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प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध- यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रासंगिकता

  • जीएस पेपर 1: भारतीय इतिहास- आधुनिक भारतीय इतिहास अठारहवीं शताब्दी के मध्य से लेकर वर्तमान तक- महत्वपूर्ण घटनाएं, व्यक्तित्व, मुद्दे।

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प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध की पृष्ठभूमि 

  • प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी एवं मराठा साम्राज्य के मध्य 1775-1782 के दौरान लड़ा गया था।
  • मराठा शक्ति का कमजोर होना: पानीपत के तृतीय युद्ध के पश्चात, भारत में मराठा शक्ति का ह्रास होने लगा।
    • 1761 में पेशवा बालाजी बाजी राव की मृत्यु हो गई एवं उनके पुत्र माधवराव प्रथम ने उनका उत्तराधिकार ग्रहण किया, जो पानीपत की तीसरी लड़ाई में खोए हुए कुछ क्षेत्रों को पुनः प्राप्त करने में सक्षम थे।
  • मराठा सिंहासन के लिए युद्ध: 1770 के दशक के प्रारंभ में माधवराव प्रथम की मृत्यु हो गई, जिससे नारायण राव (माधवराव प्रथम के पुत्र) तथा चाचा रघुनाथराव के मध्य मराठा के सिंहासन के लिए युद्ध लड़ा गया।

 

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध के कारण

  • सूरत की संधि 1775: इस पर रघुनाथ राव एवं ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (ईआईसी) के मध्य हस्ताक्षर किए गए थे।
  • पेशवा के पद पर रघुनाथराव के दावे का समर्थन करने के लिए ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी सहमत हो गई।
    • बदले में, रघुनाथराव ने साल्सेट तथा बेसिन को अंग्रेजों के हवाले कर दिया।
  • प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का आरंभ: 1775 में सूरत की संधि को प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध की शुरुआत माना जाता है।

 

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का क्रम

  • ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा समर्थित रघुनाथराव ने मराठा के पेशवा के खिलाफ युद्ध ने आक्रमण किया एवं विजय प्राप्त की।
  • अंग्रेजों के मध्य असहमति: वारेन हेस्टिंग्स के अंतर्गत ब्रिटिश कलकत्ता परिषद ने रघुनाथराव एवं बॉम्बे प्रेसीडेंसी के मध्य हुए समझौते को निरस्त कर दिया।
    • ब्रिटिश कलकत्ता परिषद ने 1776 में मराठा मंत्रियों के साथ पुरंदर के एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किए।
    • रघुनाथराव को मात्र पेंशन दी गई थी तथा सालसेट पर अंग्रेजों का कब्जा था।
  • पुरंदर 1776 के समझौते का उल्लंघन: बॉम्बे में ब्रिटिश स्थापना ने इस संधि का उल्लंघन किया  एवं रघुनाथराव की रक्षा की।
    • दूसरी ओर, नाना फडणवीस ने फ्रांसीसियों को पश्चिमी तट पर एक बंदरगाह निर्मित करने की अनुमति प्रदान की।
  • वडगाँव में लड़ाई: उपरोक्त संघर्ष के कारण पुणे के पास वडगाँव में एक युद्ध लड़ा गया जिसमें महादजी  सिंधिया के अधीन मराठों ने अंग्रेजों पर निर्णायक विजय प्राप्त की।
    • वडगांव की संधि: 1779 में वडगांव में मराठों के साथ अपमानजनक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए अंग्रेज बाध्य हुए।

 

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध संधि

  • वडगांव की संधि ने अंग्रेजों एवं मराठा साम्राज्य के  मध्य के मतभेद को हल नहीं किया। इसके बाद, उनके  मध्य कई अन्य लड़ाइयाँ लड़ी गईं।
  • सालबाई की संधि: अनेक युद्धों के पश्चात मराठों एवं अंग्रेजों दोनों ने 1782 में  प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध समाप्त करने के लिए सालबाई की संधि पर हस्ताक्षर किए।

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प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध के परिणाम

  • ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी: इसने मराठों से छीने गए साल्सेट तथा भरूच को सुरक्षित रखा।
    • ब्रिटिश  ईस्ट इंडिया कंपनी ने मराठों से एक प्रत्याभूति भी प्राप्त की कि वे अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध में मैसूर के हैदर अली का समर्थन नहीं करेंगे।
    • मराठा भी हैदर अली से दक्कन में अपनी संपत्ति वापस लेने के लिए सहमत हुए।
    • मराठों ने फ्रांसीसियों को और क्षेत्र नहीं देने पर भी सहमति व्यक्त की।
  • मराठा साम्राज्य के पेशवा: पुरंदर की संधि के बाद अंग्रेजों द्वारा लिए गए सभी क्षेत्रों को वापस मराठों को सौंप दिया गया।
    • अंग्रेजों ने माधवराव द्वितीय (नारायण राव के पुत्र) को पेशवा के रूप में स्वीकार कर लिया।
    • रघुनाथराव को प्रत्येक वर्ष 3 लाख रुपये पेंशन प्राप्त होने वाली थी।

 

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