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संपादकीय विश्लेषण: जीएसटी के 5 वर्षों का जायजा लेना

जीएसटी के 5 वर्षों का जायजा लेना यूपीएससी: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं नियोजन, संसाधनों का अभिनियोजन,  वृद्धि, विकास एवं रोजगार से संबंधित मुद्दे।

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जीएसटी समाचार: प्रसंग 

  • हाल ही में, वस्तु एवं सेवा कर (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स/जीएसटी) ने  अपने अस्तित्व के पांच वर्ष पूरे कर लिए हैं। जीएसटी के पांच वर्ष पूर्ण होने पर यह पूछना समझ में आता है कि महंगाई का क्या हुआ।

 

भारत में मुद्रास्फीति

  • जीएसटी लागू होने से पूर्व के 12 महीनों के दौरान, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स/सीपीआई) मुद्रास्फीति 3.66% थी, जबकि आगामी 12 महीनों में यह बढ़कर 4.24% हो गई।
  • यद्यपि, उच्च मुद्रास्फीति  का अनुभव करने वाला भारत अकेला नहीं है। इसी तरह का पैटर्न ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड एवं कनाडा में देखा गया।

 

मुद्रास्फीति पर जीएसटी का प्रभाव

  • सिद्धांत रूप में, जीएसटी को लागू करने से समग्र मुद्रास्फीति में परिवर्तन नहीं होना चाहिए।
  • राजस्व-तटस्थ दर (रेवेन्यू न्यूट्रल रेट/आरएनआर) की गणना की जाती है ताकि इससे उच्च मुद्रास्फीति न हो। किंतु राजस्व तटस्थता का अर्थ यह नहीं है कि अर्थव्यवस्था में कीमतें ऊपर या नीचे नहीं जाएंगी।
  • 2017 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में, आरबीआई ने यह प्रदर्शित किया कि वस्तुओं के लगभग आधे समूह जिन्हें जीएसटी कवर करता है, वे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) बास्केट में नहीं हैं। अतः, कीमतों पर जीएसटी का प्रभाव कम होने की संभावना थी।

 

जीएसटी प्रेरित मुद्रास्फीति

  • अध्ययन अवधि में वास्तविक सीपीआई वृद्धि 4.61% है, जबकि मुद्रास्फीति का प्रतितथ्यात्मक अनुमान 3.24% है। इसका तात्पर्य यह है कि जीएसटी लागू न होने पर सीपीआई मुद्रास्फीति 3.24% होती।
  • जीएसटी लागू होने  के पश्चात की अवधि में सीपीआई कोर मुद्रास्फीति में 1.04 पीपी की वृद्धि हुई (वास्तविक मुद्रास्फीति 4.57% थी, प्रतितथ्यात्मक मुद्रास्फीति 3.53% थी)।
  • जीएसटी का पान, तंबाकू एवं मादक पदार्थों, कपड़े एवं जूते, आवास तथा विविध क्षेत्रों (मुख्य रूप से सेवाओं से युक्त) जैसे कमोडिटी समूहों की मुद्रास्फीति पर महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव पाया गया है।
  • गैर-छूट वाले खाद्य तथा पेय पदार्थों के मामले में, जीएसटी के क्रियान्वयन का मूल्य स्तरों पर 4.42% का नकारात्मक प्रभाव पाया गया है।

 

जीएसटी के पश्चात मुद्रास्फीति में वृद्धि 

  • जीएसटी के क्रियान्वयन के पश्चात मुद्रास्फीति में वृद्धि कुछ वस्तुओं एवं सेवाओं की कर दर में वृद्धि, व्यावसायिक गतिविधियों को सम्मिलित करने, जिन पर पूर्व में कर नहीं लगाया गया था अथवा बाजार संरचना के कारण हो सकता है।
  • इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाने एवं दंडात्मक रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म से बचने के लिए अनेक कंपनियां टैक्स के दायरे में आ गई हैं।
  • बाजार की शक्ति का लाभ उठाते हुए, यह संभव है कि अधिकांश व्यावसायिक कंपनियों ने अंतिम उपभोक्ताओं पर करों के बोझ को को हस्तांतरित किया होगा, जिसके परिणामस्वरूप जीएसटी का लागत-मुद्रास्फीतिकारी प्रभाव होगा।

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निष्कर्ष

  • वस्तु एवं सेवा कर के क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति में कमी आई है  एवं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, पान, तंबाकू तथा मादक पदार्थों, कपड़े एवं जूते, आवास, विविध तथा गैर-छूट वाले खाद्य एवं पेय जैसे गैर-खाद्य पदार्थों की मुद्रास्फीति में वृद्धि हुई है।

 

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