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चौथा भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद 2022 | भारत-फ्रांस संबंध

भारत-फ्रांस रक्षा संवाद 2022: यूपीएससी के लिए प्रासंगिकता

भारत-फ्रांस संबंध 2022: भारत-फ्रांस रक्षा संवाद 2022 एक वार्षिक अभ्यास है जो भारत-फ्रांस संबंधों की महत्वपूर्ण गतिशीलता है। भारत-फ्रांस रक्षा संवाद 2022 यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2023 एवं यूपीएससी मुख्य परीक्षा (अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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भारत-फ्रांस रक्षा संवाद 2022 चर्चा में क्यों है

  • हाल ही में, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में फ्रांसीसी गणराज्य के सशस्त्र बलों के मंत्री श्री सेबेस्टियन लेकोर्नू के साथ चौथी भारत-फ्रांस वार्षिक रक्षा वार्ता आयोजित की।
  • भारत-फ्रांस रक्षा संवाद 2022 में द्विपक्षीय, क्षेत्रीय, रक्षा एवं सुरक्षा औद्योगिक सहयोग के मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला पर चर्चा की गई।
  • फ्रांस भारत के सर्वाधिक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदारों में से एक है एवं दोनों देश 2023 में अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूर्ण होने का जश्न मनाने के लिए उत्सुक हैं।

 

भारत-फ्रांस रक्षा संवाद 2022 के प्रमुख निष्कर्ष

  • भारतीय एवं फ्रांसीसी मंत्रियों ने जारी सैन्य-से-सैन्य सहयोग की समीक्षा की, जिसमें हाल के वर्षों में अत्यधिक वृद्धि हुई है।
  • उन्होंने समुद्री सहयोग को और सुदृढ़ करने तथा द्विपक्षीय अभ्यासों के दायरे एवं जटिलता को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
  • उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि भारत एवं फ्रांस ने हाल ही में वायुसेना स्टेशन, जोधपुर में अपने द्विपक्षीय वायु अभ्यास ‘गरुड़’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया।
  • संवाद के दौरान, चर्चा के प्रमुख क्षेत्रों में से एक ‘मेक इन इंडिया’ पर ध्यान देने के साथ रक्षा औद्योगिक सहयोग था।
    • भविष्य के सहयोग एवं संभावित सह-उत्पादन के अवसरों पर चर्चा की गई।
  • मंत्रियों ने सहमति व्यक्त की कि दोनों देशों के तकनीकी समूहों को अगले साल की शुरुआत में मिलना चाहिए तथा सहयोग के प्रमुख मुद्दों को आगे बढ़ाना चाहिए।
  • मंत्रियों ने कई रणनीतिक एवं रक्षा मुद्दों पर अपने अभिसरण को मान्यता दी एवं भारत-प्रशांत क्षेत्र पर ध्यान देने के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग में वृद्धि करने हेतु मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता साझा की।
    • फ्रांस हिंद महासागर आयोग (इंडियन ओशन कमीशन/IOC) एवं हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी ( इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम/IONS) का वर्तमान अध्यक्ष है तथा दोनों देश इन मंचों पर निकटता से सहयोग करते हैं।

 

भारत-फ्रांस संबंधों के प्रमुख आयाम 

रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग

  • रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, अंतरिक्ष सहयोग तथा असैन्य परमाणु सहयोग के क्षेत्र दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख स्तंभ हैं।
  • विगत कुछ वर्षों में फ्रांस के साथ भारत के रक्षा सहयोग में वृद्धि हुई है, फ्रांस भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता (रूस के बाद) बन गया है।
  • भारत एवं फ्रांस सहयोग के नए क्षेत्रों जैसे हिंद प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद का मुकाबला, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा एवं सतत विकास तथा अन्य क्षेत्रों में उत्तरोत्तर जुड़े हुए हैं।
  • दोनों देश विभिन्न क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी काफी हद तक अभिसरण साझा करते हैं।
  • अरब सागर में दोनों देशों के मध्य पांच दिवसीय नौसैनिक युद्धाभ्यासवरुणका हाल ही में आयोजित 20 वां संस्करण उनके समुद्री सुरक्षा सहयोग में बढ़ती अनुरूपता का प्रतिबिंब है।

यूएनएससी सदस्यता का मुद्दा

  • फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता एवं संयुक्त राष्ट्र के सुधारों के लिए भारत के दावे का समर्थन करना जारी रखा है।
  • मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR), वासेनार अरेंजमेंट (WA) एवं ऑस्ट्रेलिया ग्रुप (AG) में भारत के प्रवेश में फ्रांस का समर्थन महत्वपूर्ण था।
  • फ़्रांस परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप/एनएसजी) में सम्मिलित होने के भारत के प्रयास का समर्थन करना जारी रखे हुए है।
  • भारत एवं फ्रांस ने लगातार आतंकवाद की निंदा की है तथा संयुक्त राष्ट्र में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (कंप्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म/सीसीआईटी) को अंगीकृत करने हेतु मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया है।

