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केंद्र ने 4 नई जनजातियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में जोड़ा 

केंद्र ने 4 नई जनजातियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में जोड़ा- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • सामान्य अध्ययन II- भारतीय संविधान – ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएं, संशोधन, महत्वपूर्ण प्रावधान एवं आधारिक संरचना।

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चर्चा में क्यों है

  • प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु एवं छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातियों (शेड्यूल्ड ट्राइब्स/एसटी) की सूची में चार जनजातियों को जोड़ने को अपनी स्वीकृति प्रदान की है।
  1. हिमाचल प्रदेश में सिरमौर जिले के ट्रांस-गिरि क्षेत्र में हट्टी जनजाति,
  2. तमिलनाडु की नारिकोरावन एवं कुरिविक्करन पहाड़ी जनजाति तथा
  3. छत्तीसगढ़ में बिंझिया जनजाति, जिसे झारखंड एवं ओडिशा में अनुसूचित जनजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया था किंतु छत्तीसगढ़ में नहीं
  • कैबिनेट ने कर्नाटक में कडु कुरुबा जनजाति के पर्याय के रूप में ‘बेट्टा-कुरुबा’ को भी अपनी स्वीकृति प्रदान की है।

 

अनुसूचित जनजाति कौन हैं?

  • ‘अनुसूचित जनजाति’ शब्द प्रथम बार भारत के संविधान में प्रदर्शित हुआ।
  • अनुच्छेद 366 (25) ने अनुसूचित जनजातियों को “ऐसी जनजातियों या जनजातीय समुदायों अथवा ऐसी जनजातियों या जनजातीय समुदायों के कुछ हिस्सों या समूहों के रूप में परिभाषित किया है जिन्हें इस संविधान के प्रयोजनों के लिए अनुच्छेद 342 के तहत अनुसूचित जनजाति माना जाता है”।
  • अनुच्छेद 342 अनुसूचित जनजातियों के विनिर्देशन के मामले में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया निर्धारित करता है।
  • जनजातीय समूहों में से अनेक ने आधुनिक जीवन को अपना लिया है  किंतु ऐसे जनजातीय (आदिवासी) समूह भी हैं जो अधिक संवेदनशील हैं।
  • ढेबर आयोग (1973) ने एक पृथक श्रेणी “आदिम जनजातीय समूह (प्रिमिटिव ट्राइबल ग्रुप्स/पीटीजी)” का निर्माण किया, जिसका नाम परिवर्तित कर 2006 में “विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह (पार्टिकुलरली वल्नरेबल ट्राइबल ग्रुप्स/पीवीटीजी)” कर दिया गया।

 

जनजातियों को किस प्रकार अधिसूचित किया जाता है?

  • किसी विशेष राज्य / केंद्र शासित प्रदेश के संबंध में अनुसूचित जनजातियों का प्रथम विनिर्देश संबंधित राज्य सरकारों के परामर्श के पश्चात राष्ट्रपति के एक अधिसूचित आदेश द्वारा होता है।
  • इन आदेशों को बाद में केवल संसद के एक अधिनियम के माध्यम से संशोधित किया जा सकता है।

भारत में जनजातियों की स्थिति

  • 2011 की जनगणना से ज्ञात होता है कि अनुसूचित जनजाति (एसटी) के रूप में अधिसूचित 705 नृजातीय समूह हैं।
  • 10 करोड़ से अधिक भारतीय जनजातियों के रूप में अधिसूचित हैं, जिनमें से 1.04 करोड़ शहरी क्षेत्रों में  निवास करते हैं।
  • अनुसूचित जनजाति कुल जनसंख्या का 8.6% एवं ग्रामीण जनसंख्या का 11.3% है।

 

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