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संपादकीय विश्लेषण- ए ट्रिस्ट विद द पास्ट

ए ट्रिस्ट विद द पास्ट- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 1: भारतीय इतिहास- अठारहवीं शताब्दी के मध्य से लेकर वर्तमान तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्वपूर्ण घटनाएं, व्यक्तित्व, मुद्दे।

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ए ट्रिस्ट विद द पास्ट चर्चा में क्यों है

  • हाल ही में, भारत ने अपनी स्वतंत्रता के 76वें वर्ष का उत्सव मनाया। पचहत्तर वर्ष पूर्व आज ही के दिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले से  प्रथम प्रधानमंत्री का संबोधन किया था। भाषण की कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं-

आज हम जिस उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं, वह एक कदम है, अवसर का एक प्रारंभ, व्यापक विजय एवं उपलब्धियों के लिए जो हमारी प्रतीक्षा कर रहे हैं। क्या हम इतने वीर एवं बुद्धिमान हैं कि इस अवसर को समझ सकें तथा भविष्य की चुनौतियों को स्वीकार कर सकें?” 

  • इस संदर्भ में, हम भारत के लिए इन पचहत्तर वर्षों में विभिन्न उपलब्धियों और छूटे हुए अवसरों पर चर्चा करेंगे।

 

ए ट्रिस्ट विद द पास्ट- उपलब्धियां एवं छूटे हुए अवसर

  • उपलब्धियां: महत्वपूर्ण उपलब्धियां जो प्राप्त हुई हैं –
    • अधिकारों की गारंटी देने वाली एक संवैधानिक योजना जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म तथा एक धर्मनिरपेक्ष राज्य सम्मिलित है,
    • आवधिक चुनावों में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का कार्यान्वयन,
    • एक समृद्धशाली विधायिका,
    • शक्तियों के औपचारिक पृथक्करण की अनुमति प्रदान करने वाले प्रतिष्ठान,
    • राज्यों का एक अर्ध-संघीय संघ जिसे भाषाई आधार पर पुनर्गठित किया गया था,
    • संस्थानों का निर्माण (औद्योगिक, शैक्षिक, चिकित्सा) जिसने प्रगति की शुरुआत की, एवं
    • ज्ञान तथा संचार के क्षेत्रों को खोलना जिसने भारत को विश्व अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी रूप से बांधा।
  • छूटे हुए अवसर: वही  कुछ गलतियाँ एवं असफलताएँ भी हुई हैं –
    • अत्यधिक  निर्धनता एवं अधिकार हीनता की समाप्ति में असमर्थता, भले ही 1947 के पश्चात से इनमें नाटकीय रूप से कमी आई हो,
    • संवैधानिक व्यवस्था एवं मूल्यों को लागू करने में तनाव,
    • तीव्र गति से वृद्धि करता सांप्रदायिक बहुसंख्यकवाद, जिसे स्वतंत्रता सेनानियों एवं संविधान निर्माताओं दोनों ने निश्चित रूप से अस्वीकृत कर दिया था,
    • सत्ता के विकेंद्रीकरण की अपूर्ण प्रकृति, एवं
    • बढ़ती आर्थिक असमानता।
  • भारत की क्षमता: भारत निम्नलिखित कारणों से गौरवान्वित अनुभव करता है-
    • एक लाभप्रद जनसांख्यिकीय लाभांश के साथ विश्व की उदीयमान अर्थव्यवस्थाओं में से एक,
    • एक जीवंत लोकतंत्र जो चुनावों में उत्साहपूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करता है,
    • एक विविधतापूर्ण राजनीति, एवं
    • एक विविधतापूर्ण अर्थव्यवस्था।

 

ए ट्रिस्ट विद द पास्ट- संबद्ध चुनौतियां

भारत को विशालकाय चुनौतियों का  भी सामना करना पड़ रहा है।

  • वैश्विक अनुदारवाद एवं जलवायु परिवर्तन: इसके लोग एक अधिक अराजक दुनिया में रहते हैं जहाँ सहयोग तथा उदार व्यापार संबंधों को नुकसान उठाना पड़ा है एवं जहाँ जलवायु परिवर्तन एक चुनौती है।
  • अति केंद्रीकरण: एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति का उदय एवं समेकन जो सत्ता को केंद्रीकृत करना चाहता है तथा भारत के विचार को समांगीकृत करना चाहता है।
    • इसने समग्र प्रगति के साधन के रूप में विविधता एवं समावेश को मान्यता प्रदान करने की संवैधानिक संरचना को अनावृत करने की धमकी दी है।
  • समावेशी विकास के माध्यम से आर्थिक प्रगति – 1990 के दशक के प्रारंभ में व्यापक सुधारों के पश्चात   त्वरित हुई एक प्रक्रिया एवं 2000 के दशक के मध्य में कल्याण के लिए अधिकार-आधारित दृष्टिकोण का प्रारंभ – विगत कुछ वर्षों में मंद हुआ है।
  • अंतर-राज्यीय असमानता: दक्षिण एवं पश्चिमी भारत के साथ अन्य क्षेत्रों की तुलना में शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल  तथा संपूर्ण आर्थिक विकास में बेहतर परिणाम देने के साथ, अंतर-राज्यीय असमानताओं में वृद्धि हुई है।
    • यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर निकट भविष्य में सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श किए जाने की आवश्यकता है।

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निष्कर्ष

  • भारत को 1990 के दशक में बनाई गई नीतियों को जारी रखना चाहिए, जो एक अधिकार दृष्टिकोण के साथ समग्र कल्याण पर विश्वास करते हुए उद्यमशीलता की ऊर्जा को पल्लवित होने की अनुमति प्रदान करती है, जिसे 2000 के दशक के अंत में अपनी जनसांख्यिकीय क्षमता का उपयोग करने में सहायता करने हेतु प्रोत्साहन दिया गया था।
  • 21वीं सदी में भारत की प्रगति सामाजिक न्याय, समानता एवं विविधता में एकता जैसे मूल्यों के पुन: प्रज्वलन पर निर्भर करेगी।

 

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