राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय_00.1
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राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय

राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: भारतीय अर्थव्यवस्था एवं योजना,  संसाधनों का अभिनियोजन, वृद्धि, विकास एवं रोजगार से संबंधित मुद्दे।

 

राष्ट्रीय आय का अर्थ

  • किसी देश की राष्ट्रीय आय का अर्थ देश द्वारा अपने वित्तीय वर्ष के दौरान उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं का अंतिम मूल्य है। आम तौर पर, इसे मुद्रा के संदर्भ में मापा जाता है। यह देश की प्रगति को निर्धारित करने में भी सहायक है।
  • राष्ट्रीय आय मजदूरी, ब्याज, लगान, लाभ का एक संयोजन है, जो क्रमशः श्रम, पूंजी, भूमि एवं उद्यमशीलता जैसे उत्पादन के कारकों द्वारा प्राप्त किया जाता है।
  • राष्ट्रीय आय में सकल एवं निवल राष्ट्रीय आय, बचत या निवल परिदाय/निवल ऋण शामिल है।

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राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय: राष्ट्रीय आय की माप

राष्ट्रीय आय की गणना तीन  विधियों से की जा सकती है

  • आय विधि
  • उत्पाद/मूल्य वर्धित विधि
  • व्यय विधि

 

राष्ट्रीय आय की गणना: आय विधि

  • इस पद्धति में, राष्ट्रीय आय की गणना उत्पादन के सभी कारकों (किराया, मजदूरी, ब्याज, लाभ) एवं स्वरोजगार की मिश्रित-आय को जोड़कर की जाती है।

 

राष्ट्रीय आय की गणना: उत्पाद/मूल्य वर्धित विधि

  • इस पद्धति में, सभी व्यापारिक कंपनियों द्वारा, मुद्रा/धन के संदर्भ में, मूल्य वर्धित को जोड़कर राष्ट्रीय आय की गणना की जाती है।
  • वर्धित मूल्य को इस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है,
  • वर्धित मूल्य = निर्गत का मूल्य – (गैर-कारक) आगत का मूल्य

 

  • यह बाजार मूल्य (एमपी) पर जीडीपी प्रदान करता है, क्योंकि इसमें मूल्यह्रास (इसलिए ‘सकल’) एवं कर (इसलिए ‘बाजार मूल्य’) शामिल हैं।
  • राष्ट्रीय आय तक पहुँचने के लिए (अर्थात एफसी पर एनएनपी)
  • विदेशों से शुद्ध कारक आय जोड़ें: एमपी पर जीएनपी = एमपी पर जीडीपी + एनएफआईए
  • मूल्यह्रास को घटाएं: एमपी पर एनएनपी = एमपी पर जीएनपी – मूल्यह्रास
  • निवल अप्रत्यक्ष कर घटाएं: एफसी पर एनएनपी = एमपी पर एनएनपी – एनआईटी

 

राष्ट्रीय आय की गणना: व्यय विधि

  • इस पद्धति के तहत राष्ट्रीय आय को नीचे दिए गए समीकरण के द्वारा समझा जा सकता है:
  • वाई = सी + आई + जी + (एक्स-एम)

जहां,

  • सी = उपभोग (घरेलू उपभोग व्यय / व्यक्तिगत उपभोग व्यय)
  • आई = निवेश / सकल निजी घरेलू निवेश
  • जी = सरकारी व्यय (सरकारी उपभोग / सकल निवेश व्यय)
  • एक्स = निवल निर्यात (वस्तुओं एवं सेवाओं का सकल निर्यात)
  • एम = निवल आयात (वस्तुओं एवं सेवाओं का सकल आयात)

टिप्पणी: (एक्स – एम) को प्रायः एक्सएन अथवा उससे कम सामान्यतः एनएक्स के रूप में लिखा जाता है, दोनों ” निवल निर्यात” हेतु प्रयुक्त होते हैं।

 