भारत में फ्रांसीसी व्यवसाय

  • दोनों देशों के फ्रांसीसी व्यवसायों एवं उद्योग के साथ बढ़ते आर्थिक संबंध हैं, जो भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
  • भारत में रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी गलियारों, आईटीईएस, परामर्श, अभियांत्रिकी सेवाओं, भारी उद्योग, स्मार्ट-शहरों, रेलवे, पूंजी एवं व्यापार आदान-प्रदान, कौशल विकास इत्यादि जैसे विविध क्षेत्रों में 1000 से अधिक फ्रांसीसी व्यवसाय हैं।
  • अप्रैल 2000 से मार्च 2021 तक 9.83 बिलियन अमरीकी डालर के संचयी  विदेशी प्रत्यक्ष निवेश भंडार (एफडीआई स्टॉक) के साथ फ्रांस भारत में 11वां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है, जो भारत में कुल एफडीआई प्रवाह के 2% का प्रतिनिधित्व करता है।
  • फ्रांस में उप-सहायक कंपनियों सहित 150 से अधिक भारतीय कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें 7 7,000 से अधिक व्यक्ति कार्यरत हैं।

भारत में मौजूद अनेक स्थापित फ्रांसीसी कंपनियां

  • लगभग सभी प्रमुख फ्रांसीसी कंपनियां भारत में मौजूद हैं जिनमें रेनॉल्ट, सेंट गोबेन, वेओलिया, मिशेलिन, कैपजेमिनी, सनोफी, ईडीएफ, एयरबस, लैक्टालिस, सोडेक्सो, टोटल एवं अन्य शामिल हैं।
  • भारत की रिलायंस, टाटा, महिंद्रा, एलएंडटी एवं अन्य बड़ी कंपनियों ने रक्षा तथा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में प्रमुख फ्रांसीसी कंपनियों जैसे डसॉल्ट, सफ्रान, थेल्स, श्नाइडर इलेक्ट्रिक एवं अन्य के साथ संयुक्त सहयोग किया है।
  • फ्रांसीसी आधारिक अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) कंपनियां स्मार्ट शहरों एवं नवीकरणीय ऊर्जा सहित भारतीय परियोजनाओं में बड़े अवसरों की प्रतीक्षा कर रही हैं।

फ्रांस अनेक विकासात्मक परियोजनाओं में एक प्रमुख भागीदार है

  • फ्रांस विभिन्न भारतीय कार्यक्रमों, विशेष रूप से तीन स्मार्ट शहरों, जैसे चंडीगढ़, नागपुर और पुडुचेरी के साथ सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है।
  • एसएनसीएफ- फ्रांसीसी रेलवे एवं 8 भारतीय रेलवे ने एक स्थायी भारत-फ्रांसीसी रेलवे फोरम की स्थापना की है।
  • वे दिल्ली-चंडीगढ़ खंड के सेमी-हाई स्पीड उन्नयन की व्यवहार्यता एवं अंबाला तथा लुधियाना के स्टेशन विकास अध्ययन में सहयोग कर रहे हैं।

फ्रांस में भारतीय प्रवासी 

  • फ्रांस में भारतीय प्रवासियों की संख्या लगभग 5,00,000 होने का अनुमान है, जिसमें फ्रांसीसी विदेशी क्षेत्रों में स्थित अधिकांश फ्रांसीसी नागरिक हैं।
  • अतः, जीवंत द्विपक्षीय सांस्कृतिक एवं शैक्षिक संबंध भी मौजूद हैं एवं लोगों से लोगों के मध्य संपर्क भी बढ़ रहा है।
  • भारतीय प्रवासियों की महानगरीय फ्रांस एवं इसके विदेशी प्रदेशों/क्षेत्रों में भी अच्छी खासी उपस्थिति है।
  • लगभग 109,000 भारतीय नागरिक फ़्रांस की मुख्य भूमि में निवास करते हैं, जिनमें से अधिकांश पुडुचेरी, कराईकल, यानम, माहे और चंद्रनागोर के पूर्व फ्रांसीसी उपनिवेशों से उत्पन्न हुए हैं।
  • रीयूनियन द्वीप (300,000), गुआदेलूप (60,000) एवं मार्टीनिक (6,000) के फ्रांसीसी प्रवासी क्षेत्रों में भारतीय मूल की आबादी का एक बड़ा हिस्सा निवास करता है।
  • मुख्य भूमि फ़्रांस में पढ़ने एवं कार्य करने वाले छात्रों (लगभग 10,000) तथा पेशेवरों की संख्या भी बढ़ रही है।

 

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