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जीएसएलवी एमके-III: इसरो पहली बार जीएसएलवी के साथ वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपित करेगा!

जीएसएलवी एमके-III: यूपीएससी के लिए प्रासंगिकता

 

जीएस 3: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी

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जीएसएलवी एमके-III: चर्चा में क्यों है?

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन/इसरो) अंतरिक्ष में वनवेब द्वारा एक ब्रॉडबैंड समूह के एक भाग के रूप में 36 उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की तैयारी के अंतिम चरण में है।
  • यह प्रक्षेपण जीएसएलवी एमके 3 रॉकेट की प्रथम व्यावसायिक उड़ान होगी।
  • 36 उपग्रहों को भू तुल्यकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल/GSLV) एमके-III द्वारा अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया जाएगा।
  • इसरो ने जीएसएलवी एमके-III से प्रक्षेपण यान को एलवीएम-3 के रूप में नया स्वरूप दिया है। जबकि  प्रक्षेपण यान का नाम बदलने की प्रथा असामान्य नहीं है, यह भारत के लिए नया है तथा एलवीएम-3 का  तात्पर्य लॉन्च व्हीकल मार्क 3 है।

 

जीएसएलवी एमके-III: इसरो ने जीएसएलवी एमके-III को एलवीएम में क्यों बदला है?

  • जीएसएलवी से एलवीएम में यान का नाम बदलने के पीछे एकमात्र कारण यह है कि रॉकेट भू-तुल्यकालिक कक्षा में उपग्रहों को तैनात नहीं करेगा। वनवेब उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ आर्बिट/एलईओ) में 1,200 किलोमीटर की ऊंचाई पर कार्य करते हैं।
  • दूसरी ओर, भू-तुल्यकालिक कक्षा पृथ्वी की भूमध्य रेखा से 35,786 किलोमीटर ऊपर अवस्थित है। यह 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकंड की अवधि वाली पृथ्वी की एक पुरःक्रमित, निम्न झुकाव वाली कक्षा है।
  • भू-तुल्यकालिक कक्षा में एक अंतरिक्ष यान एक स्थिर देशांतर पर पृथ्वी के ऊपर बना हुआ प्रतीत होता है,  यद्यपि यह उत्तर तथा दक्षिण की ओर विचरण करता हुआ प्रतीत हो सकता है।
  • जीएसएलवी एमके-III को दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन बूस्टर एवं एक लिक्विड कोर स्टेज के साथ लो अर्थ ऑर्बिट में उपग्रहों को तैनात करने हेतु समनुरूप किया गया है जिन्हें दूसरे प्रक्षेपण पैड पर एकीकृत किया गया है।

 

जीएसएलवी एमके-III: जीएसएलवी एमके 3 किस तरह का रॉकेट है?

  • जीएसएलवी एमके3 रॉकेट इसरो द्वारा विकसित तीन चरणों वाला वजनी प्रक्षेपण यान है।
  • वाहन में दो ठोस स्ट्रैप-ऑन मोटर्स (ठोस ईंधन का दहन होता है), एक कोर-स्टेज तरल बूस्टर (तरल ईंधन के संयोजन का दहन करता है) एवं एक निम्नतापी (क्रायोजिनिक) ऊपरी चरण (तरल ऑक्सीजन के साथ तरल हाइड्रोजन का दहन करता है)।
  • जीएसएलवी एमके III को चार टन वर्ग के उपग्रहों को भू-तुल्यकालिक अंतरण कक्षा (जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट/GTO)  अथवा लगभग 10 टन लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो कि इसके पूर्ववर्ती जीएसएलवी एमके II की क्षमता से लगभग दोगुना है।

 

जीएसएलवी एमके-III: व्यावसायिक प्रक्षेपण के लिए  यह पीएसएलवी के स्थान पर जीएसएलवी का उपयोग करना क्यों महत्वपूर्ण है?

  • अब तक, इसरो ने वाणिज्यिक प्रक्षेपण हेतु अपने पीएसएलवी रॉकेट (जो 1.75 टन तक लो अर्थ ऑर्बिट तक ले जा सकता है) पर पूर्ण रुप से विश्वास किया है।
  • इस सूची में जीएसएलवी एमके3 को सम्मिलित करने का अर्थ यह होगा कि भारत अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रभाव डाल सकता है एवं इस तरह वजनी ग्राहक उपग्रहों को प्रक्षेपित करके राजस्व अर्जित कर सकता है।
  • जबकि भारत के जीएसएलवी एमके3 ने आज तक सभी चार भारतीय राष्ट्रीय मिशनों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया है, यह प्रथम बार होगा जब रॉकेट ग्राहक उपग्रहों को सशुल्क अंतरिक्ष में ले जाने की सेवा का प्रदर्शन करेगा।

 

जीएसएलवी एमके-III: इसरो के प्रक्षेपण यान

  • इसरो वर्तमान में दो प्रक्षेपण यानों – पीएसएलवी (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) एवं जीएलएसवी (जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) का उपयोग करता है।
  • किंतु इनके भी अनेक संस्करण हैं। पीएसएलवी इसरो का सर्वाधिक विश्वसनीय रॉकेट है, जिसके 54 प्रयासों में से 52 सफल प्रक्षेपण हुए हैं।
  • जीएसएलवी बहुत अधिक शक्तिशाली रॉकेट हैं एवं भारी उपग्रहों को अंतरिक्ष में सुदूर तक ले जाने के लिए  निर्देशित हैं।
  • अब तक, इसरो ने मिशन के लिए 18 जीएसएलवी रॉकेटों का उपयोग किया है – इनमें से चार विफल रहे।
  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान ने विशेष रूप से छोटे एवं सूक्ष्म उपग्रहों के लिए एक प्रक्षेपण यान भी विकसित किया है – लघु उपग्रह प्रक्षेपण वाहन, अथवा एसएसएलवी – जिसका उद्देश्य ऐसे उपग्रह प्रक्षेपणों की वैश्विक मांग में वृद्धि करना है।

 

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