राष्ट्रीय आय एवं संबंधित समुच्चय: विभिन्न शब्दावली

  • राष्ट्रीय आय से जुड़ी विभिन्न अवधारणाएँ हैं जिनमें जीडीपी, जीएनपी, एनडीपी, एनएनपी शामिल हैं। आइए इन अवधारणाओं को विस्तार से समझते हैं

 

सकल घरेलू उत्पाद/जीडीपी

  • जीडीपी का तात्पर्य सकल घरेलू उत्पाद है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को एक वर्ष में किसी देश में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
  • बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) = किसी विशेष वर्ष में अर्थव्यवस्था में उत्पादन का मूल्य में से मध्यवर्ती उपभोग को घटाकर प्राप्त किया जा सकता है।
  • कारक लागत पर सकल घरेलू उत्पाद = बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद – मूल्यह्रास + एनएफआईए (विदेश से शुद्ध कारक आय) – शुद्ध अप्रत्यक्ष कर।

 

सकल राष्ट्रीय उत्पाद (जीएनपी)

  • सकल राष्ट्रीय उत्पाद (जीएनपी) को किसी देश के निवासियों द्वारा आपूर्ति किए गए श्रम एवं संपत्ति द्वारा एक वर्ष में उत्पादित सभी वस्तुओं एवं सेवाओं के बाजार मूल्य के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • अतः, जीएनपी को सकल घरेलू उत्पाद के साथ-साथ कर्मचारियों के मुआवजे, संपत्ति से आय एवं उत्पादन पर निवल करों को घटाकर विदेशों से प्राप्त होने वाली निवल प्राप्तियों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।

गणितीय रूप से,

  • जीएनपी=जीडीपी+एनएफआईए अथवा,
  • जीएनपी=सी+आई+जी+(एक्स-एम) +एनएफआईए

 

शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (एनएनपी)

  • शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (एनएनपी) एक वित्तीय वर्ष के दौरान किसी देश द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के शुद्ध उत्पादन एवं विदेशों से शुद्ध कारक आय का बाजार मूल्य है।

गणितीय रूप से,

  • एनएनपी = जीएनपी-मूल्यह्रास, अथवा,
  • एनएनपी=सी+आई+जी+(एक्स-एम) +एनएफआईए- आईटी- मूल्यह्रास

 

शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (एनएनपी)

  • एनएनपी को सकल राष्ट्रीय उत्पाद के रूप में परिभाषित किया गया है जिसमें टूट-फूट एवं अप्रचलन के माध्यम से अचल पूंजी परिसंपत्तियों (आवास, भवन, मशीनरी, परिवहन उपकरण एवं भौतिकआधारिक संरचना) का मूल्यह्रास घटा है।
  • राष्ट्रीय आय को निम्नानुसार परिभाषित किया जा सकता है:
  • एनआई=एनएनपी +सब्सिडी-ब्याज कर
  • अतः उत्पादन के साधनों द्वारा लगान, मजदूरी, ब्याज एवं लाभ के रूप में प्राप्त आय का योग राष्ट्रीय आय कहलाता है।

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व्यक्तिगत आय (पीआई)

  • व्यक्तिगत आय को प्रत्यक्ष करों से पहले सभी संभावित वैध स्रोतों के माध्यम से किसी देश के व्यक्तियों एवं परिवारों द्वारा प्राप्त कुल धन आय के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
  • गणितीय रूप से, व्यक्तिगत आय को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:
  • पीआई = एनआई-व्यावसायिक आयकर-अवितरित व्यावसायिक लाभ- सामाजिक सुरक्षा योगदान + हस्तांतरण भुगतान।

 

प्रयोज्य आय (डीआई)

  • प्रयोज्य आय को व्यक्तिगत आय से प्रत्यक्ष करों के भुगतान के बाद व्यक्तियों के पास शेष बची आय के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह वास्तविक शेष आय है जिसे व्यक्तियों द्वारा उपभोग हेतु व्यय किया जा सकता है।

गणितीय रूप से,

  • डीआई= पीआई-प्रत्यक्ष कर
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