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भारत-अफ्रीका रक्षा सहयोग

भारत-अफ्रीका रक्षा सहयोग: चर्चा में क्यों है?

  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 से 20 सितंबर 2022 तक मिस्र का दौरा किया तथा इस यात्रा ने रक्षा सहयोग के नए द्वार खोले हैं।
  • रक्षा मंत्री ने प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास एवं रक्षा उत्पादन सहित विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के मध्य रक्षा सहयोग में वृद्धि करने हेतु अपने समकक्ष जनरल मोहम्मद जकी के साथ एक समझौता ज्ञापन (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग/एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
  • यह समझौता ज्ञापन हाल के वर्षों में भारत एवं विभिन्न अफ्रीकी देशों के मध्य हस्ताक्षरित रक्षा क्षेत्र में समझौतों की सूची में एक नया प्रवेश है।
  • यह यात्रा अफ्रीकी क्षेत्र के साथ भारत के बढ़ते रक्षा संबंधों का प्रतीक है।

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भारत-अफ्रीका रक्षा सहयोग: ऐतिहासिक संबंध

  • मिस्र के साथ भारत के संबंध प्राचीन काल से जुड़े हुए हैं। नील नदी घाटी एवं सिंधु-सरस्वती घाटी सभ्यता के  मध्य संबंध अच्छी तरह से अभिलिखित है।
  • सदियों पुराने इस ऐतिहासिक, सांस्कृतिक  एवं आर्थिक बंधन ने दोनों देशों के मध्य एक मजबूत राजनीतिक  तथा रक्षा साझेदारी को बढ़ावा दिया है।
  • 2015 के भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के दौरान मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी की भारत यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा सकता है।
  • हाल ही में, मिस्र ने 2022 में भारत के साथ राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक डाक टिकट जारी किया।
  • मिस्र बहुपक्षीय क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण भागीदार है। यह हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन/IORA)  तथा शंघाई सहयोग संगठन (शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन/SCO) में एक संवाद भागीदार है, यह 2021 में ब्रिक्स (BRICS) बैंक का सदस्य बना एवं एक अतिथि देश होगा क्योंकि भारत अगले साल जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

 

भारत-अफ्रीका रक्षा सहयोग: भारत एवं मिस्र के मध्य रक्षा सहयोग

  • दोनों देशों के मध्य रक्षा सहयोग 1960 के दशक से जारी है।
  • प्रशिक्षण इस संबंध का एक महत्वपूर्ण घटक रहा है। 1960 और 70 के दशक में भारत द्वारा मिस्र के वायु सेना के पायलटों का प्रशिक्षण विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
  • 1960 के दशक में, दोनों देश प्रसिद्ध हेलवान HA-300 जेट लड़ाकू विमान के निर्माण के लिए एक संयुक्त उद्यम में भी सम्मिलित थे।
  • रक्षा सहयोग के लिए प्रेरण 2006 में औपचारिक संयुक्त रक्षा समिति (जॉइंट डिफेंस कमेटी/जेडीसी) की स्थापना के साथ आया था। जेडीसी को रक्षा सहयोग के क्षेत्रों के अभिनिर्धारण का कार्य सौंपा गया था। तब से यह समिति नौ बार मिल चुकी है।

 

भारत-अफ्रीका रक्षा सहयोग: कोविड उपरांत सहयोग

  • हाल ही में, कोविड-19 महामारी में कमी के पश्चात, रक्षा के क्षेत्र में द्विपक्षीय कार्यकलापों में वृद्धि हुई है।
  • प्रथम बार भारतीय वायु सेना-मिस्र की वायुसेना का संयुक्त सामरिक वायु अभ्यास, ‘डेजर्ट वॉरियर’, अक्टूबर 2021 के अंत में आयोजित किया गया था।
  • इसने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा भारत में निर्मित सुखोई -30 एमकेआई एवं पुर्जों तथा घटकों के गहन स्वदेशीकरण के लिए भारत की विशेषज्ञता को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया।
  • वायुसेना प्रमुख के स्तर पर यात्राओं का आदान-प्रदान हुआ है। भारत के एयर चीफ मार्शल वी.आर. चौधरी ने 2021 में काहिरा का दौरा किया, उसके बाद मिस्र के वायुसेना प्रमुख महमूद फोआद अब्द अल-गवाद  ने इस वर्ष के आरंभ में नई दिल्ली की यात्रा की।
  • इसी तरह, भारतीय नौसेना के जहाजों की मिस्र की अनेक यात्राएं हुई हैं।
  • जून 2022 में, भारतीय नौसेना के सबसे बड़े विध्वंसक आईएनएस कोच्चि ने मिस्र में पोर्ट सफागा का दौरा किया।
  • आईएनएस कोच्चि ने मिस्र की नौसेना के साथ समुद्री साझेदारी अभ्यास में भी भाग लिया।

 

