Home   »   Small Savings Instruments   »   Small Savings Instruments

संपादकीय विश्लेषण- एन अनकाइंड हाइक

लघु बचत लिखतों में वृद्धि

भारत में बचत के लिए लघु बचत साधन महत्वपूर्ण साधन हैं। यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (भारतीय अर्थव्यवस्था)  एवं यूपीएससी  मुख्य परीक्षा (जीएस पेपर 3- भारतीय अर्थव्यवस्था- योजना,  संसाधनों का अभिनियोजन, वृद्धि, विकास  एवं रोजगार से संबंधित मुद्दे) के लिए लघु बचत साधन महत्वपूर्ण हैं।

संपादकीय विश्लेषण- एन अनकाइंड हाइक_3.1

लघु बचत साधन चर्चा में क्यों है?

  • हाल ही में, सरकार ने चालू अक्टूबर से दिसंबर तिमाही के लिए कुछ छोटे बचत साधनों पर प्रतिलाभ (रिटर्न) में 0.1 से 0.3 प्रतिशत अंक की वृद्धि की है।
  • यद्यपि, मध्यम वर्ग के लिए लोकप्रिय निवेश के मार्ग जैसे सार्वजनिक भविष्य निधि (पब्लिक प्रोविडेंट फंड/पीपीएफ) तथा राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र को सम्मिलित नहीं किया गया था।

 

लघु बचत लिखतों के साथ मुद्दे

  • बाजार दृढ़ता का अभाव: कागज पर, इन उपकरणों पर प्रतिफल को बाजार-निर्धारित आधार पर, तुलनीय परिपक्वता के साथ सरकारी प्रतिभूतियों पर प्रतिफल पर 0 से 100 आधार अंक (एक आधार बिंदु 0.01% के बराबर) के प्रसार के साथ पुनः समायोजित (रीसेट) किया जाना है।
    • दर परिवर्तनों के मध्य लंबे विराम को देखते हुए, यह एक सरसरी  दृष्टि में भी स्पष्ट है, इसका पालन नहीं किया गया है।
  • प्रतिभूतियों की प्रतिफल में वृद्धि: मुद्रास्फीति पर नियंत्रण स्थापित करने हेतु इस वर्ष ब्याज दरों में वृद्धि के पश्चात, सरकारी प्रतिभूतियों की प्रतिफल में वृद्धि हो रही है।
  • कम ब्याज दर: इस महीने, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कहा कि चालू तिमाही में विभिन्न योजनाओं पर दी जाने वाली ब्याज दरें फॉर्मूला-अंतर्निहित दरों से 44 से 77 आधार अंक कम हैं।
    • उदाहरण के तौर पर पीपीएफ को इस तिमाही में 7.1 प्रतिशत के स्थान पर 7.72 प्रतिशत की कमाई होनी चाहिए थी।
  • बढ़ती मुद्रास्फीति के विरुद्ध अपर्याप्त उपाय: जनवरी से 6% से अधिक मुद्रास्फीति से जूझ रहे परिवारों के लिए, कुछ महीनों में 7% से अधिक मूल्य वृद्धि के कारण, ये मामूली बढ़ोतरी भावना को ऊपर उठाने के लिए पर्याप्त नहीं है।
    • 27 माह में इन योजनाओं की दरों में – अप्रैल 2020 में आरंभ की गई योजनाओं में 0.5 एवं 1.4 प्रतिशत अंकों की भारी कटौती के बाद यह प्रथम परिवर्तन था।
  • राजनीतिक रूप से प्रेरित: पिछली बार दरों में बढ़ोतरी लोकसभा के निर्वाचन से ठीक पूर्व जनवरी 2019 में की गई थी। मार्च 2021 में, सरकार ने 0.4% से 1.1% तक की और कटौती की घोषणा की थी, किंतु पांच राज्यों के लिए एक चुनाव अभियान के मध्य एक ‘जिम्मेदारी’ का हवाला देते हुए, रातों रात निर्णय वापस ले लिया।
    • यद्यपि, आगामी चुनावों में मतदाताओं के लिए एक सांकेतिक संकेत के रूप में भी, लघु बचत दरों में यह नवीनतम परिवर्तन कटौती नहीं करता है।

 

निष्कर्ष

  • जैसा कि भारतीय रिजर्व बैंक के शीर्ष अधिकारियों ने पूर्व में ही चेतावनी दी थी, नकारात्मक प्रतिफल का अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर परिणाम होता है, यदि  परिवार, जो कि सबसे बड़े ऋणदाता हैं, ऐसे निश्चित आय साधनों एवं बैंकों में अपनी बचत को रोकना बंद कर देते हैं।
  • अगली तिमाही में घरेलू बचत पर मुद्रास्फीति की क्षति को निष्प्रभावी करने हेतु प्रतिफलों का एक उचित  एवं स्वस्थ पुनः समायोजन पर विचार करना चाहिए।

 

कृषि एवं वानिकी पर 7वीं आसियान-भारत मंत्रिस्तरीय बैठक  ताम्र पाषाण युग (ताम्र युग एवं कांस्य युग) भारत में प्रागैतिहासिक युग- प्रागैतिहासिक काल के प्रस्तर अथवा पाषाण युग का वर्गीकरण स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में मिशन लाइफ (LiFE) विमोचित किया गया
स्वेरिग्स रिक्सबैंक पुरस्कार 2022: बैंक बेलआउट रिसर्च को क्यों प्राप्त हुआ? काशी-तमिल संगमम संपादकीय विश्लेषण: हाउ टू डील विद चाइनाज ब्लॉकिंग एट द यूएन? विज्ञान एवं अभियांत्रिकी अनुसंधान में महिलाओं की भागीदारी (WISER) कार्यक्रम
भारत में प्रागैतिहासिक युग-पाषाण युग यूपीएससी प्रीलिम्स बिट्स: 20 अक्टूबर, 2022 14वीं वर्ल्ड स्पाइस कांग्रेस (WSC) मुंबई में आयोजित की जाएगी संपादकीय विश्लेषण- ए न्यू लीज ऑफ लाइफ फॉर क्लाइमेट एक्शन

Sharing is caring!

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *