Home   »   Russia Ukraine Conflict   »   Russia Ukraine War

संपादकीय विश्लेषण- रूस की नाटो समस्या

रूस की नाटो समस्या- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: अंतर्राष्ट्रीय संबंध- भारत के हितों पर विकसित एवं विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव।

यूपीएससी एवं राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए  निशुल्क अध्ययन सामग्री प्राप्त करें

रूस की नाटो समस्या- संदर्भ

  • अपनी साझी सीमा पर हफ़्तों की सैन्य टुकड़ियों की संख्या में वृद्धि के पश्चात यूक्रेन में रूस की अनुचित घुसपैठ ने इस क्षेत्र में तनाव में अत्यधिक वृद्धि कर दी है।
  • रूस यूक्रेन युद्ध का संपूर्ण विश्व में व्यापक प्रभाव हो सकता है, विशेष रूप से नाटो देशों  एवं अन्य देशों के लिए जिनके इन दोनों के साथ रणनीतिक संबंध हैं।

मिन्स्क समझौते तथा रूस-यूक्रेन संघर्ष

रूस की नाटो समस्या- नवीनतम विकास

  • रिपोर्ट्स में कहा गया है कि गुरुवार सुबह राजधानी कीव समेत यूक्रेन के कई शहरों पर हमले हुए।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन एवं नाटो तथा यूरोपीय आयोग के नेतृत्व ने रूस पर “गंभीर प्रतिबंध” लगाने  का प्रण लिया।
    • प्रतिबंधों का यह दौर रूसी संस्थाओं एवं राजनीतिक नेतृत्व के करीबी व्यक्तियों पर आरोपित किए गए पूर्व आर्थिक शास्तियों को आवरित कर देगा।
    • उनसे वित्तीय प्रणाली से शीर्ष रूसी बैंकों से संपर्क समाप्त करने, प्रौद्योगिकी निर्यात को रोकने एवं सीधे रूसी राष्ट्रपति को लक्षित करने में सम्मिलित होने की संभावना है।

हिंदी

रूस की नाटो समस्या- संघर्ष से बचने के प्रयास

  • राजनयिक प्रयास: जब से रूस ने यूक्रेनी सीमा पर सैनिकों को एकत्रित करना प्रारंभ किया है, यू.एस., नाटो तथा यूरोप ने राजनयिक समाधान के लिए दबाव बनाने की मांग की है।
    • इसमें अमेरिका-रूस प्रत्यक्ष वार्ता एवं श्री पुतिन के साथ फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों की बैठक सम्मिलित है।
  • UNSC की बैठक: यूक्रेन पर रूसी आक्रमण को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक आपात बैठक आयोजित की।

रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भारत का रुख

रूस की नाटो समस्या- रूसी चिंता

  • यूक्रेन का नाटो स्वप्न: यूक्रेन द्वारा नाटो का हिस्सा बनने की संभावना थी। इसने रूस को निराश किया क्योंकि उसने पश्चिमी शक्तियों को इसके आंगन में प्रवेश करा दिया होता।
    • उनके डर का केंद्र यूक्रेन के नाटो  तथा नाटो सैन्य बलों में सम्मिलित होने की संभावना है जो रूस के साथ सीमा पर संभावित रूप से तैनात हैं।
  • संस्थापक अधिनियमके प्रति अवहेलना: पूर्व सोवियत संघ के विघटन के पश्चात, पूर्वी यूरोपीय सैन्य गठबंधन, नाटो एवं रूस ने 1997 में आपसी संबंधों, सहयोग तथा सुरक्षा पर “संस्थापक अधिनियम” (फाउंडिंग एक्ट) पर हस्ताक्षर किए।
    • इस समझौते की भावना की अवहेलना करते हुए, नाटो ने 1990 के दशक के दौरान शांतिपूर्ण रुप से विस्तार के पांच दौर पूरे किए, जिससे इसने पूर्व सोवियत संघ के देशों को अपनी कक्षा में खींच लिया।

संपादकीय विश्लेषण- रूसी मान्यता

रूस की नाटो समस्या-निष्कर्ष

  • जब तक पश्चिमी राष्ट्र श्री पुतिन को यह आश्वासन नहीं देते कि नाटो पूर्व की ओर अपने पदचिह्नों का निरंतर विस्तार करने का प्रयत्न नहीं करेगा, मास्को के पास बातचीत की मेज पर लौटने हेतु अत्यंत कम प्रोत्साहन होगा।
    • किंतु रूस एवं श्री पुतिन को यह समझना चाहिए कि युद्ध शांति तथा सुरक्षा का साधन नहीं है।

 

prime_image
About the Author

I am an SEO Executive with over 4 years of experience in Marketing and now Edtech Agency. I am specializes in optimizing websites to improve search engine rankings and increase organic traffic. I am up to date with the latest SEO trends to deliver results-driven strategies. In my free time, I enjoys exploring new technologies and reading about the latest digital marketing techniques.

QR Code
Scan Me