Table of Contents
प्राकृतिक कृषि सम्मेलन- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता
- जीएस पेपर 2: शासन, प्रशासन एवं चुनौतियां- विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार की नीतियां एवंअंतः क्षेप तथा उनकी अभिकल्पना एवं कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
समाचारों में प्राकृतिक कृषि सम्मेलन
- हाल ही में, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्राकृतिक कृषि सम्मेलन को संबोधित किया।
- उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि सम्मेलन 2022 इस बात का संकेत है कि अमृत काल के लक्ष्यों को प्राप्त करने के देश के संकल्प में गुजरात किस प्रकार से अग्रणी है।
- उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि का “सूरत मॉडल” संपूर्ण देश के लिए एक आदर्श (मॉडल) बन सकता है।
- आजादी का अमृत महोत्सव के एक भाग के रूप में, प्रधानमंत्री ने मार्च, 2022 में गुजरात पंचायत महासम्मेलन में अपने संबोधन में प्रत्येक गांव में कम से कम 75 किसानों को कृषि के प्राकृतिक तरीके को अपनाने हेतु प्रोत्साहित किया था।
प्राकृतिक कृषि सम्मेलन
- प्राकृतिक कृषि सम्मेलन के बारे में: भारत में प्राकृतिक कृषि एवं इसके लाभों को प्रोत्साहित करने हेतु सूरत, गुजरात द्वारा प्राकृतिक कृषि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।
- भागीदारी: प्राकृतिक कृषि सम्मेलन में हजारों किसानों एवं अन्य सभी हितधारकों की भागीदारी देखी जा रही है, जिन्होंने सूरत में प्राकृतिक कृषि का अपनाया जाना एक सफलता की कहानी बना दिया है।
- इस सम्मेलन में गुजरात के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने भी भाग लिया।
- प्राकृतिक कृषि का सूरत मॉडल:
- सूरत में, प्राकृतिक कृषि के अंतर्गत आने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत से 75 किसानों का चयन करने हेतु ग्राम समितियों, तालुका समितियों एवं जिला समितियों का गठन किया गया था।
- इसके परिणामस्वरूप 550 से अधिक पंचायतों के 40,000 से अधिक किसानों ने कम समय में प्राकृतिक कृषि को अपनाया है।
- अन्य मॉडल: गंगा नदी के दोनों तटों पर पांच किलोमीटर का प्राकृतिक कृषि गलियारा विकसित किया जा रहा है।
- ऐसे गलियारों को तापी एवं नर्मदा नदियों के तट पर भी विकसित किया जा सकता है।
Bihar Plant Protection Supervisor & Inspector 2026 Complete Batch | Online Live Classes by Adda 247Rs 3,079.78Enroll Now
Agriculture Mahapack Plus | For All Agriculture Competitive Exams | Graduation to Research Level By Adda 247Rs 9,349.78Enroll Now
MPSC Combine Free PYQ Discussion Batch - 2024 | Online Live Classes by Adda 247Rs 823Enroll Now
प्राकृतिक कृषि क्या है?
- प्राकृतिक कृषि के बारे में: प्राकृतिक कृषि एक रसायन मुक्त पारंपरिक कृषि पद्धति है। प्राकृतिक कृषि को एक कृषि पारिस्थितिकी आधारित विविध कृषि प्रणाली के रूप में माना जाता है जो कार्यात्मक जैव विविधता के साथ फसलों, वृक्षों एवं पशुधन को एकीकृत करती है।
- भारत में प्राकृतिक कृषि पद्धति: मोटे तौर पर अनुमान है कि भारत में लगभग 25 लाख किसान पूर्व काल से ही पुनर्योजी कृषि (प्राकृतिक कृषि) कर रहे हैं।
- आगामी 5 वर्षों में, इसके 20 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने की संभावना है- प्राकृतिक कृषि सहित किसी भी रूप में जैविक कृषि, जिसमें से 12 लाख हेक्टेयर भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति कार्यक्रम (बीपीकेपी) के तहत हैं।
भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति कार्यक्रम (बीपीकेपी)
- भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति कार्यक्रम (बीपीकेपी) के बारे में: भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति कार्यक्रम (बीपीकेपी) केंद्र प्रायोजित योजना- परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) के अंतर्गत प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहन देने की एक योजना है।
- मुख्य उद्देश्य: बीपीकेपी का उद्देश्य पारंपरिक स्वदेशी पद्धतियों को प्रोत्साहन देना है जो बाहरी रूप से खरीदे गए आगत को कम करता है। यह काफी हद तक निम्नलिखित पर आधारित है-
- बायोमास मल्चिंग पर प्रमुख दबाव के साथ खेतों पर (ऑन-फार्म) बायोमास पुनर्चक्रण,
- खेत में गाय के गोबर-मूत्र योगों का प्रयोग;
- आवधिक मृदा वातन एवं
- समस्त कृत्रिम रासायनिक आदानों का बहिष्करण।
- महत्व: प्राकृतिक कृषि से क्रय किए गए आदानों पर निर्भरता कम होने की संभावना है एवं छोटे किसानों को ऋण के बोझ से राहत प्रदान करने में सहायता मिलेगी।
- प्राकृतिक कृषि को रोजगार में वृद्धि करने के बाद ग्रामीण विकास के अवसर के साथ एक लागत प्रभावी कृषि पद्धति के रूप में माना जाता है






TSPSC Group 1 Question Paper 2024, Downl...
TSPSC Group 1 Answer key 2024 Out, Downl...
UPSC Prelims 2024 Question Paper, Downlo...
