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भारत में शराब कानून- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता
- सामान्य अध्ययन II- स्वास्थ्य, मानव संसाधन, सरकारी नीतियां एवं अंतः क्षेप।
भारत में शराब कानून: संदर्भ
- दिल्ली की सर्वाधिक महत्वाकांक्षी शराब नीति 2021-22, जो उपभोक्ताओं के लिए बड़ी छूट लेकर आई थी, नीति के प्रारूपण एवं कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार कथा अनियमितताओं के आरोपों के बीच रद्द कर दी गई थी।
- नवीन नीति को समाप्त करने के पश्चात, दिल्ली सरकार ने ‘पुरानी आबकारी व्यवस्था’ को वापस लाने का निर्णय लिया जो पूर्व से लागू थी।
भारत में शराब कानून: एक पृष्ठभूमि
- भारत में शराब पीने की कानूनी उम्र एवं शराब के विक्रय तथा उपभोग को नियंत्रित करने वाले कानून अलग-अलग राज्यों में काफी भिन्न हैं।
- भारत में, बिहार, गुजरात, नागालैंड एवं मिजोरम राज्यों में शराब का सेवन प्रतिबंधित है।
- मणिपुर के कुछ जिलों में शराब पर आंशिक प्रतिबंध है।
- अन्य सभी भारतीय राज्य शराब के सेवन की अनुमति प्रदान करते हैं किंतु शराब पीने की कानूनी उम्र निर्धारित करते हैं, जो प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग-अलग आयु होती है।
- कुछ राज्यों में विभिन्न प्रकार के मादक पेय के लिए शराब पीने की कानूनी आयु भिन्न हो सकती है।
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विनियमन
- शराब भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अंतर्गत राज्य सूची का एक विषय है।
- अतः, शराब को नियंत्रित करने वाले कानून अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होते हैं।
- भारत में शराब आमतौर पर शराब की दुकानों, रेस्तरां, होटल, बार, पब, क्लब एवं डिस्को में बेची जाती है किंतु ऑनलाइन नहीं।
- कुछ राज्य, जैसे केरल एवं तमिलनाडु, निजी पक्षों को शराब की दुकानों के स्वामित्व भारत होने से रोकते हैं, जिससे राज्य सरकार उन राज्यों में शराब की एकमात्र खुदरा विक्रेता बन जाती है।
- कुछ राज्यों में, किराने का सामान, डिपार्टमेंटल स्टोर, बैंक्वेट हॉल एवं/या फार्म हाउस में शराब बेची जा सकती है।
- कुछ पर्यटन क्षेत्रों में समुद्र तटों एवं हाउसबोटों पर शराब की बिक्री की अनुमति देने वाले विशेष कानून हैं।
शुष्क दिवस (ड्राई डेज)
- शुष्क दिवस वे विशिष्ट दिन होते हैं जब शराब के विक्रय की अनुमति नहीं होती है।
- अधिकांश भारतीय राज्य इन दिनों को गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) एवं गांधी जयंती (2 अक्टूबर) जैसे प्रमुख राष्ट्रीय त्योहारों / अवसरों पर मनाते हैं।
- भारत में चुनावों के दौरान भी शुष्क दिवस मनाया जाता है।
शराब पर कराधान
- अधिकांश राज्य या तो मूल्य वर्धित कर (वैल्यू एडेड टैक्स/वैट) या उत्पाद शुल्क अथवा दोनों लगाते हैं। .
- उत्पाद शुल्क एक उत्पाद के उपभोग को हतोत्साहित करने हेतु आरोपित किया जाने वाला कर है।
- इसकी गणना प्रति इकाई के आधार पर की जाती है। अर्थात, यदि आप 1 लीटर शराब का क्रय करते हैं, तो आप 15 रुपये का एक निश्चित उत्पाद शुल्क का भुगतान करते हैं।
- उत्पाद के अनुपात में मूल्य वर्धित कर लगाया जाता है। यदि एक बोतल की कीमत 100 रुपये है एवं राज्य 10 प्रतिशत वैट लगाता है, तो कीमत बढ़कर 110 रुपये हो जाती है।
विभिन्न राज्यों में कर की दरें
- भारत में 29 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश शराब पर अलग-अलग तरीके से कर आरोपित करते हैं।
- उदाहरण के लिए, गुजरात ने 1961 से अपने नागरिकों के शराब के सेवन पर प्रतिबंध लगा दिया है।
- किंतु विशेष लाइसेंस धारक बाहरी लोग अभी भी शराब खरीद सकते हैं।
- दूसरी ओर, पुडुचेरी को अपना अधिकांश राजस्व शराब के व्यापार से प्राप्त होता है।
- बिहार ने शराब के सेवन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है, अर्थात शराब के सेवन से राज्य का राजस्व शून्य है।
- इसका पड़ोसी उत्तर प्रदेश शराब पर सर्वाधिक उत्पाद शुल्क अर्जित करता है।
- राज्य वैट नहीं बल्कि शराब पर एक विशेष शुल्क आरोपित करता है, विशेष उद्देश्यों के लिए धन एकत्र करता है।






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