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पोलियो वायरस: लंदन, न्यूयॉर्क और जेरूसलम में मिला 

पोलियो- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: शासन, प्रशासन एवं चुनौतियां- सामाजिक क्षेत्र/स्वास्थ्य से संबंधित सेवाओं के विकास  एवं प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।

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पोलियो वायरस चर्चा में क्यों है?

  • हाल ही में, पोलियो, एक घातक रोग, दशकों में पहली बार लंदन, न्यूयॉर्क एवं यरुशलम में प्रसारित होती हुई पाई गई है, जिससे टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।
  • वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियो का पता ब्रिटेन की राजधानी लंदन एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क में अपशिष्ट जल में पाया गया, जिसमें न्यूयॉर्क राज्य में पक्षाघात का एक मामला दर्ज किया गया।
  • जेरूसलम, इजराइल में भी अनुवांशिक रूप से (जेनेटिकली) समरूप इसी तरह का वायरस पाया गया है एवं वैज्ञानिक इस कड़ी को समझने में लगे हैं।

 

हाल ही में पोलियो के प्रसार के कारण

  • कोविड-19  पश्चात यात्रा: जबकि ब्रिटेन एवं संयुक्त राज्य अमेरिका सहित देश अब पोलियो लाइव वैक्सीन का उपयोग नहीं करते हैं।
    • यद्यपि, अन्य देश ऐसे प्रकोपों ​​​​को रोकने के लिए लाइव पोलियो वैक्सीन का उपयोग करते हैं जो वैश्विक प्रसार की अनुमति देता है,  विशेष रूप से जब लोगों ने  कोविड-19 के पश्चात पुनः यात्रा करना प्रारंभ किया।
  • अल्प टीकाकरण वाली आबादी: विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि टीका-व्युत्पन्न एवं वन्य पोलियो दोनों के प्रकोप के पीछे प्रमुख चालक अल्प टीकाकरण वाली आबादी है।
  • कोविड-19 एवं वैक्सीन के प्रति संकोच: संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, महामारी से पूर्व वैक्सीन के प्रति संकोच एक बढ़ती हुई समस्या थी, फिर कोविड-19 ने एक पीढ़ी में नियमित टीकाकरण ने सर्वाधिक बुरा व्यवधान  उत्पन्न किया।
    • 2020 में, वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियो के 1,081 मामले थे, जो विगत वर्ष की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक थे।
    • पोलियो टीकाकरण अभियान को फिर से पटरी पर लाने के व्यापक प्रयासों के बाद 2022 में अब तक 177 मामले सामने आए हैं।

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पोलियो वायरस

  • पोलियो के बारे में: पोलियो विषाणु जनित एक घातक संक्रामक रोग है जो रोगी के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करके प्रत्येक वर्ष हजारों बच्चों को पंगु बना देता था।
  • पोलियो के प्रकार: पोलियो को तीन प्रतिरक्षात्मक रूप से पृथक वन्य पोलियो वायरस उपभेदों में वर्गीकृत किया जा सकता है-
    • वन्य पोलियो वायरस टाइप 1 (WPV1)
    • वन्य पोलियो वायरस टाइप 2 (WPV2)
    • वन्य पोलियोवायरस टाइप 3 (WPV3)
  • लक्षण: मुख्य रूप से पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करने वाला पोलियो प्रायः स्पर्शोन्मुख होता है, किंतु बुखार एवं उल्टी सहित लक्षण भी उत्पन्न कर सकता है।
  • प्रभाव: प्रभावित 200 रोगियों में से लगभग एक रोगी संक्रमण अपरिवर्तनीय पक्षाघात की ओर अग्रसर होता है एवं उन रोगियों में से 10% तक की मृत्यु हो जाती है।
  • रोकथाम एवं उपचार: पोलियो का कोई उपचार उपलब्ध नहीं है, किंतु चूंकि 1950 के दशक में एक टीका खोजा गया था, पोलियो पूरी तरह से रोकथाम योग्य है।
  • वर्तमान स्थिति: विश्व स्तर पर, रोग का वन्य रूप लगभग विलुप्त हो गया है।
  • अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान अब एकमात्र ऐसे देश हैं जहां अत्यधिक संक्रामक रोग, जो मुख्य रूप से मल के संपर्क में आने से प्रसारित होता है, अभी भी स्थानिक बना हुआ है।
    • किंतु इस वर्ष, मलावी एवं मोजाम्बिक में भी आयातित मामले पाए गए, 1990 के दशक के बाद उन देशों में यह पहला मामला है।
  • भारत में पोलियो: तीन वर्ष के शून्य मामलों के पश्चात, भारत को 2014 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पोलियो-मुक्त प्रमाणन प्राप्त हुआ।
    • देश में वन्य पोलियो वायरस के कारण आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 को ज्ञात हुआ था।
    • पल्स पोलियो अभियान को प्रमुख भारतीय पहल माना जाता है जिसके कारण भारत में पोलियो का उन्मूलन हुआ।

 

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