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ओलिव रिडले टर्टल: ओलिव रिडले टर्टल का जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जेडएसआई) द्वारा टैगिंग 

ओलिव रिडले टर्टल- यूपीएससी परीक्षा हेतु प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 3: पर्यावरण- संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण।

ओलिव रिडले टर्टल: ओलिव रिडले टर्टल का जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जेडएसआई) द्वारा टैगिंग _40.1

ओलिव रिडले कछुए- प्रसंग

  • हाल ही में, वैज्ञानिकों ने ओडिशा तट के साथ रुशिकुल्या रूकरी में ओलिव रिडले कछुओं की टैगिंग पुनः प्रारंभ कर दी है।

 

ओलिव रिडले कछुए- ओलिव रिडले कछुओं की टैगिंग एवं लाभ

  • ओलिव रिडले कछुआ परियोजना: भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के शोधकर्ता तीन सामूहिक नीडन स्थलों – गहिरमाथा, देवी नदी के मुहाने एवं रुशिकुल्या पर ओलिव रिडले की टैगिंग कर रहे हैं।
    • ओलिव रिडले कछुआ टैगिंग अभ्यास लगभग 25 वर्षों की अवधि के पश्चात जनवरी 2021 में ओडिशा में प्रारंभ किया गया था एवं 1,556 कछुओं को टैग किया गया था।
  • संबद्ध लाभ:
    • ओलिव रिडले समुद्री कछुओं की टैगिंग से प्रवास पथ एवं उन स्थानों की पहचान करने में सहायता प्राप्त होगी, जहां ओलिव रिडले कछुओं का एकत्रीकरण एवं नीडन स्थलों के निर्माण के पश्चात दौरा किया जाता है।
    • इसके अतिरिक्त, वर्तमान अध्ययन के दौरान ओलिव रिडले समुद्री कछुओं की वृद्धि को मापा जा सकता है।
    • अध्ययन से ओडिशा में ओलिव रिडले कछुओं के अंतर-आश्रय गतिविधि का भी पता चलेगा।
    • ओडिशा के ओलिव रिडले कछुओं के अन्य देशों में प्रवास के पैटर्न को विस्तार से अभिलेखित किया जाएगा।

 

ओलिव रिडले कछुए- प्रमुख बिंदु

  • ओलिव रिडले कछुओं के बारे में: ओलिव रिडले समुद्री कछुओं का नाम उनके जैतून के रंग के पृष्ठवर्म से लिया गया है। ओलिव रिडले समुद्री कछुए विश्व में पाए जाने वाले सभी समुद्री कछुओं में सबसे छोटे एवं सबसे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
    • भोजन व्यवहार: ओलिव रिडले समुद्री कछुए मांसाहारी होते हैं।
  • पर्यावास:
    • विश्व स्तर पर: ओलिव रिडले कछुए प्रशांत, अटलांटिक एवं हिंद महासागरों के उष्ण समुद्रों में पाए जाते हैं।
    • भारत में: ओडिशा तट ओलिव रिडले कछुओं के प्रजनन के लिए विख्यात है। ओडिशा का गहिरमाथा समुद्री अभ्यारण्य ओलिव रिडले कछुओं के प्रजनन का  विश्व की सर्वाधिक वृहद बस्ती है।
  • अरीबाडा (नीडन स्थल/मास नेस्टिंग): ओडिशा में ओलिव रिडले कछुए के नीडन स्थलों को अरीबाडा के नाम से भी जाना जाता है, जहां हजारों मादाएं अंडे देने के लिए एक ही समुद्र तट पर एक साथ आती हैं।
    • ओलिव रिडले कछुए प्रत्येक वर्ष ओडिशा तट पर, अर्थात तीन नदी मुहानों- धमारा, देवी एवं रुशिकुल्या पर सामूहिक नीडन स्थलों के निर्माण के लिए लाखों की संख्या में आते हैं।

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ओलिव रिडले कछुए– संरक्षण की स्थिति

  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: ओलिव रिडले कछुए को डब्ल्यूएलपी अधिनियम की अनुसूची 1 के तहत सूचीबद्ध किया गया है।
  • आईयूसीएन रेड लिस्ट: ओलिव रिडले समुद्री कछुओं को आईयूसीएन की रेड बुक सूची में ‘वल्नरेबल’ श्रेणी में रखा गया है।
  • सीआईटीईएस: ओलिव रिडले कछुए को वन्य जीवों एवं वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों (सीआईटीईएस) में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय के ‘परिशिष्ट I’ के तहत सूचीबद्ध किया गया है।
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