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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) – भारत में अपराध 2020 रिपोर्ट

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) – यूपीएससी परीक्षा हेतु प्रासंगिकता

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भारत में एनसीआरबी अपराध 2020 रिपोर्ट- संदर्भ

  • हाल ही में जारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के अनुसार, गैर-महामारी वर्ष 2019 की तुलना में 2020 में देश में कुल अपराध संख्या में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • हालांकि, इस वृद्धि के लिए मुख्य रूप से कोविड-19 निर्देशों के उल्लंघनों के लिए दर्ज अपराधों को जिम्मेदार ठहराया गया है क्योंकि अन्य अपराधों में 2019 की तुलना में 2020 में वास्तव में कमी आई है।
    • गृह मंत्रालय के अनुसार, कोविड रोकथाम पर केंद्र के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध आईपीसी की धारा 188 एवं आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाना था।

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भारत में एनसीआरबी अपराध 2020 रिपोर्ट- प्रमुख निष्कर्ष  

  • समग्र अपराध के मामलों के पंजीकरण में वृद्धि: भारत में कुल अपराध पंजीकरण में 2019 (51,56,158 मामले) की तुलना में 14,45,127 (28%) मामलों में वृद्धि हुई ।
    • एनसीआरबी की रिपोर्ट में 66,01,285 संज्ञेय अपराध दर्ज किए गए जिनमें 42,54,356 भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) अपराध एवं 23,46,929 विशेष तथा स्थानीय कानूनों के अंतर्गत व्याख्यायित अपराध शामिल हैं।
  • अपराध दर में वृद्धि: अपराध दर (प्रति एक लाख जनसंख्या पर दर्ज मामलों की संख्या) 2019 के 5 से बढ़कर 2020 में 487.8 हो गई।
  • जाति आधारित अपराधों में वृद्धि:
    • अनुसूचित जातियों के विरुद्ध अपराध:4% की वृद्धि देखी गई।
    • अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध अपराध: 2019 की तुलना में 3% की वृद्धि देखी गई।
  • महिलाओं के विरुद्ध अपराध में कमी: महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामलों में 30% की गिरावट आई है।
    • अधिकांश मामले “पति अथवा उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता” (30.0%) से संबंधित थे, इसके बाद “महिलाओं का शील भंग करने के उद्देश्य से हमला” (23.0%), “महिलाओं का व्यपहरण एवं अपहरण” (16.8%) तथा “बलात्कार” (7.5%) से संबंधित थे।
    • महिलाओं के विरुद्ध अपराध दर: 2019 में 3 की तुलना में 2020 में प्रति लाख महिला आबादी पर दर्ज अपराध दर 56.5 है।
  • किशोरों द्वारा अपराधों में गिरावट: 2020 के दौरान किशोरों के विरुद्ध कुल 29,768 मामले दर्ज किए गए,  जो 8% की कमी दिखाता है।
  • हत्या में 1 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई जबकि “हिंसक अपराध” की श्रेणी में अपराधों में 5 प्रतिशत की कमी आई।
  • आरोप पत्र (चार्जशीट) दायर करने की बढ़ी दर: लगभग 12 लाख मामलों में आरोप पत्र दाखिल की गई, जिसके परिणामस्वरूप आरोप पत्र की दर 75.8% रही, जो 2019 की तुलना में 12.50% अधिक है।
    • आईपीसी अपराधों के अंतर्गत अत्यधिक आरोप-पत्र दाखिल करने वाले राज्य गुजरात (1%), केरल (94.9%)  एवं तमिलनाडु (91.7%) थे।
  • कोविड-19 के कारण लॉकडाउन प्रभाव: विगत वर्ष भारत में कोविड-19 के कारण हुए लॉकडाउन के कारण महिलाओं, बच्चों एवं वरिष्ठ नागरिकों के विरुद्ध अपराध, चोरी, सेंधमारी,  लूटपाट एवं डकैती के मामलों में कमी आई है।
  • कुल पंजीकृत आर्थिक अपराधों में गिरावट: 12% की कमी प्रदर्शित कर रहा है।
    • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत पूर्व के 4,244 मामलों में से वर्तमान में 3,100 मामलों के साथ 27% की गिरावट दर्ज की गई ।
    • साइबर अपराधों में वृद्धि: 50,035 मामलों के साथ, साइबर अपराधों में 80% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • मानव दुर्व्यापार के मामलों में गिरावट: 2,208 से घटकर 1,714 मामले हो गए।
    • लापता व्यक्तियों की संख्या में 15% की कमी आई। 2019 की तुलना में 2020 में लापता बच्चों में 80% की गिरावट दर्ज की गई।
  • पर्यावरण संबंधी अपराधों में वृद्धि: वर्ष 2020 में 2019 की तुलना में पर्यावरण संबंधी अपराधों में 1 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी)- प्रमुख बिंदु

  • यह भारतीय दंड संहिता (आईपीसी)एवं विशेष और स्थानीय कानूनों (एसएलएल) द्वारा परिभाषित आपराधिक आंकड़े एकत्र करने एवं विश्लेषण करने हेतु 1986 में स्थापित एक सरकारी अभिकरण है।
    • मुख्यालय: नई दिल्ली, भारत
  • मूल मंत्रालय: यह गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन कार्य करता है।
  • एनसीआरबी के प्रमुख कार्य: एनसीआरबी के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-
    • पुलिस के लिए आईटी अनुप्रयोगों के विकास का निर्माण, नेतृत्व एवं समन्वय करना।
    • राष्ट्रीय स्तर पर अपराध एवं अपराधियों पर सूचना एकत्रित करना एवं आंकड़े अनुरक्षित रखना।
    • विधि (कानून) प्रवर्तन एजेंसियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर डेटाबेस का निर्माण तथा अनुरक्षण।
    • अपराध अभिलेख ब्यूरो के कर्मियों को प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के   क्रियाकलापों का समन्वय, मार्गदर्शन एवं सहायता करना।
    • विदेशी अपराधियों के एफपी रिकॉर्ड सहित दोषी व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट (एफपी) रिकॉर्ड के राष्ट्रीय भंडार के रूप में कार्य करना।
    • केंद्र एवं राज्य सरकारों को किसी भी मामले से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड तथा निष्कर्षों (उपलब्धियों) से अद्यतन रखना।
    • भारत में सभी अपराधियों के उंगलियों के निशान का एक राष्ट्रीय डेटाबेस अनुरक्षित रखना।

मूल अधिकारों की सूची

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