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मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51ए) | भाग IV-ए | भारतीय संविधान

मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51ए)- यूपीएससी परीक्षा हेतु प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 2: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएं, संशोधन, महत्वपूर्ण प्रावधान एवं आधारिक संरचना।

मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51ए) | भाग IV-ए | भारतीय संविधान_40.1

मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51ए): भाग IV-

  • मौलिक कर्तव्य के बारे में: मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51ए) मूल रूप से भारतीय नागरिकों पर देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित करने एवं भारत की एकता को अक्षुण्ण बनाए रखने हेतु नैतिक दायित्व (विधिक नहीं) हैं।
  • 42वां संशोधन: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा दस मौलिक कर्तव्यों (अनुच्छेद 51ए) को संविधान में समाविष्ट किया गया।
    • भाग IV- ए: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने संविधान में भाग IV- ए स्थापित किया जिसके अंतर्गत सभी मौलिक कर्तव्यों को सूचीबद्ध किया गया है।
    • 86वां संशोधन: 11वें मौलिक कर्तव्य को बाद में 2002 के 86वें संशोधन अधिनियम द्वारा सूची में समाविष्ट किया गया।
  • स्वर्ण सिंह समिति: मौलिक कर्तव्यों (अनुच्छेद 51ए) को संविधान में स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुतियों के आधार पर समाविष्ट किया गया था।
  • स्रोत: भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51ए) की उत्पत्ति तत्कालीन सोवियत संघ के संविधान से हुई है।

 

मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51ए)- मौलिक कर्तव्यों की सूची

 

संवैधानिक अनुच्छेद प्रावधान
अनुच्छेद 51 ए (ए) संविधान का पालन करना तथा उसके आदर्शों एवं संस्थाओं, राष्ट्रीय ध्वज एवं राष्ट्रगान का सम्मान करना।
अनुच्छेद 51 ए (बी) स्वतंत्रता हेतु हमारे राष्ट्रीय संघर्ष को प्रेरित करने वाले महान आदर्शों को संजोना एवं उनका पालन करना।
अनुच्छेद 51 ए (सी) भारत की संप्रभुता, एकता एवं अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने तथा उसकी रक्षा  करना।
अनुच्छेद 51 ए (डी) देश की रक्षा करना एवं ऐसा करने के लिए बुलाए जाने पर राष्ट्रीय सेवाएं प्रदान करना।
अनुच्छेद 51 ए (ई) भारत के सभी लोगों के मध्य धार्मिक, भाषाई, एवं क्षेत्रीय या वर्गीय विविधताओं से परे सद्भाव एवं समान बंधुत्व/भ्रातृत्व की भावना को प्रोत्साहित करना; महिलाओं के सम्मान के प्रति अपमानजनक प्रथाओं का त्याग करना।
अनुच्छेद 51 ए (एफ) हमारी सामासिक (मिली-जुली) संस्कृति की समृद्ध विरासत को महत्व देना एवं उसका संरक्षण करना।
अनुच्छेद 51 ए (जी) वनों, झीलों, नदियों एवं वन्य जीवन सहित प्राकृतिक पर्यावरण को महत्व देना, उसकी रक्षा करना एवं उसमें संवर्धन करना तथा  प्राणी मात्र (जीवित प्राणियों) के प्रति दया भाव रखना।
अनुच्छेद 51 ए (एच) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद एवं ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना विकसित करना।
अनुच्छेद 51 ए (आई) सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना एवं हिंसा से दूर रहना।
अनुच्छेद 51 ए (जे) व्यक्तिगत एवं सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता की दिशा में सतत प्रयास करना ताकि राष्ट्र निरंतर प्रयास एवं उपलब्धि के उच्च स्तर तक पहुंचे।
अनुच्छेद 51ए (के) छह से चौदह वर्ष की आयु के मध्य, जैसा भी मामला हो, अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करने हेतु माता-पिता अथवा अभिभावक का कर्तव्य।

मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51ए) | भाग IV-ए | भारतीय संविधान_50.1

मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51ए)- प्रमुख विशेषताएं

  • मौलिक कर्तव्यों की प्रकृति: मौलिक कर्तव्य मूल रूप से नागरिकों पर नैतिक एवं नागरिक दायित्व हैं एवं विधिक (कानूनी) रूप से गैर-बाध्यकारी प्रकृति के हैं।
    • उदाहरण के लिए: अनुच्छेद 51 ए (बी) के अंतर्गत स्वतंत्रता संग्राम के महान आदर्शों को संजोना एक नैतिक नीति वचन है। अनुच्छेद 51 ए (ए) के अंतर्गत संविधान, राष्ट्रीय ध्वज एवं राष्ट्रगान का सम्मान करना एक नागरिक कर्तव्य है।
  • मौलिक कर्तव्यों का दायरा: मौलिक कर्तव्य केवल भारत के नागरिकों पर लागू होते हैं एवं विदेशियों पर लागू नहीं होते हैं।
  • किसी न्यायालय में वाद योग्य नहीं: संविधान न्यायालयों द्वारा मौलिक कर्तव्यों को प्रत्यक्ष रूप से लागू करने का प्रावधान नहीं करता है। इसलिए, मौलिक कर्तव्य विधि  के न्यायालय में गैर-वाद योग्य हैं।

प्रमुख संवैधानिक संशोधन अधिनियमों की सूची- भाग 1

प्रमुख संवैधानिक संशोधन अधिनियमों की सूची- भाग 3

अनुच्छेद 32 एवं अनुच्छेद 226: भारतीय संविधान में रिट के प्रकार और उनका विस्तार क्षेत्र 

भारतीय संविधान और उनके स्रोत: देशों से उधार ली गई विशेषताओं की सूची 42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 संविधान (127वां संशोधन) विधेयक, 2021 संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2021
भारत के राष्ट्रपति का वीटो पावर मूल अधिकारों की सूची राज्य के नीति निदेशक तत्वों का वर्गीकरण (डीपीएसपी) न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम प्रणाली
विगत 15 संवैधानिक संशोधन अनिश्चित काल के लिए स्थगन/एडजर्नमेंट साइन डाई अखिल भारतीय न्यायिक सेवाएं न्यायालय की अवमानना

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