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2021-22 असामान्य रूप से ठंडा एवं वृष्टि बहुल शीतकालीन वर्ष है

भारत में शीत ऋतु 2021-22: प्रासंगिकता

  • जीएस 1: महत्वपूर्ण भू भौतिकीय घटनाएं जैसे भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी गतिविधि, चक्रवात इत्यादि

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भारत में  शीत ऋतु 2021-22:संदर्भ

  • वर्ष 2021-22 उत्तर भारत में अनेक व्यक्तियों के लिए असामान्य रूप से ठंडा एवं लंबा प्रतीत हो रहा है। दिन, विशेष रूप से, विगत वर्षों की तुलना में अधिक ठंडे तथा द्रुतशीतक रहे हैं।

 

भारत में सर्द मौसम

  • दिसंबर 2021 के बाद से, उत्तर भारत, उत्तर पश्चिम भारत तथा मध्य भारत में अधिकतम तापमान औसत सामान्य तापमान से नीचे रहा है, जिससे “सर्द दिन” की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
    • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) एक दिन को सर्द दिन के रूप में परिभाषित करता है जब अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है
  • इस जनवरी में, दिल्ली में सर्द दिनों की संख्या 9 थी। इससे पूर्व, 2013 सबसे सर्द जनवरी था, जब इस क्षेत्र में कुल 19 सर्द दिन थे। इसके अतिरिक्त, 2015 में 11 ठंडे दिन देखे गए, जबकि 2010,1013 एवं 2004 में सभी ने 9 सर्द दिन देखे।
  • इस वर्ष, न केवल दिल्ली में, बल्कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं कोंकण जैसे क्षेत्रों में भी सर्द दिन महसूस किए गए।

 

भारत में ठंडी शीत ऋतु 2021-22: कारण:

  • पश्चिमी विक्षोभ: 26 जनवरी तक सात पश्चिमी विक्षोभ भारत के ऊपर से गुजर चुके हैं। इससे उत्तरी महाराष्ट्र में ओलावृष्टि हुई है एवं तमिलनाडु में बारिश हुई है।
  • ला नीना: बार-बार एवं अधिक संख्या में पश्चिमी विक्षोभ ला नीना से संबंधित हैं। वर्तमान में, मध्यम तीव्रता वाले ला नीना की स्थिति बनी हुई है।
  • सुदूर उत्तर से ठंडी पवनें: एक पश्चिमी विक्षोभ के भारत के ऊपर से गुजरने के पश्चात, सुदूर उत्तर से ठंडी पवनें निम्न अक्षांशों में प्रवेश करती हैं एवं यहाँ तक कि तेलंगाना तथा महाराष्ट्र तक भी पहुँच सकती हैं, जिससे सर्द मौसम एवं कभी-कभी शीतलहर की स्थिति बन जाती है।
  • आर्द्रता: निम्नस्थ बादलों की उपस्थिति एवं भारत-गंगा के मैदानी इलाकों में आर्द्रता की उपलब्धता ने भी इस क्षेत्र में इसे सर्द दिनों की स्थिति के लिए अनुकूल बना दिया है।

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भारत में शीत ऋतु 2021-22: कृषि पर प्रभाव

  • किसान कवकों (फंगस) के हमले तथा कम उपज की शिकायत करते रहे हैं।
  • कोहरे के कारण नासिक (महाराष्ट्र) में अंगूरों में किसानों को कम उपज तथा कवकों के हमलों का सामना करना पड़ रहा है।
  • मध्य प्रदेश में चना एवं राजस्थान में सरसों, फसल के मौसम में कभी-कभार होने वाली वर्षा के कारण भी प्रभावित हुआ है।

 

 

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