भारत-अफ्रीका रक्षा सहयोग: सामान्य सुरक्षा चुनौतियां

  • अफ्रीका के साथ रक्षा सहयोग में वृद्धि करने की भारत की इच्छा मुख्य रूप से आतंकवाद, जलदस्युता एवं मादक पदार्थों की तस्करी जैसी सामान्य सुरक्षा चुनौतियों से प्रेरित है।
  • विगत दो दशकों में महाद्वीप के आर्थिक परिवर्तन तथा अफ्रीका के साथ भारत के बढ़ते आर्थिक एवं विकास सहयोग जैसे सकारात्मक विकास भी एक महत्वपूर्ण कारक हैं।
  • भारत ने सागर (सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन/क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास)  एवं ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (समस्त विश्व एक परिवार है) के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित अफ्रीका के साथ रक्षा सहयोग का एक सहकारी ढांचा विकसित किया है।

 

भारत-अफ्रीका रक्षा सहयोग: भारत के लिए अवसर की एक खिड़की

  • हाल के वर्षों में, चीन ने अफ्रीकी देशों के साथ सुरक्षा मुद्दों पर अपनी गतिविधियों में तेजी लाई है। इसने जुलाई 2022 में चीन-अफ्रीका शांति एवं सुरक्षा मंच के द्वितीय मंत्रिस्तरीय बैठक की मेजबानी की।
  • नवंबर 2021 में डकार, सेनेगल में अंतिम FOCAC बैठक में अनावरण की गई कार्य योजना ने अफ्रीकी देशों एवं चीन के मध्य बढ़ते सुरक्षा सहयोग पर प्रकाश डाला।
  • साथ ही, अफ्रीका में इस बात का बोध बढ़ रहा है कि बीजिंग की भागीदारी की शर्तें वांछनीय से कम हैं। इससे भारत को इस क्षेत्र के साथ अपने सहयोग में वृद्धि करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

 

भारत-अफ्रीका रक्षा सहयोग: भारत-अफ्रीका रक्षा संवाद (IADD) क्या है?

  • भारत अफ्रीका रक्षा संवाद को लगातार डेफ एक्सपो के दौरान द्विवार्षिक रूप से आयोजित करने के लिए संस्थागत रूप प्रदान किया गया था।
  • प्रथम भारत-अफ्रीका रक्षा वार्ता फरवरी 2020 में डेफ एक्सपो 2020 के अवसर पर आयोजित की गई थी। भारत ने अब डेफ एक्सपो के साथ-साथ प्रत्येक दो वर्ष में होने वाले संवाद को संस्थागत रूप प्रदान किया है।
  • यह अफ्रीकी देशों  एवं भारत के  मध्य मौजूदा रक्षा साझेदारी का निर्माण करने तथा क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा  एवं आतंकवाद विरोधी क्षेत्रों सहित आपसी जुड़ाव के लिए अभिसरण के नए क्षेत्रों का पता लगाने का प्रयास करता है।
  • भारत-अफ्रीका रक्षा वार्ता (IADD) 18 अक्टूबर, 2022 को गुजरात के गांधीनगर में डेफ एक्सपो 2022 के  अवसर पर आयोजित की गई थी।
  • संवाद ने भारत अफ्रीका रक्षा संवाद के विषय ‘रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग में सामंजस्य स्थापित करने तथा मजबूत करने के लिए रणनीति अपनाना’ के विभिन्न पहलुओं को सफलतापूर्वक सामने लाया।

 

भारत अफ्रीका रक्षा संवाद 2022

    • 18 से 22 अक्टूबर 2022 तक गुजरात के गांधीनगर में 12वें  डेफ एक्सपो के एक भाग के रूप में आयोजित किया गया।
    • 20 रक्षा मंत्रियों, सात सीडीएस/सेना प्रमुखों  एवं आठ स्थायी सचिवों सहित पचास अफ्रीकी देशों ने रक्षा एवं सुरक्षा में भारत-अफ्रीका जुड़ाव को उच्च प्राथमिकता देने के लिए संवाद में भाग लिया।
    • डेफएक्सपो 2022 के एक हिस्से के रूप में आईएडीडी ने अफ्रीकी देशों को घरेलू रक्षा उद्योग की बढ़ती क्षमता का प्रदर्शन किया, जो कि प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ को प्राप्त करने के देश के संकल्प के प्रमुख संचालकों में से एक है।
    • इस अंतः क्रिया से हमारे अफ्रीकी भागीदारों की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता प्राप्त होने की संभावना है तथा साथ ही हमारी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य को प्राप्त करने में भी सहायता प्राप्त होगी।

 

भारत-अफ्रीका रक्षा सहयोग: निष्कर्ष

यह आशा की जाती है कि भारत-अफ्रीका का बढ़ता पारस्परिक व्यवहार भारत-अफ्रीका रक्षा सहयोग को मजबूत  करेगा जो प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, मानवीय सहायता  एवं आपदा राहत के माध्यम से अफ्रीकी देशों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।

 

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