय प्रवासियों के हितों पर विकसित एवं विकासशील देशों की नीतियों  तथा राजनीति का प्रभाव।

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विदेश में छात्रों के लिए एक सुरक्षा व्यवस्था- संदर्भ

  • जारी कोविड -19 महामारी  तथा रूस यूक्रेन युद्ध ने हमें विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा  एवं कल्याण के बारे में सोचने के लिए सचेत किया है।
  • यूक्रेन में दो भारतीय छात्रों की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु (एक की गोलाबारी में मृत्यु हो गई, दूसरे को स्ट्रोक लगा) भी हमें यह सुनिश्चित करने हेतु आगाह करता है कि विदेशों में भारतीय छात्र सुरक्षित एवं कुशल हैं।

 

भारतीय नागरिकों का महत्व

  • महामारी की आरंभ से पूर्व, 7,50,000 से अधिक भारतीय छात्र विदेशों में अध्ययन कर रहे थे, विदेशी अर्थव्यवस्थाओं में 24 बिलियन डॉलर खर्च कर रहे थे, जो कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1% है।
    • 2024 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 1.8 मिलियन होने की संभावना है, जब हमारे छात्र भारत के बाहर लगभग 80 बिलियन डॉलर खर्च करेंगे।
  • पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने विदेशों में भारतीयों को “ब्रांड एंबेसडर” के रूप में संदर्भित किया था।
    • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ब्रिटेन (यूके) में भारतीयों को दोनों देशों के  मध्य ” लिविंग ब्रिज” (जीवंत सेतु) कहा है।
  • विदेशों में भारतीय छात्र सॉफ्ट पावर, ज्ञान हस्तांतरण तथा  भारत को  पुनः प्राप्त होने वाले प्रेषण के मामले में व्यापक लाभ  प्रदान करते हैं।
  • भारत चीन के बाद अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है तथा इस  प्रवृत्ति के जारी रहने की  संभावना है।

 

विदेशों में भारतीय छात्रों के लिए चिंता  

  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अभाव: भारत की आधी से अधिक आबादी 25 वर्ष से कम आयु की है एवं विश्व के शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों में कोई भारतीय विश्वविद्यालय नहीं है, यह स्वाभाविक है कि इच्छुक छात्र विदेश में अध्ययन करना चाहेंगे।
  • विदेशों में भारतीय छात्रों के भविष्य को खतरे में डालना: लगभग 2,000 छात्र जिनके कॉलेज अचानक बंद हो गए हैं, विरोध कर रहे हैं।
    • ब्रिटेन में कुछ वर्ष पूर्व सैकड़ों ‘फर्जी’ कॉलेज बंद कर दिए गए थे, जिसका हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था।
    • महामारी के दौरान, ऑस्ट्रेलिया ने अपने विश्वविद्यालयों में अध्ययन करने हेतु नामांकित हजारों भारतीय छात्रों के लिए अपनी सीमाएं बंद कर दी थीं।

 

विदेशों में भारतीय छात्रों के कल्याण को सुरक्षित करना

  • विदेशों में उनकी रक्षा करना: भारत सरकार को यह सुनिश्चित करके विदेशों में भारतीय लोगों की सुरक्षा को अधिदेशित करना चाहिए कि मेजबान देश इसकी जिम्मेदारी लें।
    • भारतीय छात्र विदेशों में उच्च शिक्षा के उपभोक्ता हैं तथा वे जिन देशों में रहते हैं वहां के मेहमान हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए अंतर्राष्ट्रीय समझौता: संकट एवं आकस्मिकताओं के समय में भारतीय छात्रों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए मेजबान देशों को बाध्य करने वाले अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को सर्वोपरि महत्व दिया जाना चाहिए।
  • अनिवार्य छात्र बीमा योजना: इसे अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों में सम्मिलित किया जाना चाहिए ताकि उन छात्रों के हितों को सुरक्षित किया जा सके जो मेजबान देश में भी काफी  मात्रा में धन व्यय करते हैं।
    • उदाहरण के लिए, उच्च शिक्षा ब्रिटेन के लिए सर्वाधिक मजबूत निर्यातों में से एक रही है, जिससे £28.8 बिलियन का राजस्व सृजित होता है।

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विदेश में भारतीय छात्रों का कल्याण सुनिश्चित करना- निष्कर्ष

  • बेहतर प्रदर्शन एवं भविष्य को सुरक्षित करने की आकांक्षा उन्हें कठिनाइयों के प्रति प्रवृत्त कर सकती है, जिसे इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था से दूर किया जा सकता है।
  • जब विदेशों में भारतीयों की उपलब्धियों का हम उत्सव मनाते हैं, तो उनके कल्याण की रक्षा करने  का उत्तरदायित्व हमारा है।

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