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शिवगिरी तीर्थयात्रा एवं ब्रह्म विद्यालय

शिवगिरी तीर्थयात्रा एवं ब्रह्म विद्यालय- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 1: भारतीय इतिहास- भारतीय संस्कृति प्राचीन से आधुनिक समय तक कला रूपों, साहित्य एवं वास्तुकला के मुख्य पहलुओं को समाहित करेगी।

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समाचारों में शिवगिरि तीर्थ एवं ब्रह्म विद्यालय 

  • प्रधानमंत्री शिवगिरि तीर्थयात्रा की 90वीं वर्षगांठ तथा 7 लोक कल्याण मार्ग पर ब्रह्म विद्यालय की स्वर्ण जयंती के वर्ष भर चलने वाले संयुक्त समारोह के उद्घाटन समारोह में भाग लेंगे।
    • प्रधानमंत्री वर्ष भर चलने वाले संयुक्त समारोहों के लिए लोगो का विमोचन भी करेंगे।
  • शिवगिरि तीर्थ एवं ब्रह्म विद्यालय दोनों महान समाज सुधारक श्री नारायण गुरु के आशीष एवं मार्गदर्शन से  प्रारंभ किए गए थे।

शिवगिरी तीर्थयात्रा के बारे में तथ्य

  • शिवगिरी तीर्थ यात्रा के बारे में: शिवगिरी तीर्थ यात्रा प्रत्येक वर्ष तीन दिनों के लिए 30 दिसंबर से 1 जनवरी तक तिरुवनंतपुरम के शिवगिरी में आयोजित की जाती है।
    • शिवगिरी तीर्थयात्रा 1933 में मुट्ठी भर भक्तों के साथ प्रारंभ हुई थी, किंतु अब यह दक्षिण भारत में प्रमुख आयोजनों में से एक बन गई है।
  • उद्देश्य: श्री नारायण गुरु के अनुसार तीर्थ यात्रा का उद्देश्य लोगों के मध्य व्यापक ज्ञान का निर्माण होना चाहिए एवं तीर्थयात्रा उनके समग्र विकास तथा समृद्धि में सहायता करनी चाहिए।
  • फोकस क्षेत्र: शिवगिरी तीर्थ यात्रा आठ विषयों जैसे शिक्षा, स्वच्छता, धर्मपरायणता, हस्तशिल्प, व्यापार एवं वाणिज्य, कृषि, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी एवं संगठित प्रयास पर केंद्रित है।
  • भागीदारी: प्रत्येक वर्ष, जाति, पंथ, धर्म एवं भाषा के बावजूद दुनिया भर से लाखों भक्त तीर्थ यात्रा में भाग लेने के लिए शिवगिरी आते हैं।

 

ब्रह्म विद्यालय के बारे में मुख्य बिंदु 

  • ब्रह्म विद्यालय के बारे में: सभी धर्मों के सिद्धांतों को समभाव तथा समान सम्मान के साथ सिखाने के लिए एक स्थान निर्मित करने के श्री नारायण गुरु के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए शिवगिरी के ब्रह्म विद्यालय की स्थापना की गई थी।
  • ब्रह्म विद्यालय श्री नारायण गुरु के कार्यों एवं विश्व के सभी महत्वपूर्ण धर्मों के ग्रंथों सहित भारतीय दर्शन पर 7 वर्ष का एक पाठ्यक्रम प्रदान करता है।

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श्री नारायण गुरु के बारे में

  • जन्म एवं मृत्यु: श्री नारायण गुरु का जन्म 22 अगस्त 1856 को केरल के तिरुवनंतपुरम के पास एक गांव में एझावा परिवार में हुआ था।
    • श्री नारायण गुरु की मृत्यु 20 सितंबर, 1928 को हुई थी। इस दिन को केरल में श्री नारायण गुरु समाधि के रूप में मनाया जाता है।
  • इस समय के दौरान, एझवा समुदाय के लोगों को अवर्ण माना जाता था एवं केरल के जाति-ग्रस्त समाज में सामाजिक अन्याय का सामना करना पड़ता था।
  • नारायण गुरु एक समाज सुधारक थे। उन्हें केरल के सामाजिक ताने-बाने को बदलने एवं केरलवासियों की मान्यताओं को उस समय अकल्पनीय रूप से परिवर्तित करने का श्रेय दिया गया है।
  • उनके दर्शन ने सदैव सामाजिक समानता, सभी के लिए शिक्षा एवं आध्यात्मिक ज्ञान की वकालत की।
    • श्री नारायण गुरु, आदि शंकराचार्य द्वारा सामने रखे गए अद्वैत के सिद्धांत अद्वैत वेदांत के सबसे बड़े समर्थकों एवं पुनर्मूल्यांकनकर्ताओं में से एक बन गए।

 

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