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अमेरिका भारत के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल हुआ 

अमेरिका भारत के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल हुआ- यूपीएससी परीक्षा हेतु प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: अंतर्राष्ट्रीय संबंध- द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह तथा भारत से जुड़े एवं / या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते।
  • जीएस पेपर 3: पर्यावरण- संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण एवं क्षरण

 

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अमेरिका भारत के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल हुआ- संदर्भ

  • हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका भारत के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) में सम्मिलित होने वाला 101 वां सदस्य देश बन गया है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में संयुक्त राज्य अमेरिका का समावेश सौर-नेतृत्व वाले दृष्टिकोण के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा संक्रमण को उत्प्रेरित करेगा।

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भारत के नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल हुआ अमेरिका- प्रमुख महत्व

  • अमेरिका की भागीदारी से वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा की अधिक तीव्रता से परिनियोजन में सहायता प्राप्त होगी एवं यह विकासशील देशों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा।
  • यह आईएसए को सुदृढ़ करेगा एवं विश्व को ऊर्जा का एक स्वच्छ स्रोत प्रदान करने पर भविष्य की कार्रवाई को बढ़ावा देगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होने के लिए अन्य राष्ट्रों को प्रोत्साहित करना: जैसा कि यह दर्शाता है कि दुनिया भर के देश सौर ऊर्जा के आर्थिक एवं जलवायु शमन वाले मूल्य को मान्यता प्रदान कर रहे हैं।
    • इसके अतिरिक्त, यह वैश्विक ऊर्जा संक्रमण के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में ऊर्जा स्रोत की क्षमता को मान्यता प्रदान करता है।

भारत अमेरिका सामरिक स्वच्छ ऊर्जा भागीदारी (एससीईपी)

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन- प्रमुख बिंदु

  • पृष्ठभूमि: अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की कल्पना सौर-संसाधन संपन्न देशों (जो पूर्ण रूप से अथवाआंशिक रूप से कर्क रेखा एवं मकर रेखा के मध्य स्थित हैं) के गठबंधन के रूप में की गई थी ताकि उनकी विशेष ऊर्जा  आवश्यकताओं को पूर्ण किया जा सके।
  • स्थापना: अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की स्थापना भारत एवं फ्रांस ने पेरिस में 2015 के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के दौरान की थी।
    • मुख्यालय: गुरुग्राम, भारत।
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के बारे में: आईएसए एक अंतर सरकारी संधि-आधारित संगठन है। इसकी कल्पना एक क्रिया-उन्मुख, सदस्य-संचालित, सहयोगी मंच के रूप में की गई है-
    • ऊर्जा सुरक्षा एवं सतत विकास के परिवर्धन हेतु सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के अधिक परिनियोजन हेतु, एवं
    • विकासशील सदस्य देशों में ऊर्जा अधिगम में सुधार करने हेतु।

भारत फ्रांस सामरिक समझौता

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन- प्रमुख रुचि और उद्देश्य

  • सौर ऊर्जा अनुप्रयोगों को उनकी आवश्यकता ओके अनुरूप बढ़ाने हेतु प्रमुख आम चुनौतियों का सामूहिक रूप से समाधान करना;
  • 2030 तक 1000 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक का निवेश जुटाना;
  • सौर वित्त, सौर प्रौद्योगिकियों, नवाचार, अनुसंधान एवं विकास, क्षमता निर्माण इत्यादि को प्रोत्साहन प्रदान करने हेतु बेहतर सामंजस्य, मांग, जोखिम एवं संसाधनों के एकत्रीकरण के उद्देश्य से स्वैच्छिक आधार पर प्रारंभ किए गए कार्यक्रमों एवं गतिविधियों के माध्यम से समन्वित कार्रवाई करना;
  • नवीन वित्तीय तंत्रों को बढ़ावा देकर एवं संस्थानों से वित्त अभिनियोजित कर सदस्य देशों में सौर ऊर्जा में निवेश में वृद्धि करने हेतु वित्त की लागत को कम करना;
  • सदस्य देशों में सौर प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोगों को बढ़ाना एवं सदस्य देशों के मध्य सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में सहयोगी अनुसंधान तथा विकास (आर एंड डी) गतिविधियों को सुगम बनाना।
  • सदस्य देशों के मध्य नेटवर्किंग, सहयोग एवं विचारों के आदान-प्रदान हेतु एक साझा साइबर प्लेटफॉर्म को   प्रोत्साहन प्रदान करना।

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