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नासा पार्कर सोलर प्रोब मिशन

नासा पार्कर सोलर प्रोब मिशन: प्रासंगिकता

  • जीएस 3: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- दैनिक जीवन में विकास तथा उनके अनुप्रयोग एवं प्रभाव।

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नासा पार्कर सोलर प्रोब मिशन: प्रसंग

  • नासा का पार्कर सौर अन्वेषण मिशन (सोलर प्रोब मिशन) सूर्य को छूने वाला इतिहास का प्रथम अंतरिक्ष यान बन गया है। नासा का पार्कर सोलर प्रोब अब सूर्य के ऊपरी वायुमंडल – कोरोना – एवं वहां उपस्थित कणों एवं चुंबकीय क्षेत्रों से होकर गुजरा है।

 

नासा पार्कर सोलर प्रोब मिशन: मुख्य बिंदु

  • पार्कर का सौर प्रोब नवीन खोज कर रहा है जिसे देखने के लिए अन्य अंतरिक्ष यान बहुत दूर थे, जिसमें सौर पवन के भीतर से – सूर्य से कणों का प्रवाह जो हमें पृथ्वी पर प्रभावित कर सकता है, भी सम्मिलित है।
  • 2019 में, पार्कर ने खोजा कि सौर पवन में चुंबकीय विषम (ज़िग-ज़ैग) संरचनाएं, जिन्हें स्विचबेक कहा जाता है, सूर्य के अत्यधिक समीप हैं।
  • कोरोना से ये माप अंतरिक्ष में मौसम की प्रचंड घटनाओं को समझने एवं पूर्वानुमान करने हेतु महत्वपूर्ण होंगे जो दूरसंचार को बाधित कर सकते हैं एवं पृथ्वी के आसपास के उपग्रहों को हानि पहुंचा सकते हैं।
  • किंतु, वे कैसे और कहाँ निर्मित होते हैं यह एक रहस्य बना हुआ है। तब से सूर्य से दूरी को आधा करते हुए, पार्कर सोलर प्रोब अब एक ऐसे स्थान: सौर सतह की पहचान करने के लिए काफी करीब से गुजर चुका है जहां से वे उत्पन्न होते हैं: ।

 

पार्कर सोलर प्रोब मिशन के बारे में

  • पार्कर सोलर प्रोब को 2018 में किसी भी अन्य अंतरिक्ष यान द्वारा पूर्व की तुलना में सूर्य के करीब जाकर उसके रहस्यों का पता लगाने हेतु प्रक्षेपित किया था।
  • नासा के अंतरिक्ष यान ने सौर मंडल में आवेशित कणों को विसर्पण करने वाली सौर पवनों की उत्पत्ति के बारे में अधिक जानने के लिए ग्रहों के समक्ष अपना मार्ग घुमाते हुए एवं धीरे-धीरे सूर्य के करीब धीरे धीरे बढ़ते हुए तीन वर्ष से अधिक समय व्यतीत किया।

 

पार्कर सौर मिशन का उद्देश्य

  • चूंकि सौर क्रिया का पृथ्वी पर जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है, औरोरा उत्पन्न करने से लेकर आधारिक संरचना जैसे उपग्रहों के प्रति संकट उत्पन्न करने तक, वैज्ञानिक इस बारे में अधिक जानना चाहते हैं कि सूर्य किस प्रकार संचालित होता है जिससे अंतरिक्ष के मौसम के बारे में बेहतर पूर्व अनुमान लगाया जा सके।
  • इसने आल्फवेन क्रिटिकल सरफेस की अवस्थिति का अनुमान लगाने में सहायता की।
    • आल्फवेन क्रिटिकल सरफेस सूर्य से एक विशेष दूरी पर एक बिंदु है, जहां गुरुत्वाकर्षण एवं चुंबकीय क्षेत्र अब सौर तत्वों को समीप रखने में सक्षम नहीं हैं।
    • यह उस बिंदु से है जहां सौर पवनें सूर्य से दूर, कभी वापस न लौटने को प्रवाहित होती है। नो रिटर्न के बिंदु को आल्फवेन क्रिटिकल सरफेस कहा जाता है एवं पार्कर के पहुंचने से पूर्व वैज्ञानिक यह मापने में सक्षम नहीं थे कि यह निश्चित रूप से कहां था।
  • यह सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के उन पहलुओं का पता लगाने में सहायता करेगा जो प्रत्यक्ष रुप से जीवन एवं समाज को प्रभावित करते हैं।
  • यह समझना कि तेज सौर पवनों के घटक कहां और कैसे प्रकट होते हैं, वैज्ञानिकों को एक लंबे समय से चले आ रहे सौर रहस्य: कैसे कोरोना लाखों डिग्री तक गर्म होता है, जो आंतरिक सौर सतह से कहीं अधिक गर्म होता है, का उत्तर देने में सहायता प्राप्त हो सकती है।
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